11/02/26 | 1:32 pm | CAP | DWR | PRITHVI

Print

पृथ्वी विज्ञान योजना से मजबूत हुआ देश का मौसम निगरानी तंत्र

केंद्र सरकार की ‘पृथ्वी विज्ञान (PRITHVI)’ योजना के तहत देश में मौसम, समुद्र, हिमालय और भूकंपीय निगरानी नेटवर्क को मजबूत किया गया है। यह जानकारी लोकसभा में केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने दी। उन्होंने बताया कि इस योजना से दीर्घकालिक पृथ्वी अवलोकन प्रणाली और पूर्वानुमान क्षमता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

योजना के तहत देशभर में नए उपकरण लगाए गए हैं और पुराने सिस्टम को अपग्रेड किया गया है। डॉप्लर वेदर रडार (DWR) नेटवर्क को बढ़ाकर 48 किया गया है। 400 नए ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन जोड़े गए हैं और 200 कृषि मौसम केंद्र स्थापित किए गए हैं।

महाराष्ट्र में भी मौसम और भूकंप निगरानी नेटवर्क मजबूत किया गया है। राज्य में 9 डॉप्लर वेदर रडार काम कर रहे हैं। इसके अलावा 15 भूकंपीय वेधशालाएं सक्रिय हैं।

समुद्री क्षेत्र में भी बड़े सुधार किए गए हैं। आर्गो फ्लोट, तटीय निगरानी उपकरण और ज्वार मापने वाले स्टेशन लगाए गए हैं। INCOIS द्वारा उच्च क्षमता वाला सुपरकंप्यूटर “तरंग” शुरू किया गया है, जिससे समुद्री पूर्वानुमान और अधिक सटीक होंगे।

हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेशियर निगरानी और जल स्तर रिकॉर्डिंग प्रणाली स्थापित की गई है। इससे बाढ़ और जलवायु परिवर्तन से जुड़े प्रभावों का बेहतर आकलन संभव होगा।

सरकार के अनुसार, हाल के वर्षों में गंभीर मौसम घटनाओं के पूर्वानुमान की सटीकता में 40 प्रतिशत तक सुधार हुआ है। 2025 के मानसून के दौरान भारी वर्षा की एक दिन पहले दी गई चेतावनी की सटीकता 85 प्रतिशत रही, जो 2020 में 77 प्रतिशत थी।

चक्रवात पूर्वानुमान में भी सुधार हुआ है। 1999 के ओडिशा सुपर चक्रवात में जहां लगभग 7000 लोगों की मौत हुई थी, वहीं हाल के वर्षों में चक्रवातों से मृत्यु संख्या 100 से भी कम रही है। सरकार के अनुसार, एक चक्रवात का सटीक पूर्वानुमान लगभग 1100 करोड़ रुपये की बचत कर सकता है।

India Meteorological Department आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर चेतावनी संदेश जारी करता है। ‘सचेत’ प्लेटफॉर्म के माध्यम से कॉमन अलर्टिंग प्रोटोकॉल (CAP) आधारित संदेश सीधे लोगों को भेजे जाते हैं। अगस्त 2021 से अब तक 9342 करोड़ एसएमएस भेजे गए हैं।

सरकार ने ग्राम पंचायत स्तर तक मौसम पूर्वानुमान उपलब्ध कराने की पहल भी शुरू की है। इससे किसानों और स्थानीय प्रशासन को समय पर जानकारी मिल सकेगी।

कुल मिलाकर, PRITHVI योजना के माध्यम से मौसम, समुद्र, भूकंप और आपदा पूर्वानुमान सेवाओं में बड़ा सुधार हुआ है। इससे जान-माल की हानि कम करने और आपदा प्रबंधन को मजबूत बनाने में मदद मिली है।

-(इनपुटःएजेंसी)