औद्योगिक गलियारों की परियोजनाओं में तेजी लाने पर जोर, सीतारमण ने निवेश और उत्पादन शुरू करने के दिए निर्देश

केंद्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को नई दिल्ली में राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास एवं कार्यान्वयन ट्रस्ट (एनआईसीडीआईटी) के शीर्ष निगरानी प्राधिकरण की तीसरी बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास कार्यक्रम (एनआईसीडीपी) के तहत परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई और औद्योगिक गलियारों के विकास के अगले चरण की प्राथमिकताओं पर चर्चा हुई। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल समेत कई वरिष्ठ अधिकारी और राज्यों के प्रतिनिधि बैठक में शामिल हुए।

मंजूरी से आगे अब क्रियान्वयन पर जोर

निर्मला सीतारमण ने एनआईसीडीपी के तहत हुई प्रगति की सराहना करते हुए कहा कि जमीनी स्तर पर मिल रहे परिणाम निवेशकों की बढ़ती मांग का संकेत हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा औद्योगिक भूमि और बुनियादी ढांचे की क्षमता समाप्त होने से पहले ही आगामी जरूरतों की योजना तैयार कर ली जानी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब ध्यान केवल परियोजनाओं की मंजूरी पर नहीं, बल्कि बुनियादी ढांचे को समय पर पूरा करने, भूमि आवंटन, निवेश आकर्षित करने और उत्पादन शुरू कराने पर होना चाहिए।

‘टीम इंडिया’ के दृष्टिकोण से हो औद्योगिक विकास

वित्त मंत्री ने कहा कि औद्योगिक गलियारे विनिर्माण को बढ़ावा देने, लॉजिस्टिक्स प्रतिस्पर्धा मजबूत करने और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी औद्योगिक इकोसिस्टम तैयार करने की सरकार की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उन्होंने औद्योगिक गलियारा विकास में ‘टीम इंडिया’ की भावना के साथ केंद्र और राज्यों के समन्वय पर जोर दिया। उन्होंने माल ढुलाई, औद्योगिक विकास, रेलवे और एक्सप्रेसवे के बीच बेहतर तालमेल को भी महत्वपूर्ण बताया।

भूमि और कनेक्टिविटी की बाधाएं दूर करने की अपील

सीतारमण ने राज्यों से भूमि, कनेक्टिविटी, उपयोगिताओं, वैधानिक मंजूरियों और परियोजना विशेष प्रयोजन वाहनों (एसपीवी) की शक्तियों से जुड़ी बाधाओं को दूर करने का आग्रह किया। उन्होंने पीएम गतिशक्ति के माध्यम से एकीकृत योजना और निवेशक-अनुकूल भूमि आवंटन तंत्र के निरंतर इस्तेमाल पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि श्रमिक आवास, स्वास्थ्य सेवा, कौशल विकास और सार्वजनिक परिवहन जैसी सुविधाएं भी औद्योगिक विकास का अभिन्न हिस्सा होनी चाहिए।

बुनियादी ढांचे और विनिर्माण के लिए सरकारी समर्थन

वित्त मंत्री ने सार्वजनिक पूंजीगत व्यय में वृद्धि, एसएएससीआई के तहत राज्यों को सहायता, विनिर्माण क्षेत्र के एमएसएमई के लिए बेहतर ऋण सुविधा और घरेलू विनिर्माण एवं आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने के लिए कर तथा सीमा शुल्क संबंधी उपायों का उल्लेख किया।

निवेशक-तैयार औद्योगिक इकोसिस्टम पर गोयल का जोर

पीयूष गोयल ने औद्योगिक गलियारा परियोजनाओं के तेजी से और परिणामोन्मुखी क्रियान्वयन का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत औद्योगिक विकास योजना (भव्य) और भविष्य के औद्योगिक विकास को पीएम गतिशक्ति के अनुरूप एकीकृत क्षेत्र-विकास दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने निवेशकों तक लक्षित पहुंच बनाने और औद्योगिक केंद्रों की प्रभावी मार्केटिंग पर जोर दिया।

प्लग-एंड-प्ले सुविधाओं से बढ़ेगी निवेश की गति

गोयल ने निवेशकों की जरूरत के अनुरूप औद्योगिक क्षेत्रों के स्थान का चयन करने और प्लग-एंड-प्ले बुनियादी ढांचे, फ्लैटेड फैक्ट्रियों, श्रमिक आवास तथा आर्थिक एवं सामाजिक सुविधाओं से युक्त तैयार इकोसिस्टम विकसित करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि इससे निवेश और उत्पादन शुरू करने की प्रक्रिया तेज होगी। भारत के मुक्त व्यापार समझौतों से पैदा होने वाले अवसरों का लाभ उठाने और देश तथा क्षेत्र विशेष के औद्योगिक एन्क्लेव विकसित करने पर भी जोर दिया गया।

13 राज्यों में 20 परियोजनाएं मंजूर

राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास कार्यक्रम में फिलहाल 13 राज्यों और 7 औद्योगिक गलियारों में फैली 20 स्वीकृत परियोजनाएं शामिल हैं। धोलेरा, शेंद्रा-बिडकिन, ग्रेटर नोएडा और विक्रम उद्योगपुरी के चार औद्योगिक स्मार्ट शहर उत्पादन चरण में पहुंच चुके हैं। अगस्त 2024 में मंजूर 12 परियोजनाओं में बुनियादी ढांचे का विकास, भूमि आवंटन और निवेशकों के साथ संपर्क का काम समानांतर रूप से जारी है।

5,348 एकड़ में 469 भूखंड आवंटित

अब तक करीब 5,348 एकड़ क्षेत्र में 469 भूखंड आवंटित किए जा चुके हैं। इनसे लगभग 2.21 लाख करोड़ रुपए के निवेश की संभावना है और करीब 1.29 लाख रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। इनमें 134 इकाइयां उत्पादन शुरू कर चुकी हैं, जबकि 95 इकाइयां निर्माणाधीन हैं।

जलमार्गों को औद्योगिक गलियारों से जोड़ने पर जोर

केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री सरबानंद सोनोवाल ने राष्ट्रीय जलमार्गों को औद्योगिक गलियारों के साथ एकीकृत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने औद्योगिक गलियारों के विकास में जलमार्गों को संभावित रीढ़ के रूप में विकसित करने की संभावना तलाशने की बात कही। उन्होंने उत्तर-पूर्वी राज्यों में भी औद्योगिक बुनियादी ढांचे के विकास पर जोर दिया।

एसपीवी को अधिक अधिकार देने की जरूरत

नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक कुमार लाहिड़ी ने राज्य सरकारों से औद्योगिक गलियारा कार्यक्रम के संस्थागत और कानूनी ढांचे के अनुरूप परियोजना एसपीवी को पर्याप्त योजना, विकास और नगरपालिका शक्तियां देने को प्राथमिकता देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि अधिकारों के प्रभावी हस्तांतरण से एसपीवी तेजी से निर्णय ले सकेंगे और विभिन्न राज्य एजेंसियों पर निर्भरता कम होगी।

भव्य योजना में राज्यों से मिले 87 आवेदन

बैठक में भारत औद्योगिक विकास योजना (भव्य) के क्रियान्वयन की भी समीक्षा की गई। योजना के तहत देशभर में 100 निवेश-तैयार, प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक पार्क विकसित करने की परिकल्पना है। पहले चरण में 20 परियोजनाओं के अनुमोदन के लिए प्रस्ताव मांगे गए थे, जबकि राज्यों से 87 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इसे योजना के प्रति राज्यों की मजबूत रुचि के संकेत के रूप में देखा गया।

पीएम गतिशक्ति से जोड़ी जाएंगी भव्य परियोजनाएं

बैठक में जोर दिया गया कि भव्य परियोजनाओं की योजना और मूल्यांकन पीएम गतिशक्ति के साथ पूरी तरह से जुड़ा होना चाहिए। तैयार भूमि, औद्योगिक मांग, मजबूत कनेक्टिविटी, सुनिश्चित सुविधाओं, व्यावहारिक चरणबद्ध विकास और शुरुआती चरण में निवेशकों को आकर्षित करने की क्षमता जैसे मानकों के आधार पर परियोजनाओं का मूल्यांकन किया जाएगा।

अब निवेश, उत्पादन और रोजगार होगा प्रगति का पैमाना

शीर्ष निगरानी प्राधिकरण ने कहा कि औद्योगिक परियोजनाओं की प्रगति का अगला पैमाना केवल निर्मित बुनियादी ढांचा नहीं होगा। यह देखा जाएगा कि परियोजनाएं कितनी तेजी से निवेश आकर्षित करती हैं, उत्पादन शुरू करती हैं और आर्थिक गतिविधियों के साथ रोजगार के अवसर पैदा करती हैं। बैठक में केंद्र और राज्यों के बीच परियोजना-विशिष्ट मुद्दों के समाधान तथा क्रियान्वयन में तेजी लाने के लिए समन्वय मजबूत करने पर भी जोर दिया गया।

एनआईसीडीआईटी और एनआईसीडीसी की भूमिका

राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास एवं कार्यान्वयन ट्रस्ट (एनआईसीडीआईटी), वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) के प्रशासनिक नियंत्रण में काम करता है। यह देशभर में औद्योगिक गलियारों के समन्वित और एकीकृत विकास के लिए औद्योगिक केंद्रों में मुख्य बुनियादी ढांचे के विकास में सहयोग करता है। राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास निगम लिमिटेड (एनआईसीडीसी) डीपीआईआईटी के प्रशासनिक नियंत्रण में एक विशेष प्रयोजन वाहन है, जो औद्योगिक गलियारा परियोजनाओं के विकास और क्रियान्वयन में समन्वय करता है। भव्य योजना के तहत एनआईसीडीसी को योजना के क्रियान्वयन और निगरानी के लिए परियोजना प्रबंधन एजेंसी बनाया गया है।

वरिष्ठ अधिकारी और राज्यों के प्रतिनिधि हुए शामिल

बैठक में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी समेत कई राज्यों के मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए। डीपीआईआईटी के सचिव एवं एनआईसीडीआईटी के अध्यक्ष अमरदीप सिंह भाटिया ने स्वागत भाषण दिया, जबकि एनआईसीडीआईटी के सीईओ रजत कुमार सैनी ने परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति पर प्रस्तुति दी। (इनपुट: पीआईबी)