विदेश मंत्री एस. जयशंकर आज से चीन के दौरे पर, एससीओ विदेश मंत्रियों की बैठक में होंगे शामिल

विदेश मंत्री एस. जयशंकर आज रविवार से चीन की तीन दिवसीय यात्रा पर जा रहे हैं। वे वहां तियानजिन में होने वाली शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होंगे। यह दौरा इसलिए भी खास है क्योंकि 2020 में गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद यह जयशंकर की पहली चीन यात्रा है।

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच अक्टूबर 2023 में रूस के कजान शहर में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक हुई थी। यह पिछले लगभग पांच वर्षों में पहली उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल स्तरीय बातचीत थी। इस बैठक में पीएम मोदी ने स्पष्ट किया था कि भारत-चीन संबंध तभी स्थिर और सकारात्मक हो सकते हैं जब वे पारस्परिक विश्वास, पारस्परिक सम्मान और पारस्परिक संवेदनशीलता पर आधारित हों।

इसके बाद से राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने भी बीजिंग का दौरा किया है और कई अहम मुद्दों पर चीन के वरिष्ठ नेताओं से बातचीत की है। पिछले महीने बीजिंग में एससीओ सदस्य देशों की सुरक्षा परिषद सचिवों की 20वीं बैठक में अजीत डोभाल ने संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों जैसे लश्कर-ए-तैयबा (LeT), जैश-ए-मोहम्मद (JeM), अल कायदा और ISIS से उत्पन्न खतरे पर गहरी चिंता जताई थी। उन्होंने पहलगाम आतंकी हमले और भारत द्वारा चलाए गए “ऑपरेशन सिंदूर” का भी जिक्र किया, जिसके तहत सीमा पार आतंकी ढांचे को नष्ट करने की कार्रवाई की गई।

इस बैठक के दौरान डोभाल ने चीन के विदेश मंत्री और कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति के पोलित ब्यूरो सदस्य वांग यी से मुलाकात की। विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, दोनों नेताओं ने भारत-चीन संबंधों के हालिया घटनाक्रमों की समीक्षा की और द्विपक्षीय रिश्तों के समग्र विकास पर जोर दिया, जिसमें लोगों के बीच संपर्क को बढ़ाना भी शामिल था।

लगभग उसी समय, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी शंघाई सहयोग संगठन के रक्षा मंत्रियों की बैठक के दौरान चीन के रक्षा मंत्री एडमिरल डोंग जून से मुलाकात की थी। इस दौरान दोनों नेताओं ने भारत-चीन सीमा पर शांति बनाए रखने गहन चर्चा की। विदेश मंत्री एस. जयशंकर की यह यात्रा भारत-चीन संबंधों में एक नए संवाद की उम्मीद जगा रही है, खासकर जब दोनों देश सीमा विवाद और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर गहन संवाद में लगे हैं। -(IANS)