लखनऊ कृषि सम्मेलन से निकला विकास का रोडमैप, किसान हित पर फोकस

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लखनऊ में आयोजित उत्तर क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन में कृषि क्षेत्र को नई दिशा देने का स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन औपचारिकता नहीं, बल्कि ठोस निर्णय, कार्ययोजना और जवाबदेही तय करने का मंच है, जहां किसान हित सर्वोपरि रहेगा।

टीम इंडिया की भावना से आगे बढ़ेगी कृषि

समापन सत्र में केंद्रीय कृषि मंत्री ने केंद्र और राज्यों से “टीम इंडिया” की भावना से मिलकर काम करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यह मायने नहीं रखता कि किस राज्य में किस दल की सरकार है, सभी का लक्ष्य किसानों का कल्याण और कृषि क्षेत्र की मजबूती होना चाहिए।

हर तीन महीने में होगी समीक्षा

उन्होंने स्पष्ट किया कि सम्मेलन में उठाए गए सभी मुद्दों पर कार्ययोजना बनाई जाएगी और हर तीन महीने में उसकी समीक्षा होगी। राज्यों को निर्देश दिया गया कि वे अपने प्रस्ताव समय पर भेजें ताकि योजनाओं की स्वीकृति और फंड जारी करने में देरी न हो।

बीज से बाजार तक मजबूत व्यवस्था पर जोर

शिवराज सिंह ने कहा कि अच्छी खेती की बुनियाद गुणवत्तापूर्ण बीज हैं। ब्रीडर, फाउंडेशन और सर्टिफाइड सीड की पूरी श्रृंखला को मजबूत करना जरूरी है। साथ ही नई किस्मों को केवल जारी करने तक सीमित न रखकर उन्हें खेत तक पहुंचाना भी सुनिश्चित करना होगा।

मिट्टी के अनुसार उर्वरक उपयोग की सलाह

उन्होंने संतुलित उर्वरक उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि किसानों को मिट्टी की जरूरत के अनुसार ही खाद का इस्तेमाल करना चाहिए। सॉइल हेल्थ कार्ड को अधिक व्यवहारिक बनाने और वैज्ञानिक सलाह को खेत तक पहुंचाने की आवश्यकता बताई गई।

नकली बीज और खाद पर सख्ती

केंद्रीय मंत्री ने नकली बीज, खाद और कीटनाशकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रयोगशालाओं का पूरा उपयोग हो, सैंपलों की समय पर जांच हो और दोषियों पर प्रभावी कानूनी कार्रवाई की जाए।

छोटे किसानों पर विशेष फोकस

किसान क्रेडिट कार्ड योजना में छोटे किसानों की भागीदारी बढ़ाने के लिए विशेष अभियान चलाने की बात कही गई। साथ ही दलहन और तिलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए भरोसेमंद खरीद व्यवस्था और पारदर्शिता पर जोर दिया गया।

नई तकनीक और फसल विविधीकरण पर जोर

उन्होंने कहा कि फसल विविधीकरण, इंटीग्रेटेड फार्मिंग, नई तकनीक और उत्पादकता वृद्धि भविष्य की दिशा हैं। कृषि क्षेत्र में नई कार्य संस्कृति विकसित करने पर भी बल दिया गया, जिसमें स्पष्ट लक्ष्य, जिम्मेदारी और समयबद्ध क्रियान्वयन शामिल हो।

सम्मेलन में व्यापक चर्चा

सम्मेलन में कृषि ऋण, डिजिटल कृषि, एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड, फार्मर रजिस्ट्री, बागवानी, मृदा स्वास्थ्य और विपणन जैसे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई। राज्यों ने अपने अनुभव साझा किए, जिससे एक राज्य के सफल मॉडल को दूसरे राज्यों में लागू करने की दिशा बनी।

कई राज्यों के मंत्री और विशेषज्ञ शामिल

सम्मेलन में रामनाथ ठाकुर, भागीरथ चौधरी, सूर्यप्रताप शाही समेत विभिन्न राज्यों के मंत्री, अधिकारी और वैज्ञानिक शामिल हुए। सभी ने कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए समन्वित प्रयासों पर जोर दिया। (इनपुट: पीआईबी)