09/06/26 | 12:31 pm | WHO | इबोला

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कांगो से युगांडा पहुंचा इबोला, डब्ल्यूएचओ ने जताई चिंता

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कहा है कि कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (डीआरसी) में इबोला का प्रकोप तेजी से फैल रहा है। संक्रमण के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, इसका दायरा नए क्षेत्रों तक पहुंच रहा है और अब यह पड़ोसी देश युगांडा तक भी फैल चुका है।

डब्ल्यूएचओ की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में डीआरसी के लिए इबोला का जोखिम स्तर ‘बहुत अधिक’ है, जबकि युगांडा और प्रभावित क्षेत्रों से लगती सीमाओं वाले पड़ोसी देशों के लिए जोखिम ‘उच्च’ माना गया है। अफ्रीका के बाकी हिस्सों और वैश्विक स्तर पर जोखिम फिलहाल ‘निम्न’ श्रेणी में रखा गया है।

रविवार तक डीआरसी में इबोला के 515 पुष्ट मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें 91 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, युगांडा में 19 पुष्ट मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें दो मौतें और एक संभावित मृत्यु शामिल है।

डब्ल्यूएचओ के अनुसार, युगांडा में सामने आए सभी मामले डीआरसी में फैले प्रकोप से जुड़े हुए हैं। इनमें संक्रमित व्यक्तियों के सीमा पार आने के साथ-साथ उनके संपर्क में आए लोगों और स्वास्थ्यकर्मियों के बीच भी संक्रमण फैलने के प्रमाण मिले हैं।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसियां डब्ल्यूएचओ और अन्य साझेदार संगठनों के साथ मिलकर स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कई कदम उठा रही हैं। 5 जून को अफ्रीका सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (अफ्रीका सीडीसी) और डब्ल्यूएचओ ने संयुक्त रूप से महाद्वीपीय इबोला तैयारी एवं प्रतिक्रिया योजना शुरू की। इसके लिए 51.8 करोड़ डॉलर की सहायता राशि जुटाने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि अफ्रीकी देशों को संक्रमण की रोकथाम, पहचान और नियंत्रण में मदद मिल सके।

वर्तमान प्रकोप बुंडिबुग्यो वायरस रोग (बीवीडी) से जुड़ा है, जो इबोला का एक गंभीर और कई बार घातक रूप माना जाता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह वायरस मुख्य रूप से फल खाने वाले चमगादड़ों से उत्पन्न होता है और संक्रमित जानवरों के रक्त या शारीरिक स्राव के संपर्क से इंसानों में फैल सकता है। संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थों के संपर्क में आने से भी संक्रमण फैलता है।

बीवीडी की ऊष्मायन अवधि दो से 21 दिनों तक हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि संक्रमित व्यक्ति में लक्षण दिखाई देने से पहले वह दूसरों को संक्रमित नहीं करता।

इबोला एक गंभीर वायरल बीमारी है, जो फिलोविरिडी परिवार के ऑर्थोइबोलावायरस के कारण होती है और मनुष्यों के साथ-साथ अन्य प्राइमेट प्रजातियों को भी प्रभावित करती है। इस बीमारी की पहचान पहली बार 1976 में तत्कालीन जायर (अब डीआरसी) और सूडान (अब दक्षिण सूडान) में लगभग एक साथ हुए प्रकोपों के दौरान हुई थी।

वर्तमान प्रकोप की आधिकारिक घोषणा 15 मई को की गई थी। हालांकि बुंडिबुग्यो स्ट्रेन, जायर स्ट्रेन की तुलना में कम सामान्य है, लेकिन यह भी गंभीर बीमारी और मौत का कारण बन सकता है।

-(इनपुटःएजेंसी)

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