पिछले 11 वर्षों में पूर्वोत्तर भारत में बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में ऐतिहासिक प्रगति हुई है। 2014 से 2025 तक केंद्र सरकार की “एक्ट ईस्ट पॉलिसी” और “नॉर्थ ईस्ट स्पेशल इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट स्कीम (NESIDS)” जैसे प्रमुख कार्यक्रमों के तहत सड़क, रेल, हवाई और डिजिटल कनेक्टिविटी के क्षेत्र में अभूतपूर्व विकास हुआ है। इस दौरान 4,000 किलोमीटर से अधिक नई सड़कों का निर्माण हुआ है, जिससे सीमावर्ती और दूरदराज के इलाकों तक पहुंच आसान हो गई है। वहीं हवाई संपर्क के क्षेत्र में भी बड़ी छलांग देखने को मिली है। इस अवधि में अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम और नागालैंड जैसे राज्यों में 10 नए ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट बनकर तैयार हुए हैं, जिससे इन क्षेत्रों की कनेक्टिविटी देश के बाकी हिस्सों की तरह बेहतर हुई है। ब्रह्मपुत्र नदी पर बने बोगीबील ब्रिज और निर्माणाधीन धुबरी-फुलबाड़ी पुल, जो देश का सबसे लंबा पुल होगा।
वहीं रेलवे के क्षेत्र में भी अभूतपूर्व कार्य हुआ है। अरुणाचल प्रदेश और मिज़ोरम जैसे राज्यों में पहली बार ट्रेनें पहुंचीं, जिसमें मिजोरम को आजादी के बाद पहली बार यात्री ट्रेन सेवा मिली। इसी तरह, मणिपुर और नागालैंड में भी रेलवे नेटवर्क का विस्तार किया गया है। ब्रह्मपुत्र नदी पर Ro-Ro फेरी सेवाओं की शुरुआत से जलमार्गों को दोबारा सक्रिय किया गया है, जिससे कम लागत में माल परिवहन की सुविधा उपलब्ध हो रही है। डिजिटल कनेक्टिविटी को भी सरकार ने प्राथमिकता दी है। भारतनेट प्रोजेक्ट और 4G नेटवर्क कवरेज के जरिए हर जिले में इंटरनेट कनेक्टिविटी बढ़ाई गई है, जिससे डिजिटल खाई को पाटने में मदद मिली है।
सिर्फ NESIDS योजना के तहत ही स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल और सार्वजनिक ढांचे से जुड़े 600 से अधिक प्रोजेक्ट स्वीकृत किए जा चुके हैं। इस निरंतर विकास से न केवल लोगों की जीवन गुणवत्ता में सुधार हुआ है, बल्कि निजी निवेश को आकर्षित करने में भी सहायता मिली है। यह 11 वर्षों की इंफ्रास्ट्रक्चर क्रांति पूर्वोत्तर भारत को आत्मनिर्भर और देश के समग्र विकास का अभिन्न हिस्सा बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम साबित हो रही है।-(PIB)


