दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने गुरुवार को आगामी ब्रिक्स समिट 2026 (BRICS Summit 2026) की तैयारियों पर समीक्षा बैठक की। इस दौरान, समिट के आयोजन स्थल के तौर पर दिल्ली को चुने जाने के महत्व और सभी स्तरों पर अलग-अलग एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल और तय समय-सीमा में काम पूरा करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया गया।
18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन नई दिल्ली में 12-13 सितंबर 2026 को आयोजित किया जाएगा। भारत चौथी बार ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता करने वाला है। ब्रिक्स बैठक में इस बार प्रमुख विषय आर्थिक सहयोग, वैश्विक शासन सुधार, स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और सतत विकास हैं।
उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा गया, “आगामी ब्रिक्स समिट 2026 के लिए दिल्ली की तैयारियों पर एक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। सभी संबंधित विभागों और एजेंसियों को निर्देश दिया गया कि वे मुख्य जगहों और आने-जाने के रास्तों पर सुचारू ट्रैफिक और सुरक्षा व्यवस्था, शहर के रखरखाव और आपातकालीन चिकित्सा तैयारियों को सुनिश्चित करें।
उन्होंने कहा कि ‘अतिथि देवो भव:’ की हमारी सदियों पुरानी परंपरा के अनुरूप, दिल्ली आने वाले सभी प्रतिनिधियों का व्यवस्थित, सुरक्षित और गर्मजोशी से स्वागत करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
वहीं, 15 अगस्त को नई दिल्ली नगर परिषद (एनडीएमसी) के अध्यक्ष मनोज कुमार द्विवेदी ने एनडीएमसी टीम से आगामी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए उसी प्रतिबद्धता, व्यावसायिकता और तैयारी के साथ तैयार रहने का आह्वान किया था।
18 अगस्त को मुंबई में ब्राजील के कॉन्सल जनरल, जोस मौरो दा फोंसेका कोस्टा कौटो ने कहा था, “मुझे लगता है कि ब्रिक्स देशों के शीर्ष सरकारी अधिकारियों के बीच होने वाली इस नियमित बैठक की सबसे दिलचस्प बात यह है कि हमें यूरोपीय या पश्चिमी देशों के दखल के बिना आपस में निजी तौर पर मिलने का मौका मिलता है।”
कोस्टा कौटो ने कहा था, “इससे हम दुनिया को बेहतर बनाने, अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के कामकाज को सुधारने, अपने जंगलों और जल-संसाधनों को बचाने और हम विकासशील देशों के बीच व्यापार को बेहतर बनाने जैसे मुद्दों पर दिलचस्प विचार साझा कर सकते हैं।”
ब्रिक्स प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं का एक अंतरराष्ट्रीय समूह है। वर्तमान में इसमें 11 पूर्ण सदस्य देश शामिल हैं: ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया। (इनपुट-एजेंसी)


