चुनाव आयोग ने कहा है कि 1 अगस्त और 1 सितंबर के बीच राजनीतिक दल योग्य मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में जुड़वा भी सकते हैं और अगर किसी का नाम गलती से जुड़ गया है तो उसे हटावा भी सकते हैं। चुनाव आयोग का यह वक्तव्य बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर विपक्ष के लगातार विरोध के बीच आया है।
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इस संबंध में चुनाव आयोग ने कहा है कि बिहार में जारी विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के आदेश पृष्ठ 3, पैरा 7(5) के अनुसार, किसी भी मतदाता या मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल को 1 अगस्त से 1 सितंबर तक एक महीने का समय मिलेगा ताकि वे किसी भी पात्र मतदाता का नाम शामिल करा सकें, जिन्हें बीएलओ/बीएलए ने छोड़ दिया हो। इसके साथ बीएलओ/बीएलए के गलत तरीके से शामिल किए गए किसी भी मतदाता के नाम को कटवा सकते हैं।
उल्लेखनीय है कि एसआईआर प्रक्रिया पर विपक्ष लगातार अपना विरोध दर्ज कर रहा है। विपक्ष का आरोप है कि यह प्रक्रिया अल्पसंख्यक और पिछड़ों को चुनाव प्रक्रिया से बाहर करने का तरीका है। विपक्ष के इसी विरोध के चलते पिछले दो दिन से संसद के दोनों सदनों में कोई कार्य नहीं हो पाया है।


