डिजिटल भारत के साथ साइबर सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती, साइबर अपराध के खिलाफ सभी एजेंसियां एकजुट: अमित शाह

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि साइबर अपराध के खिलाफ एक मजबूत, समन्वित और तकनीक-सक्षम तंत्र की सख्त जरूरत है। उन्होंने कहा कि इस चुनौती से निपटने के लिए केंद्र सरकार की विभिन्न एजेंसियां, राज्य पुलिस और अन्य संस्थान मिलकर काम कर रहे हैं। गृह मंत्री “साइबर-आधारित धोखाधड़ी से निपटना और इसके तंत्र को समाप्त करना” विषय पर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।

सभी प्रमुख संस्थान साइबर अपराध रोकने में जुटे

अपने संबोधन में अमित शाह ने कहा कि इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (आई4सी), राज्य पुलिस, सीबीआई, एनआईए, ईडी, दूरसंचार विभाग, बैंकिंग प्रणाली, आईटी मंत्रालय, आरबीआई और न्यायपालिका जैसे संस्थान साइबर अपराध को रोकने और कम करने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हर एजेंसी की अपनी भूमिका और जिम्मेदारी है, लेकिन आपसी समन्वय के बिना इस लड़ाई में सफलता संभव नहीं है।

आई4सी पोर्टल का बढ़ा उपयोग, लाखों शिकायतें दर्ज

गृह मंत्री ने बताया कि जनवरी 2020 से 2025 के बीच आई4सी के साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल का व्यापक स्तर पर उपयोग हुआ है। 30 नवंबर 2025 तक इस पोर्टल का 23 करोड़ से अधिक बार इस्तेमाल किया गया। इसी अवधि में 82 लाख साइबर अपराध की शिकायतें दर्ज की गईं, जिनमें से करीब 1 लाख 84 हजार शिकायतें एफआईआर में बदली गईं और कई मामलों का सफलतापूर्वक निपटारा भी किया गया।

साइबर अपराध के खिलाफ बहुआयामी रणनीति पर काम

अमित शाह ने कहा कि गृह मंत्रालय ने साइबर अपराध से निपटने के लिए काफी पहले ही एक व्यापक रणनीति अपनाई है। इसमें रियल-टाइम रिपोर्टिंग, फॉरेंसिक लैब का नेटवर्क, क्षमता निर्माण, अनुसंधान एवं विकास, साइबर जागरूकता को समाज तक पहुंचाना और साइबर स्पेस में साइबर हाइजीन सुनिश्चित करना शामिल है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि इन सभी प्रयासों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर ही एक सुरक्षित और मजबूत साइबर तंत्र बनाया जा सकता है।

आई4सी ने खड़ा किया मजबूत साइबर इंफ्रास्ट्रक्चर

गृह मंत्री ने बताया कि जनवरी 2019 में गृह मंत्रालय द्वारा आई4सी की स्थापना की गई थी। उन्होंने कहा कि आई4सी ने एक मजबूत और प्रभावी साइबर इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा किया है। इसने विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया, देश के कई हिस्सों में आवश्यक साइबर ढांचा विकसित किया और साइबर अपराधियों के खिलाफ ठोस कदम उठाए हैं।

डिजिटल क्रांति के साथ बढ़ी साइबर चुनौतियां

अमित शाह ने कहा कि 11 साल पहले देश में करीब 25 करोड़ इंटरनेट उपभोक्ता थे, जो अब बढ़कर 100 करोड़ हो चुके हैं। ब्रॉडबैंड कनेक्शनों में 16 गुना वृद्धि हुई है और इनकी संख्या 100 करोड़ से अधिक हो गई है। उन्होंने बताया कि 1 जीबी डेटा की कीमत में 97% की कमी आई है, जिससे डिजिटल कनेक्टिविटी और उपयोग में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है।

यूपीआई और डिजिटल ट्रांजेक्शन में भारत की वैश्विक बढ़त

गृह मंत्री ने कहा कि भारतनेट से जुड़ी पंचायतों की संख्या 11 साल पहले 546 थी, जो अब बढ़कर 2 लाख हो गई है। यूपीआई के तहत वर्ष 2024 में 233 ट्रिलियन भारतीय रुपए मूल्य के 181 बिलियन डिजिटल लेन-देन किए गए। उन्होंने कहा कि दुनिया में हर दूसरा डिजिटल ट्रांजेक्शन भारत में हो रहा है। वर्ष 2024 में भुगतान प्रणाली के कुल 97% ट्रांजेक्शन डिजिटल थे और वॉल्यूम के हिसाब से 99% लेन-देन डिजिटल माध्यम से हुए।

साइबर धोखाधड़ी की साझा समझ विकसित करना सम्मेलन का लक्ष्य

सम्मेलन का प्राथमिक उद्देश्य भारत में साइबर-सक्षम धोखाधड़ी के पैमाने, रुझानों और इसके लगातार बदलते स्वरूप को लेकर सभी संबंधित एजेंसियों के बीच साझा समझ विकसित करना था। (इनपुट: आईएएनएस)