17/02/26 | 10:05 am

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खो-खो विश्व कप विजेता के तीन खिलाड़ियों को दिल्ली सीएम ने दिए 75 लाख रुपये 

दिल्ली खेल महाकुंभ के उद्घाटन समारोह में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दिल्ली के तीन खो-खो खिलाड़ियों को 75 लाख रुपये का नकद पुरस्कार दिया। ये तीनों खिलाड़ी मेहुल, अंशु कुमारी और नसरीन ने जनवरी 2025 में आयोजित पहले खो-खो विश्व कप में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।

भारत ने इस उद्घाटन टूर्नामेंट में पुरुष और महिला दोनों वर्गों में खिताब जीता। यह प्रतियोगिता 13 से 19 जनवरी 2025 तक नई दिल्ली के आईजी स्टेडियम में आयोजित की गई थी, जिसमें 23 देशों की 20 पुरुष और 19 महिला टीमें शामिल हुईं, सभी छह महाद्वीपों से प्रतिनिधित्व मिला।

21 वर्षीय मेहुल ने इस वर्ष ओपन स्कूलिंग के माध्यम से कक्षा 12 की परीक्षा दी है और परिणाम कीप्रतीक्षा कर रहे हैं। उनके पिता एक ड्राइवर हैं, जबकि बड़े भाई एडिटिंग का कोर्स कर रहे हैं। वर्तमान में मेहुल गुजरात के गांधीनगर में एक एसएआई फैसिलिटी में प्रशिक्षण ले रहे हैं।

18 वर्षीय अंशु तीन भाई-बहनों में सबसे छोटी हैं और पंजाब के फगवाड़ा स्थित लवली प्रोफेशनलयूनिवर्सिटी से स्पोर्ट्स में बैचलर ऑफ फिजिकल एजुकेशन की पढ़ाई कर रही हैं। वह पुरस्कार राशि से अपने माता-पिता के लिए एक घर खरीदना चाहती हैं और स्पोर्ट्स कोटा के माध्यम से सरकारी नौकरी

हासिल करना चाहती हैं। अंशु ने कहा, “हम लंबे समय से अलीपुर में किराए के मकान में रह रहे हैं। अब मैं अपने माता-पिता के लिए एक घर खरीदकर उन्हें उपहार के रूप में देना चाहती हूं।” वह रेलवे में सरकारी नौकरी पाने की भी इच्छुक हैं। उनके भाई अंकित ने उनकी ओर से पुरस्कार प्राप्त किया।

वहीं 27 वर्षीय नसरीन, एक अर्जुन अवार्डी खो-खो खिलाड़ी, 11 भाई-बहनों में पांचवें स्थान पर हैं, सात बहनें और चार भाई। उनके पिता मोहम्मद गफूर 2018 तक परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे। नसरीन भारतीय महिला राष्ट्रीय खो-खो टीम की पूर्व कप्तान हैं। 

खो-खो फेडरेशन ऑफ इंडिया (केकेएफआई) के अध्यक्ष सुधांशु मित्तल ने कहा कि खो-खो अब न सिर्फ पहचान देता है, बल्कि करियर के अवसर भी प्रदान करता है और युवा इस खेल में करियर बनाने के लिए आकर्षित हो रहे हैं। उन्होंने कहा, “खो-खो अब एक आधुनिक खेल है, जो स्वदेशी रूप से डिजाइन किए गए अत्याधुनिक मैट पर खेला जाता है और इसमें प्रशिक्षण, पोषण, काउंसलिंग आदि सभी आयामों में स्पोर्ट्स साइंस के तत्व शामिल हैं। बढ़ती पहचान इस खेल की बढ़ती लोकप्रियता और राष्ट्रीय स्तर पर इसकी मजबूत उपस्थिति तथा वैश्विक स्तर पर इसके बढ़ते फुटप्रिंट का प्रमाण है।”