केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने गुरुवार को जंगल और पेड़ों के संसाधनों के आकलन, निगरानी और प्रबंधन को मजबूत करने के लिए टेक्नोलॉजी आधारित तरीकों को अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े डेटा को मजबूत करने और निर्णय लेने की प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए नवीनतम टेक्नोलॉजी का प्रभावी इस्तेमाल जरूरी है।
प्रकृति के साथ संतुलन पर जोर
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से आयोजित ‘जंगल और पेड़ों के संसाधनों के आकलन में नवीनतम टेक्नोलॉजी का लाभ उठाना’ विषयक राष्ट्रीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए भूपेंद्र यादव ने कहा कि इंसान प्रकृति से ऊपर नहीं हैं। उन्होंने प्रकृति का सम्मान करने और उसके साथ मिलकर रहने की दिशा में काम करने की जरूरत बताई। उन्होंने खासकर प्रकृति आधारित समाधानों के माध्यम से भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं को गति देने के लिए नवीनतम टेक्नोलॉजी को अपनाने का आह्वान किया।
स्वदेशी टेक्नोलॉजी और क्षमता निर्माण जरूरी
भूपेंद्र यादव ने इनोवेशन और नवीनतम टेक्नोलॉजी को अपनाने को बढ़ावा देने की जरूरत बताई। साथ ही उन्होंने स्वदेशी टेक्नोलॉजी के विकास और वन कर्मचारियों की क्षमता निर्माण को महत्वपूर्ण बताया।
आईएसएफआर के लिए बेहतर डेटा पर जोर
केंद्रीय मंत्री ने ‘इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट’ (आईएसएफआर) तैयार करने के लिए डेटा की गुणवत्ता में सुधार और फील्ड अनुभव को मजबूत स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) में शामिल करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इससे रिपोर्ट जंगलों के संरक्षण और प्रबंधन के लिए एक मजबूत आधार दस्तावेज बन सकेगी।
कार्बन सिंक का लक्ष्य हासिल करने में टेक्नोलॉजी की भूमिका
उन्होंने कहा कि 2035 तक 3.5-4 बिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड-समकक्ष कार्बन सिंक बनाने के भारत के बढ़े हुए लक्ष्य को हासिल करने के लिए मजबूत संस्थागत क्षमताओं, प्रभावी नीतियों और लोगों तथा समुदायों की सक्रिय भागीदारी के साथ टेक्नोलॉजी इनोवेशन भी जरूरी होगा।
जंगलों के आकलन पर तीन तकनीकी सत्र
कार्यशाला में जंगल की सीमाओं के डिजिटलीकरण, जंगल और पेड़ों के आवरण के आकलन तथा कार्बन स्टॉक के अनुमान से जुड़े तीन तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। इसमें राज्य वन विभागों, वैज्ञानिक संस्थानों, वैज्ञानिकों, टेक्नोलॉजी विशेषज्ञों और अन्य हितधारकों ने हिस्सा लिया। कार्यशाला का उद्देश्य जंगल और पेड़ों के संसाधनों के आकलन, निगरानी और प्रबंधन को मजबूत करने के लिए टेक्नोलॉजी आधारित तरीकों की पहचान करना था।
जंगल संरक्षण में मानकों के एकीकरण पर जोर
भूपेंद्र यादव ने जंगल संरक्षण के लिए समन्वित कार्रवाई को सक्षम बनाने के लिए विभिन्न संस्थानों के बीच मानकों के एकीकरण का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि क्षतिपूरक वनीकरण का उद्देश्य स्पष्ट रूप से वृक्षारोपण को संरक्षित करने और हरित आवरण की गुणवत्ता में सुधार करने के अनुरूप होना चाहिए।
जंगल की आग के हॉटस्पॉट की पहचान जरूरी
केंद्रीय मंत्री ने जंगल की आग की घटनाओं की आवृत्ति के आधार पर संवेदनशील क्षेत्रों का वर्गीकरण करने और लक्षित रोकथाम रणनीतियों के लिए हॉटस्पॉट की पहचान करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
आर्द्रभूमि, वन और घास के मैदानों में संतुलन
उन्होंने कहा कि वेटलैंड्स (आर्द्रभूमि) जैव-विविधता के संरक्षण और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण इकोसिस्टम हैं। उन्होंने आर्द्रभूमि, वनों और घास के मैदानों के बीच उचित संतुलन बनाए रखने की जरूरत बताई। (इनपुट: आईएएनएस)


