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वैश्विक चुनौतियों के बावजूद 2026 में 6.5% की दर से बढ़ेगी भारतीय अर्थव्यवस्था : क्रिसिल

वैश्विक स्तर पर सामरिक तनाव और व्यापार चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष 2026 में 6.5% की दर से बढ़ेगी। क्रिसिल की रिपोर्ट के मुताबिक यह वृद्धि मुख्य रूप से सामान्य मानसून और स्थिर वस्तुओं की कीमतों पर निर्भर करेगी। इसके अलावा, खाद्य महंगाई में कमी, 2025-26 के केंद्रीय बजट में दी गई कर रियायतें और सस्ती ब्याज दरें लोगों की खरीद क्षमता बढ़ाने में मदद करेंगी, जिससे अर्थव्यवस्था को और मजबूती मिलेगी।

रिपोर्ट बताती है कि भारत की अर्थव्यवस्था अब महामारी से पहले की स्थिति में लौट रही है। दुनिया भर में उतार-चढ़ाव के बावजूद, परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) के आंकड़ों से पता चलता है कि भारत अब भी प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेजी से बढ़ने वाले देशों में शामिल है। इसकी मुख्य वजह मजबूत आर्थिक नीतियां, कम चालू खाता घाटा, नियंत्रित बाहरी ऋण और पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार हैं, जो सरकार को किसी भी चुनौती से निपटने के लिए आवश्यक लचीलापन प्रदान करते हैं।

क्रिसिल के प्रबंध निदेशक और सीईओ, अमिश मेहता ने कहा कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बढ़ती मांग निकट भविष्य में अर्थव्यवस्था को गति देगी, जबकि लंबी अवधि में निवेश और उत्पादन क्षमता में सुधार आर्थिक मजबूती बनाए रखने में मदद करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर दोनों ही अर्थव्यवस्था की वृद्धि में अहम भूमिका निभाएंगे और 2031 तक विकास को मजबूती देंगे।

रिपोर्ट के अनुसार, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की औसत वार्षिक वृद्धि दर 2025 से 2031 के बीच 9% रहने की उम्मीद है, जो महामारी से पहले 6% थी। इससे इस क्षेत्र का जीडीपी में योगदान 2025 में 17% से बढ़कर 2031 तक 20% हो जाएगा। वहीं, सर्विस सेक्टर आर्थिक विकास का सबसे बड़ा योगदानकर्ता बना रहेगा।

महंगाई में गिरावट और सरकार के बेहतर वित्तीय प्रबंधन के कारण नीतिगत ब्याज दरों में कटौती की संभावना बढ़ गई है, जिससे अर्थव्यवस्था को और मजबूती मिलेगी। क्रिसिल का अनुमान है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अगले वित्त वर्ष में ब्याज दरों में 50-75 बेसिस पॉइंट की कटौती कर सकता है। हालांकि, अमेरिका की ब्याज दर नीति और मौसम से जुड़ी चुनौतियां इस कटौती के समय और प्रभाव को प्रभावित कर सकती हैं।

क्रिसिल के मुख्य अर्थशास्त्री, धर्मकीर्ति जोशी ने चेतावनी दी कि भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत होने के बावजूद, बाहरी कारक अभी भी चुनौतियां पेश कर सकते हैं। खासतौर पर, अमेरिका द्वारा शुरू किए गए व्यापार शुल्क युद्ध (टैरिफ वॉर) से व्यापार प्रभावित हो सकता है, जिससे आर्थिक वृद्धि दर में कुछ अनिश्चितता रह सकती है। लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि भारत में बुनियादी ढांचे के विकास, आर्थिक सुधारों और स्थिर नीतियों पर दिया जा रहा जोर देश की अर्थव्यवस्था को वैश्विक चुनौतियों के बावजूद मजबूत बनाए रखेगा।

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