राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 की घोषणा के बाद स्कूली और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में व्यापक सुधारों की दिशा में कई महत्वपूर्ण पहल की गई हैं। उच्च शिक्षा में मल्टीपल एंट्री और एग्जिट, राष्ट्रीय क्रेडिट फ्रेमवर्क, अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट, एक साथ दो शैक्षणिक कार्यक्रमों की अनुमति, डिजिटल शिक्षा, कौशल विकास और उद्योग-अकादमिक सहयोग जैसे कदमों के जरिए शिक्षा व्यवस्था को अधिक लचीला, रोजगारपरक और बहुविषयक बनाने का प्रयास किया जा रहा है। शिक्षा राज्यमंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।
स्कूली शिक्षा में बुनियादी सीखने पर जोर
एनईपी 2020 के अनुरूप स्कूली शिक्षा में समग्र शिक्षा, निपुण भारत, विद्या-प्रवेश, पीएम ई-विद्या, फाउंडेशनल स्टेज के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा, जादुई पिटारा, निष्ठा, विद्या समीक्षा केंद्र और राष्ट्रीय डिजिटल शिक्षा आर्किटेक्चर जैसी पहल की गई हैं। पीएम श्री स्कूलों के माध्यम से भी गुणवत्तापूर्ण और समावेशी शिक्षा के लिए मॉडल संस्थान विकसित किए जा रहे हैं।
उच्च शिक्षा में मल्टीपल एंट्री-एग्जिट की व्यवस्था
उच्च शिक्षा में स्नातक पाठ्यक्रमों के लिए पाठ्यचर्या और क्रेडिट फ्रेमवर्क लागू किए गए हैं। राष्ट्रीय क्रेडिट फ्रेमवर्क (एनसीआरएफ) और राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा योग्यता फ्रेमवर्क (एनएचईक्यूएफ) के जरिए अकादमिक, व्यावसायिक और कौशल आधारित शिक्षा के बीच बेहतर तालमेल बनाने का प्रयास है। उच्च शिक्षा संस्थानों में मल्टीपल एंट्री और एग्जिट की व्यवस्था के साथ छात्रों को एक साथ दो शैक्षणिक कार्यक्रमों में अध्ययन का अवसर भी दिया गया है।
अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट से आसान होगी शैक्षणिक गतिशीलता
अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट (एबीसी) के माध्यम से छात्रों के क्रेडिट को डिजिटल रूप से जमा और स्थानांतरित करने की सुविधा विकसित की गई है। वहीं, एपीएएआर आईडी को विद्यार्थी की आजीवन शैक्षणिक पहचान के रूप में विकसित किया गया है, जिससे पूर्व-प्राथमिक से उच्च शिक्षा तक उसकी शैक्षिक यात्रा और उपलब्धियों को ट्रैक किया जा सकेगा।
उच्च शिक्षा संस्थानों को बहुविषयक बनाने पर जोर
एनईपी 2020 के तहत उच्च शिक्षा संस्थानों को बहुविषयक संस्थानों में बदलने की दिशा में भी काम हो रहा है। साथ ही प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस के लिए दिशानिर्देश जारी किए गए हैं, ताकि उच्च शिक्षा संस्थान उद्योग और पेशेवर क्षेत्र के विशेषज्ञों के अनुभव का लाभ उठा सकें। भारतीय और विदेशी उच्च शिक्षण संस्थानों के बीच ट्विनिंग, संयुक्त और दोहरी डिग्री कार्यक्रमों के लिए भी अकादमिक सहयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है।
डिजिटल शिक्षा को मिला व्यापक विस्तार
स्कूली शिक्षा में समग्र शिक्षा के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आईसीटी लैब और स्मार्ट क्लासरूम सहित डिजिटल बुनियादी ढांचे के लिए वित्तीय सहायता दी जा रही है। दीक्षा और पीएम ई-विद्या जैसी पहलों के जरिए गुणवत्तापूर्ण डिजिटल शिक्षण संसाधनों तक पहुंच बढ़ाई जा रही है।
दीक्षा से ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों में पढ़ाई
दीक्षा प्लेटफॉर्म सभी ग्रेड के लिए क्यूआर कोड आधारित एनर्जेटिक पाठ्यपुस्तकों के साथ डिजिटल शैक्षिक सामग्री उपलब्ध कराता है। प्लेटफॉर्म ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से सामग्री तक पहुंच की सुविधा देता है, जिससे इंटरनेट कनेक्टिविटी सीमित होने पर भी विद्यार्थी डाउनलोड की गई सामग्री के जरिए पढ़ाई जारी रख सकते हैं।
भारतनेट से ग्रामीण स्कूलों में ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी
केंद्रीय बजट 2025 में भारतनेट परियोजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों के सभी सरकारी माध्यमिक विद्यालयों में चरणबद्ध तरीके से ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने की घोषणा की गई है। इसका उद्देश्य दूरदराज के क्षेत्रों में डिजिटल शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है।
उच्च शिक्षा के लिए कई डिजिटल प्लेटफॉर्म
उच्च शिक्षा में स्वयं, स्वयं प्रभा, ई-पीजी पाठशाला और यूजीसी ई-रिसोर्स पोर्टल जैसे प्लेटफॉर्म के माध्यम से छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। यूजीसी ई-रिसोर्स पोर्टल को डिजिटल सेवा पोर्टल के साथ जोड़े जाने से ग्रामीण क्षेत्रों में कॉमन सर्विस सेंटरों के जरिए भी इसकी पहुंच बढ़ी है। चयनित सामग्री क्षेत्रीय भाषाओं में भी उपलब्ध कराई जा रही है।
126 संस्थानों में 802 ऑनलाइन कार्यक्रम
सरकार के अनुसार, 126 उच्च शिक्षण संस्थान करीब 802 ऑनलाइन कार्यक्रम संचालित कर रहे हैं। इसके अलावा 121 उच्च शिक्षण संस्थान लगभग 1,699 ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग (ओडीएल) कार्यक्रम पेश कर रहे हैं। इससे छात्रों के लिए शिक्षा हासिल करने के वैकल्पिक और लचीले अवसरों का विस्तार हुआ है।
कौशल और व्यावसायिक शिक्षा को मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास
एनईपी 2020 में रोजगार क्षमता, उद्यमिता और आजीवन सीखने को बढ़ाने के लिए कौशल विकास और व्यावसायिक शिक्षा को मुख्यधारा की उच्च शिक्षा से जोड़ने की परिकल्पना की गई है। स्कूली स्तर पर कक्षा IX से XII तक एनएसक्यूएफ के अनुरूप कौशल पाठ्यक्रम उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इनमें संवाद, स्व-प्रबंधन, आईसीटी, उद्यमिता और हरित कौशल जैसे रोजगारपरक कौशल शामिल हैं।
कक्षा छह से ही व्यावसायिक अनुभव
कक्षा VI से VIII के छात्रों को बैगलेस डेज, स्थानीय व्यावसायिक विशेषज्ञों के साथ इंटर्नशिप और अनुभवात्मक शिक्षा के जरिए पूर्व-व्यावसायिक अनुभव दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य छात्रों को कम उम्र से ही विभिन्न व्यवसायों और कौशल क्षेत्रों से परिचित कराना है।
इंटर्नशिप और अप्रेंटिसशिप को डिग्री से जोड़ा
यूजीसी ने इंटर्नशिप/अप्रेंटिसशिप एंबेडेड डिग्री प्रोग्राम (एईडीपी) के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं। इनके जरिए स्नातक छात्रों को डिग्री कार्यक्रम के साथ संरचित इंटर्नशिप और अप्रेंटिसशिप का अवसर मिलता है। एनसीआरएफ अकादमिक, व्यावसायिक और कौशल शिक्षा में क्रेडिट के संचय और हस्तांतरण को सुगम बनाता है।
एआईसीटीई भी कौशल आधारित शिक्षा पर कर रहा काम
अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) तकनीकी शिक्षा में कौशल विकास को एकीकृत करने पर जोर दे रहा है। इसके तहत कौशल-केंद्रित कार्यक्रम, अनिवार्य इंटर्नशिप, व्यावसायिक डिग्री और नियमित पाठ्यक्रम के साथ ऑनलाइन कौशल पाठ्यक्रमों को बढ़ावा दिया जा रहा है। उद्योगों और संस्थानों के साथ साझेदारी के जरिए इंडस्ट्री 4.0 तकनीकों में प्रशिक्षण और संकाय के कौशल उन्नयन पर भी जोर है।
स्वयं प्लस पर 500 से अधिक पाठ्यक्रम
कार्यबल के कौशल उन्नयन और पुनर्कौशल के लिए स्वयं प्लस पोर्टल शुरू किया गया है। इस पर 17 क्षेत्रों में 89 उद्योग भागीदारों से क्यूरेट किए गए 500 से अधिक पाठ्यक्रम तैयार किए गए हैं। इनमें एआई और डेटा एनालिटिक्स जैसे उभरते क्षेत्रों के पाठ्यक्रम भी शामिल हैं। अब तक 6 लाख से अधिक छात्रों ने इस प्लेटफॉर्म पर पंजीकरण कराया है।
अप्रेंटिसशिप से उद्योग की जरूरतों से जुड़ेंगे युवा
राष्ट्रीय शिक्षुता प्रशिक्षण योजना (एनएटीएस) स्नातकों और डिप्लोमा धारकों को संरचित ऑन-द-जॉब प्रशिक्षण प्रदान करती है। इसके जरिए अकादमिक शिक्षा और उद्योग की जरूरतों के बीच की खाई को कम करने का प्रयास किया जा रहा है। एआई जैसे उभरते क्षेत्रों में अप्रेंटिसशिप और एनएटीएस मूल्यांकन एवं क्रेडिटाइजेशन फ्रेमवर्क के जरिए अकादमिक क्रेडिट एकीकरण को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
पीएमकेवीवाई और एनएपीएस से कौशल इकोसिस्टम मजबूत
कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय की प्रमुख योजनाओं में प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई), जन शिक्षण संस्थान (जेएसएस) और राष्ट्रीय शिक्षुता संवर्धन योजना (एनएपीएस) शामिल हैं। वहीं, प्रशिक्षण महानिदेशालय 13,856 से अधिक औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों के नेटवर्क के माध्यम से शिल्पकार प्रशिक्षण योजना और शिल्प अनुदेशक प्रशिक्षण योजना के तहत दीर्घकालिक प्रशिक्षण उपलब्ध करा रहा है।
समग्र शिक्षा से स्कूलों का बुनियादी ढांचा मजबूत
समग्र शिक्षा योजना के तहत प्री-स्कूल से कक्षा XII तक स्कूली शिक्षा के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सहायता दी जाती है। इसके तहत स्कूल भवन, अतिरिक्त कक्षाएं, प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय, छात्रावास, आवासीय विद्यालय, पेयजल और स्वच्छता सुविधाएं, विद्युतीकरण, स्मार्ट कक्षाएं, आईसीटी लैब और डिजिटल शिक्षण संसाधनों के लिए सहायता उपलब्ध कराई जाती है।
पीएम-उषा के तहत 12,926.10 करोड़ रुपए का परिव्यय
उच्च शिक्षा में बुनियादी ढांचे और गुणवत्ता को मजबूत करने के लिए राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा) के तीसरे चरण को जून 2023 में प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान (पीएम-उषा) के रूप में शुरू किया गया। इसमें 12,926.10 करोड़ रुपए का परिव्यय शामिल है। योजना के तहत शैक्षणिक रूप से असेवित और कम सेवा वाले क्षेत्रों की जरूरतों को पूरा करने के साथ छात्रावास, शैक्षणिक एवं प्रशासनिक भवन, प्रयोगशालाओं और अन्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सहायता दी जाती है।
भारतीय भाषाओं में शिक्षा सामग्री पर जोर
एनईपी 2020 के अनुरूप केंद्रीय बजट 2025-26 में भारतीय भाषा पुस्तक योजना (बीबीपीएस) की घोषणा की गई। इसके तहत स्कूल और उच्च शिक्षा के लिए भारतीय भाषाओं में डिजिटल प्रारूप में पुस्तकें उपलब्ध कराने की परिकल्पना की गई है। योजना के तहत 22 भारतीय भाषाओं में शैक्षिक सामग्री उपलब्ध कराने का लक्ष्य है।
हर जिले में बालिका छात्रावास की घोषणा
केंद्रीय बजट 2026-27 में एसटीईएम संस्थानों और पाठ्यक्रमों में लड़कियों के नामांकन को बढ़ावा देने के लिए प्रत्येक जिले में एक बालिका छात्रावास स्थापित करने की घोषणा की गई है। इसके लिए व्यवहार्यता अंतर वित्त पोषण या पूंजीगत सहायता का प्रावधान किया गया है।
केंद्र और राज्य मिलकर कर रहे एनईपी का कार्यान्वयन
शिक्षा समवर्ती सूची का विषय है। इसलिए केंद्र और राज्य सरकारें शिक्षा की गुणवत्ता और विकास को व्यापक बनाने के लिए सहयोगात्मक रूप से काम कर रही हैं। एनईपी 2020 में इसके कार्यान्वयन के लिए अलग-अलग समय-सीमा के साथ सिद्धांत और कार्यप्रणाली निर्धारित की गई है। शिक्षा मंत्रालय, राज्य सरकारों और यूजीसी, एआईसीटीई, एनसीटीई, एनसीईआरटी तथा सीबीएसई जैसे नियामक और कार्यान्वयन निकायों के साथ विश्वविद्यालय, कॉलेज और स्कूल भी नीति के विभिन्न प्रावधानों को लागू करने की दिशा में काम कर रहे हैं। (इनपुट: पीआईबी)


