विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रायसीना डायलॉग 2025 के दौरान लिकटेंस्टीन, क्यूबा, मोल्दोवा, नॉर्वे, जॉर्जिया और स्लोवाकिया के नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं। इन बैठकों में व्यापार, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, निवेश और बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा हुई।
लिकटेंस्टीन की विदेश मंत्री डोमिनिक हैसलर के साथ हुई बैठक में जयशंकर ने व्यापार और आर्थिक भागीदारी समझौते (TEPA) में प्रगति, संयुक्त राष्ट्र में सहयोग और यूक्रेन स्थिति पर विचार-विमर्श किया। उन्होंने इस बैठक को उपयोगी बताते हुए कहा कि दोनों देश इन मुद्दों पर मिलकर काम करेंगे। वहीं क्यूबा के उप प्रधानमंत्री एडुआर्डो मार्टिनेज डियाज के साथ जयशंकर ने स्वास्थ्य और पारंपरिक चिकित्सा में सहयोग बढ़ाने को लेकर चर्चा की। उन्होंने भारत और क्यूबा के बीच स्वास्थ्य क्षेत्र में साझेदारी को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता पर जोर दिया।
मोल्दोवा के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री मिहाई पोपसोई के साथ जयशंकर ने द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सहयोग को बढ़ाने पर बातचीत की। बैठक के दौरान कृषि क्षेत्र में सहयोग के लिए एक समझौते पर हस्ताक्ष हुए, जिससे दोनों देशों के बीच कृषि संबंध और मजबूत होंगे। नॉर्वे के विदेश मंत्री एस्पेन बार्थ ईडे के साथ जयशंकर ने TEPA के क्रियान्वयन, ब्लू इकॉनमी (समुद्री अर्थव्यवस्था) और शिक्षा सहयोग पर चर्चा की। दोनों नेताओं ने यूक्रेन में जारी स्थिति पर भी विचार-विमर्श किया।
जॉर्जिया की विदेश मंत्री माका बोचोरिशविली के साथ जयशंकर ने राजनीतिक, व्यापार, निवेश, पर्यटन और शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर बातचीत की। उन्होंने दोनों देशों के बीच संबंधों को और प्रगाढ़ बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। इसके अलावा स्लोवाकिया के विदेश मंत्री जुराज ब्लानार के साथ जयशंकर ने व्यापार, निवेश, शिक्षा, बुनियादी ढांचा और संस्कृति को लेकर चर्चा की। ब्लानार ने जयशंकर को उपनिषद का स्लोवाक अनुवाद भी भेंट किया।
गौरतलब रायसीना डायलॉग भारत का एक प्रमुख जियोपॉलिटिकल और जियो-इकॉनॉमिक सम्मेलन है, जिसका आयोजन विदेश मंत्रालय करता है। इसका 10वां संस्करण 17 मार्च को शुरू हुआ था और 19 मार्च को इसका समापन हुआ।