वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत में कभी नहीं हुई ईंधन की कमी : केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी

केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने आज रविवार को कहा कि चाहे कोविड महामारी हो या वैश्विक युद्ध जैसी परिस्थितियां, भारत में कभी भी पेट्रोलियम उत्पादों की कमी नहीं हुई। उन्होंने इस सफलता का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शिता को दिया। हरदीप पुरी ने बताया कि जब इजरायल ने ईरान पर हमला किया था और खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ा था, तब स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Hormuz) को बंद करने की धमकियां दी जा रही थीं। यही मार्ग विश्व के 20% तेल और गैस निर्यात का मुख्य रास्ता है। इसके बावजूद भारत में आपूर्ति बाधित नहीं हुई। उन्होंने कहा कि “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हमने तेल आपूर्तियों को विविध स्रोतों से सुनिश्चित किया है। अब हमारी अधिकांश आपूर्ति हॉर्मुज जलडमरूमध्य से होकर नहीं आती।”

 

भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल आयात करता है। जब तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो इससे देश का आयात बिल भी बढ़ता है और महंगाई दर में वृद्धि होती है, जिससे आर्थिक विकास प्रभावित होता है। लेकिन भारत ने अब रूस और अमेरिका से आयात बढ़ाकर तेल स्रोतों का विविधीकरण किया है और साथ ही रणनीतिक तेल भंडार बनाकर अपनी आपूर्ति को सुरक्षित किया है। केंद्रीय मंत्री पुरी ने बताया कि देश में अब 23 आधुनिक रिफाइनरियां कार्यरत हैं, जिनकी कुल उत्पादन क्षमता 257 मिलियन मीट्रिक टन प्रतिवर्ष है। इसके अलावा सरकार ने आपात स्थिति से निपटने के लिए रणनीतिक पेट्रोलियम भंडारण सुविधाएं भी विकसित की हैं। पुडूर में 2.25 मिलियन मीट्रिक टन (MMT), विशाखापत्तनम में 1.33 MMT और मैंगलुरु में 1.5 MMT कच्चे तेल के भंडारण की क्षमता है।

 

स्वच्छ ईंधनों को बढ़ावा देने के लिए सरकार की एक बड़ी उपलब्धि ईथेनॉल मिश्रण (E20) है। हरदीप पुरी ने बताया कि भारत ने पेट्रोल में 20% ईथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य 2025 की शुरुआत में ही हासिल कर लिया है, जो कि मूल रूप से 2030 के लिए तय किया गया था। यह उपलब्धि छह साल पहले पूरी कर ली गई, जो भारत के हरित ईंधन की ओर बढ़ते कदमों को दर्शाती है।उन्होंने यह भी कहा कि ई20 ईंधन अब देशभर के सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों- इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के सभी रिटेल आउटलेट्स पर उपलब्ध है। इसके कारण भारत ने ₹1 लाख करोड़ से अधिक की बचत की है, ₹1.5 लाख करोड़ की विदेशी मुद्रा की बचत की है, और यह राशि देश के किसानों को दी गई है। -(IANS)

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