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डॉ. जितेंद्र सिंह ने अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल से परमाणु सहयोग पर की बातचीत

डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारत के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी निवेश और औद्योगिक सहयोग के नए अवसरों पर अमेरिकी उद्योग प्रतिनिधिमंडल के साथ विस्तृत चर्चा की।

यह उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल Nuclear Energy Institute और U.S.-India Strategic Partnership Forum के प्रतिनिधियों से मिलकर बना था।

बैठक में भारत के महत्वाकांक्षी परमाणु ऊर्जा मिशन, निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देने वाले हालिया सुधारों और स्वच्छ ऊर्जा तथा उन्नत प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में भारत-अमेरिका सहयोग के विस्तार पर चर्चा हुई।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच विज्ञान, प्रौद्योगिकी, स्वच्छ ऊर्जा और उभरते क्षेत्रों में मजबूत और भविष्य उन्मुख साझेदारी विकसित हो रही है, जिसमें नागरिक परमाणु सहयोग का महत्व लगातार बढ़ रहा है।

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की फरवरी 2025 की बैठक के दौरान शुरू की गई “यूएस-इंडिया ट्रस्ट पहल” ने महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग के नए रास्ते खोले हैं।

मंत्री ने कहा कि यह पहल विश्वसनीय प्रौद्योगिकी साझेदारी, मजबूत आपूर्ति श्रृंखला और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र पर केंद्रित है, जिसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर, जैव प्रौद्योगिकी, क्वांटम तकनीक, उन्नत सामग्री, ऊर्जा और अंतरिक्ष तकनीकों जैसे क्षेत्रों को शामिल किया गया है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत वर्ष 2047 तक अपनी परमाणु ऊर्जा क्षमता को वर्तमान 8.8 गीगावाट से बढ़ाकर 100 गीगावाट करने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहा है।

उन्होंने बताया कि हाल ही में लागू किए गए “शांति अधिनियम 2025” के माध्यम से निजी और विदेशी भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए बड़ा नीतिगत सुधार किया गया है।

मंत्री ने कहा कि इससे निवेश, विनिर्माण साझेदारी, प्रौद्योगिकी सहयोग और औद्योगिक भागीदारी के लिए अधिक अनुकूल वातावरण तैयार होगा।

बैठक में लघु मॉड्यूलर रिएक्टर यानी एसएमआर के विकास पर भी चर्चा हुई, जिसके लिए लगभग 20 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

इसके अलावा माइक्रो रिएक्टर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित परमाणु सुरक्षा प्रणाली, वैज्ञानिक संगणना और परमाणु ऊर्जा मॉडलिंग जैसे क्षेत्रों में भारत-अमेरिका सहयोग की संभावनाओं पर भी विचार किया गया।

बैठक में कोव्वाडा स्थित प्रस्तावित Westinghouse Electric Company एपी1000 परियोजना, भारत-अमेरिका नागरिक परमाणु ऊर्जा कार्य समूह, हाइड्रोजन उत्पादन, दुर्लभ पृथ्वी तत्व सहयोग और फर्मी लैब साझेदारी जैसी परियोजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की गई।

इसके साथ ही 2,600 करोड़ रुपये की लागत वाली LIGO-India परियोजना पर भी चर्चा हुई, जिसे भारत और अमेरिका के वैज्ञानिक सहयोग का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।

-पीआईबी