भारत के फार्मा सेक्टर को कम लागत वाली प्रतिस्पर्धा से हटकर इनोवेशन और ग्लोबल क्वालिटी पर करना होगा फ़ोकस

इंडस्ट्री के विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री को सस्ती जेनेरिक दवाओं में अपनी पारंपरिक ताकत से आगे बढ़कर इनोवेशन, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, क्वालिटी और ग्लोबल रेगुलेटरी स्टैंडर्ड्स पर ध्यान देना होगा, ताकि वह अपनी ग्रोथ की क्षमता को हासिल कर सके।

2030 तक 130 बिलियन डॉलर के बाजार के लक्ष्य के लिए आरएंडडी, टेक्नोलॉजी और गुणवत्ता पर निवेश जरूरी

भारत का लक्ष्य 2030 तक 130 बिलियन अमेरिकी डॉलर का फार्मास्युटिकल मार्केट बनाना है। हैदराबाद में हाल ही में हुए एक इंडस्ट्री इवेंट में विशेषज्ञों ने कहा कि ग्रोथ के अगले चरण के लिए रिसर्च और डेवलपमेंट, डिजिटल टेक्नोलॉजी तथा कॉन्ट्रैक्ट रिसर्च और डेवलपमेंट मैन्युफैक्चरिंग में ज्यादा निवेश की जरूरत होगी।

ये चर्चाएं सीपीएचआई और पीएमईसी इंडिया 2026 के 19वें एडिशन से पहले हुईं, जो नवंबर में दिल्ली-एनसीआर में अलग-अलग जगहों पर आयोजित होने वाला है। सीपीएचआई और पीएमईसी इंडिया 2026 का ऑफिशियल लॉन्च और प्री-इवेंट, जो फार्मा लीडरशिप एक्सचेंज के बैनर तले आयोजित किया गया था, उसमें भारत के फार्मास्युटिकल और लाइफ साइंसेज इकोसिस्टम के फार्मा लीडर्स, सीएक्सओ, इंडस्ट्री के दिग्गज और प्रमुख लोग शामिल हुए।

तेलंगाना का लक्ष्य: लाइफ साइंसेज इनोवेशन राजधानी बनना

तेलंगाना सरकार में लाइफ साइंसेज और फार्मा के सीईओ सर्वेश सिंह ने कहा कि राज्य, जो पहले से ही एक बड़ा फार्मास्युटिकल मैन्युफैक्चरिंग और वैक्सीन हब है, अब वैल्यू चेन में ऊपर उठने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा, “तेलंगाना ने पहले ही खुद को भारत के फार्मास्युटिकल मैन्युफैक्चरिंग पावरहाउस और ग्लोबल वैक्सीन हब के तौर पर स्थापित कर लिया है, लेकिन अब हमारी महत्वाकांक्षा मैन्युफैक्चरिंग से कहीं आगे है। हम चाहते हैं कि तेलंगाना भारत की लाइफ साइंसेज इनोवेशन राजधानी के तौर पर उभरे।”

सिंह ने आगे कहा कि राज्य बायोलॉजिक्स, बायोसिमिलर्स, सेल और जीन थेरेपी तथा उन दूसरे क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है जहां बायोलॉजी, केमिस्ट्री और टेक्नोलॉजी का संगम होता है। उन्होंने बताया, “अपनी नेक्स्ट-जेन लाइफ साइंसेज पॉलिसी 2026-2030 के जरिए, हमारा लक्ष्य अगले पांच सालों में 25 बिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश आकर्षित करना और पांच लाख से ज्यादा नौकरियां पैदा करना है।”

API क्षमता मजबूत करने और आयात निर्भरता कम करने पर जोर

बल्क ड्रग मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर एम. रोजा रानी ने कहा कि भारत ने बल्क ड्रग्स और एपीआई में मजबूत क्षमताएं विकसित की हैं, लेकिन उसे इम्पोर्ट किए जाने वाले मुख्य शुरुआती मटीरियल और इंटरमीडिएट्स पर निर्भरता कम करने की जरूरत है। उन्होंने कहा, “मैन्युफैक्चरिंग की क्षमता अच्छी तरह से स्थापित है; अब प्राथमिकता प्रतिस्पर्धा को मजबूत करने, इम्पोर्ट किए जाने वाले मुख्य शुरुआती मटीरियल और इंटरमीडिएट्स पर निर्भरता कम करने तथा घरेलू वैल्यू चेन में ज्यादा गहराई लाने की है।”

रानी ने कहा कि अगले तीन से पांच साल में रिसर्च और डेवलपमेंट, नई टेक्नोलॉजी और एपीआई क्षमता में ज्यादा निवेश जरूरी होगा, जबकि पीएलआई स्कीम और बल्क ड्रग पार्क जैसी पहल घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को और मजबूत कर सकती हैं।सीआरडीएमओ इंडस्ट्री में बड़े अवसरइन्फॉर्मा मार्केट्स इन इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर योगेश मुद्रस ने कहा कि भारत फार्मास्युटिकल्स के लिए एक अहम दशक में प्रवेश कर रहा है, जहां साइंस, टैलेंट और मैन्युफैक्चरिंग में इसकी ताकत ज्यादा वैल्यू वाले मौकों में बदल रही है।

उन्होंने कहा, “सीआरडीएमओ इंडस्ट्री के 2028 तक लगभग 14 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, और 2030 तक 22 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक के मौके मिल सकते हैं। इस क्षमता को हासिल करना इस बात पर निर्भर करेगा कि इंडस्ट्री कितनी असरदार ढंग से क्वालिटी, टेक्नोलॉजी, क्षमता और ग्लोबल सहयोग को आगे बढ़ाती है।”

मुद्रस ने यह भी कहा कि सीपीएचआई और पीएमईसी इंडिया इंडस्ट्री के स्टेकहोल्डर्स को सहयोग करने और इन मौकों को लंबे समय की ग्रोथ में बदलने के लिए एक प्लेटफॉर्म देंगे। 

जेनेरिक्स से आगे बढ़कर बहुआयामी रणनीति की जरूरत साथ

गुरु मैनेजमेंट कंसल्टेंट्स में हेल्थकेयर और लाइफसाइंसेज एडवाइजरी की डायरेक्टर पुष्पा विजयराघवन ने कहा कि भारत को जेनेरिक्स, एपीआई, बायोलॉजिक्स, बायोसिमिलर्स और इनोवेशन के क्षेत्रों में एक साथ आगे बढ़ना होगा। उन्होंने कहा, “हमें अपने जेनेरिक्स बेस को बनाए रखना होगा, एपीआई बैकवर्ड इंटीग्रेशन पर तेजी से काम करना होगा, बायोलॉजिक्स और बायोसिमिलर्स में बड़े पैमाने पर काम करना होगा और इनोवेशन में कहीं ज्यादा गंभीरता से निवेश करना होगा।”

तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में फेडरेशन ऑफ फार्मा एंटरप्रेन्योर्स के चेयरमैन चक्रवर्ती एवीपीएस ने कहा कि फार्मास्युटिकल कंपनियों के लिए नियमों का पालन अब बुनियादी जरूरत है, जबकि इनोवेशन और टेक्नोलॉजी मुख्य अंतर पैदा करने वाले कारक बन गए हैं। उन्होंने कहा, “ग्रोथ के अगले चरण को लागत के मामले में कॉम्पिटिटिव होने से आगे बढ़ना होगा। नियमों का पालन अब बुनियादी जरूरत है; असली कॉम्पिटिटिव फायदा इनोवेशन, एडवांस्ड और सस्टेनेबल पैकेजिंग, ट्रेसेबिलिटी, टेक्नोलॉजी और ग्लोबल स्टैंडर्ड वाली क्वालिटी से मिलेगा।” 

सीपीएचआई और पीएमईसी इंडिया 2026 का कार्यक्रम

सीपीएचआई इंडिया 23-25 नवंबर को आईआईसीसी, यशोभूमि, द्वारका में आयोजित किया जाएगा, जबकि पीएमईसी इंडिया 24-26 नवंबर को आईईएमएल, ग्रेटर नोएडा में आयोजित किया जाएगा। (इनपुट-एजेंसी)