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‘मौसम सूचना नेटवर्क एवं डाटा प्रणाली’ (WINDS) का विस्तार, फसल बीमा में तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल पर सरकार का जोर

केंद्र सरकार ने मौसम सूचना नेटवर्क एवं डाटा प्रणाली (WINDS) के जरिए देशभर में हाइपरलोकल मौसम आंकड़ों का नेटवर्क विकसित करने की दिशा में तेजी से काम शुरू किया है। कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने राज्यसभा में लिखित जवाब में बताया कि यह पहल फसल बीमा, कृषि परामर्श और आपदा जोखिम प्रबंधन के लिए स्वचालित मौसम केंद्र (AWS) तथा स्वचालित वर्षामापी यंत्र (ARG) का राष्ट्रीय नेटवर्क तैयार करने के उद्देश्य से शुरू की गई है।

सात राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में लागू WINDS

सरकार के अनुसार, असम, हिमाचल प्रदेश, केरल, ओडिशा, पुडुचेरी, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड ने WINDS को अपनाया है। इसके तहत अब तक 16,843 स्थानों पर इंस्टालेशन की मंजूरी दी जा चुकी है। इनमें 1,188 स्थानों पर सिविल कार्य पूरा हो चुका है, जबकि 892 स्वचालित मौसम केंद्र और वर्षामापी यंत्र स्थापित किए जा चुके हैं।

फसल उपज आकलन में यस-टेक का बढ़ा दायरा

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत खरीफ 2023 से प्रौद्योगिकी आधारित उपज आकलन प्रणाली (यस-टेक) लागू की गई है। इसका उद्देश्य रिमोट सेंसिंग तकनीक के जरिए निष्पक्ष और सटीक फसल उपज का आकलन करना है। शुरुआत में इसे धान और गेहूं के लिए लागू किया गया था, जबकि खरीफ 2024 से सोयाबीन को भी इसमें शामिल किया गया। इन फसलों के उपज आकलन में यस-टेक से प्राप्त आंकड़ों को अनिवार्य रूप से 30% वेटेज दिया जा रहा है।

12 राज्यों के 344 जिलों में लागू हुई तकनीक

सरकार ने बताया कि वर्ष 2025-26 में यस-टेक को 12 राज्यों के 344 जिलों में लागू किया गया। मध्य प्रदेश ने तकनीक आधारित उपज आकलन को 100% वेटेज दिया है। महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश ने 50%, जबकि ओडिशा और कर्नाटक ने 40% वेटेज निर्धारित किया है। सरकार इसके प्रभावी क्रियान्वयन की नियमित समीक्षा भी कर रही है।

दावों के समयबद्ध भुगतान के लिए उठाए गए कई कदम

सरकार ने बताया कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत दावों के समय पर निपटान के लिए राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल (NCIP) विकसित किया गया है। यह पोर्टल किसानों के ऑनलाइन नामांकन, सब्सिडी भुगतान, बीमा संबंधी आंकड़ों के प्रबंधन और दावा राशि को सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजने की सुविधा उपलब्ध कराता है।

डिजीक्लेम मॉड्यूल और जुर्माने की व्यवस्था

खरीफ 2022 से दावों के भुगतान की निगरानी के लिए ‘डिजीक्लेम मॉड्यूल’ लागू किया गया है, जिसे सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (PFMS) और बीमा कंपनियों की लेखा प्रणाली से जोड़ा गया है। खरीफ 2024 से बीमा कंपनियों द्वारा भुगतान में देरी होने पर NCIP के माध्यम से स्वतः 12% जुर्माना लगाया जाता है। वहीं, खरीफ 2025 से राज्य सरकारों द्वारा सब्सिडी जारी करने में देरी पर भी 12% जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

तकनीक आधारित पारदर्शिता पर सरकार का जोर

सरकार ने बताया कि खरीफ 2025 से राज्यों के लिए एस्क्रो खाता खोलना अनिवार्य किया गया है, ताकि प्रीमियम शेयर समय पर जमा हो सके। इसके अलावा, CCE Agri-App के जरिए फसल कटाई प्रयोग (CCE) के आंकड़े एकत्र कर NCIP पर अपलोड किए जा रहे हैं। राज्य भू-अभिलेखों का भी NCIP से एकीकरण किया गया है। वहीं, क्रॉप लॉस असेसमेंट ऐप (CLAP) को स्थानीय आपदाओं और फसलोपरांत नुकसान के आकलन के लिए सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में अनिवार्य कर दिया गया है। (इनपुट: पीआईबी)

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