गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (जीईएम) ने पिछले वर्षों में भारत की सार्वजनिक खरीद प्रणाली को अधिक डिजिटल, पारदर्शी और समावेशी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। 9 अगस्त 2016 को शुरू हुए इस प्लेटफॉर्म ने सरकारी खरीद प्रक्रियाओं को तकनीक आधारित और डेटा-संचालित बनाते हुए सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों (एमएसई), स्टार्टअप्स, महिला उद्यमियों और अनुसूचित जाति/जनजाति समुदायों की भागीदारी को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाया है।
सार्वजनिक खरीद में आया बड़ा बदलाव
जीईएम की स्थापना एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक सुधार के रूप में की गई थी। इस प्लेटफॉर्म ने पारंपरिक और खंडित खरीद प्रणाली को डिजिटल स्वरूप देकर मानवीय हस्तक्षेप कम किया है तथा पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा दिया है। ऑनलाइन ऑनबोर्डिंग, पारदर्शी बोली प्रणाली, डिजिटल अनुबंध प्रबंधन और एंड-टू-एंड खरीद प्रक्रियाओं ने सरकारी खरीद में भागीदारी को आसान बनाया है। इससे विभिन्न आकार के व्यवसायों और देश के अलग-अलग क्षेत्रों के उद्यमों को सरकारी खरीद से जुड़ने का अवसर मिला है।
एमएसई की भागीदारी में रिकॉर्ड वृद्धि
जीईएम की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों की बढ़ती भागीदारी है। वर्ष 2016-17 में जहां प्लेटफॉर्म पर केवल 2,396 एमएसई पंजीकृत थे, वहीं अब उनकी संख्या बढ़कर 11.9 लाख से अधिक हो गई है। इसी अवधि में एमएसई से सरकारी खरीद का मूल्य 69 करोड़ रुपए से बढ़कर 8.69 लाख करोड़ रुपए से अधिक हो गया है। वहीं ऑर्डरों की संख्या 2,994 से बढ़कर 2.17 करोड़ से अधिक पहुंच गई है।
महिला उद्यमियों और स्टार्टअप्स को मिला बड़ा मंच
जीईएम ने महिला स्वामित्व वाले उद्यमों को भी नई पहचान दी है। महिला स्वामित्व वाले एमएसई की संख्या 268 से बढ़कर 2.16 लाख से अधिक हो गई है। इनसे खरीद का मूल्य 8 करोड़ रुपए से बढ़कर 93,327 करोड़ रुपए से अधिक पहुंच गया है। स्टार्टअप्स की भागीदारी भी तेजी से बढ़ी है। वर्ष 2016-17 में जहां केवल 88 स्टार्टअप्स प्लेटफॉर्म से जुड़े थे, वहीं अब उनकी संख्या 40,000 से अधिक हो चुकी है। इनसे खरीद का मूल्य 2 करोड़ रुपए से बढ़कर 61,400 करोड़ रुपए से अधिक हो गया है।
एससी-एसटी उद्यमों की भागीदारी भी बढ़ी
जीईएम के माध्यम से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदाय से जुड़े उद्यमों की भागीदारी में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। पंजीकृत एससी-एसटी एमएसई की संख्या 38 से बढ़कर 66,000 से अधिक हो गई है, जबकि इनसे खरीद का मूल्य 21,800 करोड़ रुपए से अधिक पहुंच चुका है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में भी निभाई अहम भूमिका
जीईएम ने केवल खरीद प्रक्रिया तक ही अपनी भूमिका सीमित नहीं रखी, बल्कि सार्वजनिक सेवा वितरण को भी मजबूती दी है। प्लेटफॉर्म ने 324 करोड़ से अधिक वैक्सीन खुराक और 199 करोड़ सिरिंज की खरीद में सहायता की है। इसके अलावा वंदे भारत ट्रेनों के लिए मेडिकल किट, स्वास्थ्य उपकरणों और विभिन्न चिकित्सा आपूर्ति एवं सेवाओं की खरीद को भी सुगम बनाया गया है।
तकनीक से बढ़ी दक्षता और पारदर्शिता
जीईएम अपनी सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित उपकरणों, उन्नत डेटा विश्लेषण, डिजिटल निगरानी प्रणालियों और पारदर्शी नीलामी तंत्र का उपयोग कर रहा है। इससे खरीद प्रक्रियाओं में दक्षता, पारदर्शिता और उपयोगकर्ता अनुभव बेहतर हुआ है।
आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत को मिल रही मजबूती
जीईएम स्थानीय उद्यमों को सरकारी मांग से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बनकर उभरा है। यह प्लेटफॉर्म एमएसई, स्टार्टअप्स, महिला उद्यमियों, सहकारी समितियों और ग्रामीण उद्यमों को सरकारी खरीद में भागीदारी का अवसर देकर आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत जैसे राष्ट्रीय लक्ष्यों को मजबूती प्रदान कर रहा है। जीईएम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मिहिर कुमार ने कहा कि पिछले वर्षों में प्लेटफॉर्म ने पारदर्शी, कुशल और समावेशी सार्वजनिक खरीद प्रणाली विकसित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि जीईएम ने स्थानीय निर्माताओं और उद्यमों को सरकारी खरीद तक संरचित और पारदर्शी पहुंच उपलब्ध कराकर आर्थिक अवसरों का विस्तार किया है। (इनपुट: पीआईबी)


