शिक्षा से खुद को सशक्त बनाएं और राष्ट्र निर्माण में योगदान दें : द्रौपदी मुर्मु

भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु बुधवार को गंगटोक में सिक्किम विश्वविद्यालय के सातवें दीक्षांत समारोह में शामिल हुईं। इस अवसर पर उन्होंने छात्रों से शिक्षा के माध्यम से स्वयं को सशक्त बनाने और समाज तथा राष्ट्र की बेहतरी के लिए कार्य करने का आग्रह किया। राष्ट्रपति ने कहा कि सिक्किम अपनी प्राकृतिक सुंदरता, संस्कृति और जैव विविधता के कारण विशिष्ट पहचान रखता है। हिमालय की सबसे ऊंची चोटियों में शामिल कंचनजंगा सिक्किम के लिए प्रकृति का अमूल्य उपहार है। उन्होंने कहा कि सिक्किम के लोगों में प्रकृति के संरक्षण और संवर्धन के प्रति गहरी जिम्मेदारी की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।

जैविक राज्य के रूप में सिक्किम की सराहना

द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि वर्ष 2016 में भारत का पहला पूर्णतः जैविक राज्य बनने पर सिक्किम ने पूरे देश के सामने उदाहरण पेश किया। उन्होंने कहा कि सिक्किम ने यह साबित किया है कि विकास और प्रकृति संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं। प्लास्टिक के उपयोग पर नियंत्रण, जैविक खेती को बढ़ावा और पर्यावरण संरक्षण जैसी पहलें पूरे देश को प्रेरणा देती हैं। उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने आसपास की स्वच्छता के साथ-साथ प्रकृति और समाज के प्रति भी जिम्मेदारी निभाए, तो देश तेजी से प्रगति कर सकता है।

पूर्ण साक्षर राज्य बनने पर दी बधाई

राष्ट्रपति ने सिक्किम के पूर्ण साक्षर राज्य घोषित होने पर राज्य सरकार और वहां के लोगों को बधाई दी। उन्होंने इसे सभी देशवासियों, विशेष रूप से सिक्किम के लोगों के लिए गर्व का विषय बताया।

पूर्वोत्तर के युवाओं की प्रतिभा का किया जिक्र

राष्ट्रपति ने कहा कि देश की समावेशी प्रगति के लिए पूर्वोत्तर क्षेत्र का विकास बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र के युवाओं में अपार प्रतिभा है। उन्होंने सिक्किम विश्वविद्यालय के छात्रों से आग्रह किया कि वे राष्ट्रीय विकास में योगदान देने की सामूहिक भावना के साथ आगे बढ़ें और समाज के वंचित वर्गों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए कार्य करें। उन्होंने कहा कि छात्र अपनी योग्यता और समर्पण के जरिए समावेशी विकास को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

भाषा, संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी

द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि सिक्किम विश्वविद्यालय पर शिक्षा और अनुसंधान के केंद्र होने के साथ-साथ क्षेत्र की भाषा, संस्कृति और पर्यावरण को संरक्षित करने की विशेष जिम्मेदारी भी है। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा आधुनिक शिक्षा को स्थानीय परंपराओं, पर्यावरणीय चेतना और सामाजिक दायित्व के साथ जोड़ने की सराहना की। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए यही सही मार्ग है।

छात्रों को आत्मनिर्भर बनने की सलाह

राष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षा आत्मनिर्भरता का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने छात्रों से अपनी क्षमताओं पर भरोसा रखने, दूसरों के अनुभवों से सीखने, सहयोग की भावना से आगे बढ़ने और अपने अल्पकालिक तथा दीर्घकालिक लक्ष्यों के लिए स्पष्ट कार्यनीति बनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि भारत वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है और उन्हें विश्वास है कि छात्र दक्षता, समता और संधारणीयता के मूल्यों को अपनाते हुए अपने-अपने क्षेत्रों में आगे बढ़ेंगे।

महिलाओं के लिए पिंक बस सेवा को दिखाई हरी झंडी

इससे पहले राष्ट्रपति ने गंगटोक में ‘आमा दिदी बहिनी बस सेवा’ के तहत महिलाओं के लिए पिंक बसों और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए संसाधन पुनर्प्राप्ति वाहन को हरी झंडी दिखाई। (इनपुट: पीआईबी)