जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने पर जोर, पीएम मोदी ने साझा किया लेख

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जल प्रबंधन और जनभागीदारी से जुड़े विषय पर केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल द्वारा लिखे गए एक लेख को साझा किया है। इस लेख में जल क्षेत्र में पिछले एक दशक के दौरान सरकार द्वारा किए गए प्रयासों और उपलब्धियों का विस्तृत उल्लेख किया गया है।

जल क्षेत्र में समग्र दृष्टिकोण अपनाने पर जोर

प्रधानमंत्री कार्यालय ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर साझा किए गए संदेश में बताया कि लेख में यह विस्तार से बताया गया है कि सरकार ने पेयजल, स्वच्छता, नदी संरक्षण, सिंचाई दक्षता, भूजल पुनर्भरण और अपशिष्ट जल के पुन: उपयोग से जुड़ी चुनौतियों का समाधान एक समग्र और परस्पर जुड़े दृष्टिकोण के माध्यम से किया है।

जनभागीदारी और सुशासन की भूमिका पर प्रकाश

लेख में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि जल संरक्षण और जल प्रबंधन से जुड़े राष्ट्रीय लक्ष्यों को हासिल करने में उत्तरदायी शासन और सक्रिय जनभागीदारी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इसमें पिछले दशक के दौरान जल क्षेत्र में हासिल की गई प्रमुख उपलब्धियों का उल्लेख किया गया है।

साझा राष्ट्रीय दृष्टिकोण की उपलब्धियों का विवरण

प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, सी.आर. पाटिल ने अपने लेख में बताया है कि केंद्र सरकार की विभिन्न पहलों ने जल संसाधनों के संरक्षण और प्रबंधन को नई दिशा दी है। लेख में पेयजल उपलब्धता बढ़ाने, स्वच्छता को मजबूत करने, नदियों के संरक्षण, सिंचाई व्यवस्था में सुधार, भूजल स्तर को पुनर्जीवित करने और अपशिष्ट जल के पुन: उपयोग जैसे क्षेत्रों में किए गए कार्यों का उल्लेख किया गया है।

जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने की पहल

लेख में यह भी रेखांकित किया गया है कि जल संरक्षण और जल संसाधनों के सतत उपयोग को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने जनभागीदारी आधारित मॉडल को प्राथमिकता दी है। इसके माध्यम से जल प्रबंधन को केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि जन आंदोलन का स्वरूप देने का प्रयास किया गया है। (इनपुट: पीआईबी)