24/09/26 | 5:03 pm | E-Commerce | technology startups

Print

अगली छमाही में रोजगार 5.4 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान, ई-कॉमर्स, प्रौद्योगिकी क्षेत्र रहेंगे आगेः रिपोर्ट

चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में विभिन्न उद्योगों में कर्मचारियों की संख्या 5.4 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान है। ई-कॉमर्स एवं प्रौद्योगिकी स्टार्टअप, यात्रा एवं आतिथ्य तथा खुदरा क्षेत्र में नियुक्तियों की मजबूत मांग से रोजगार वृद्धि को गति मिलने की उम्मीद है। भर्ती सेवा प्रदाता टीमलीज सर्विसेज की नवीनतम रोजगार परिदृश्य रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 की अक्टूबर-मार्च अवधि के लिए ‘शुद्ध रोजगार परिवर्तन’ (एनईसी) का अनुमान अप्रैल-सितंबर छमाही के 4.7 प्रतिशत से बढ़कर 5.4 प्रतिशत हो गया है। यह पिछली चार छमाहियों का सबसे ऊंचा स्तर है।

टीमलीज सर्विसेज के वरिष्ठ उपाध्यक्ष ए बालसुब्रमण्यन ने कहा, ‘‘दूसरी छमाही में 5.4 प्रतिशत रोजगार वृद्धि का अनुमान अधिक लक्षित तरीके से कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने की ओर बदलाव को दर्शाता है। कंपनियां बदलती मांग को ध्यान में रखते हुए नियुक्तियों के फैसले कर रही हैं।’’ उन्होंने कहा कि इसके लिए नियोक्ताओं को प्रतिभाओं के दायरे का विस्तार करने, कौशल विकास में तेजी लाने और अधिक लचीले कार्यबल मॉडल अपनाने की जरूरत होगी।

रिपोर्ट के निष्कर्ष जुलाई-अगस्त माह में 23 उद्योगों और 20 शहरों के 1,239 नियोक्ताओं से मिली प्रतिक्रिया पर आधारित हैं। रिपोर्ट के अनुसार, ई-कॉमर्स एवं प्रौद्योगिकी स्टार्टअप क्षेत्र में शुद्ध रोजगार परिवर्तन 12.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है। इसके बाद यात्रा एवं आतिथ्य क्षेत्र 12.3 प्रतिशत और खुदरा क्षेत्र 10.3 प्रतिशत के साथ हैं।

वाहन क्षेत्र में रोजगार वृद्धि का अनुमान 10.1 प्रतिशत, इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) एवं ईवी अवसंरचना क्षेत्र में 9.7 प्रतिशत और बैंकिंग क्षेत्र में 9.2 प्रतिशत है।

आकार के लिहाज से बड़े उद्यमों में 66 प्रतिशत ने कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने की मंशा जताई है। वहीं, मध्यम आकार के उद्यमों में यह अनुपात 59 प्रतिशत तथा स्टार्टअप, सूक्ष्म एवं छोटे कारोबार में 53 प्रतिशत है।

वहीं, शहरों में बेंगलुरु 68 प्रतिशत नियुक्ति मंशा के साथ सबसे आगे है। इसके बाद हैदराबाद 61 प्रतिशत और पुणे 60 प्रतिशत पर हैं। इस छमाही में पुणे में नियुक्ति की मंशा सबसे अधिक बढ़ी है। हालांकि, नियुक्ति की मंशा को वास्तविक कर्मचारी वृद्धि में बदलने में प्रतिभाओं की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती है। भर्ती की योजना बना रहे नियोक्ताओं में से 72 प्रतिशत को नियुक्ति में मध्यम से गंभीर कठिनाई आने की आशंका है।

सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) में 39 प्रतिशत, बिक्री एवं विपणन में 38 प्रतिशत और इंजीनियरिंग में 32 प्रतिशत कंपनियों ने नियुक्ति में चुनौती की आशंका जताई है। रिपोर्ट के अनुसार, किसी पद को भरने में औसतन 35-45 दिन लगते हैं और विशेषज्ञता वाले तथा स्थान-आधारित पदों को भरने में इससे अधिक समय लगता है।

रिपोर्ट में कृत्रिम मेधा (एआई) के इस्तेमाल तथा कर्मचारियों के व्यापक स्तर पर इसे अपनाने के बीच अंतर भी सामने आया है। करीब 85 प्रतिशत नियोक्ता किसी न किसी स्तर पर एआई या जेनएआई का इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन केवल 13 प्रतिशत संगठन ही आधे से अधिक कर्मचारियों के स्तर पर इसका इस्तेमाल कर रहे हैं।

यह दर्शाता है कि कंपनियों में एआई का इस्तेमाल व्यापक है, लेकिन अभी सीमित स्तर तक ही है। ज्यादातर संगठन मौजूदा भूमिकाओं में एआई साधन को अपना रहे हैं, न कि बड़े पैमाने पर कार्यबल की संरचना में बदलाव कर रहे हैं। (भाषा)

RELATED ARTICLES

12 hours ago | AIIMS

एम्स में वैज्ञानिक प्रो. जी.पी. तलवार के 100वें जन्मवर्ष पर विशेष समारोह आयोजित किया गया

देश के अग्रणी वैज्ञानिकों में शुमार और एम्स, नई दिल्ली के संस्थापक संकाय सदस्यों में से एक प्रो....

25/09/26 | 10:06 am | Himalayan Climate Resilience Mechanism

नेपाल के प्रधानमंत्री शाह ने भारत और चीन के साथ ‘Himalayan Climate Resilience Mechanism’ बनाने का प्रस्ताव रखा

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने क्षेत्र में हाल में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ के मद्देनजर ...