कृषि यांत्रिकीकरण पर सब-मिशन (एसएमएएम) के माध्यम से केंद्र सरकार देशभर में आधुनिक कृषि मशीनों की पहुंच बढ़ाकर खेती को अधिक उत्पादक और लाभकारी बनाने पर जोर दे रही है। योजना के तहत अब तक 9,404.47 करोड़ रुपए की वित्तीय सहायता से 21.61 लाख कृषि मशीनें किसानों को उपलब्ध कराई गई हैं। साथ ही 52.50 करोड़ रुपए की सहायता से 40,918 हेक्टेयर क्षेत्र में 40,928 ड्रोन प्रदर्शन आयोजित किए गए हैं, जिससे आधुनिक कृषि तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा मिला है।
छोटे और सीमांत किसानों पर विशेष फोकस
वर्ष 2014-15 में शुरू की गई कृषि यांत्रिकीकरण पर सब-मिशन (एसएमएएम) का उद्देश्य छोटे और सीमांत किसानों, महिला किसानों, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के किसानों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), स्वयं सहायता समूहों और कम मशीनीकरण वाले क्षेत्रों तक आधुनिक कृषि उपकरणों की पहुंच सुनिश्चित करना है। योजना राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेवीवाई) के तहत संचालित की जा रही है।
मशीनीकरण से बढ़ रही उत्पादकता
योजना के तहत भूमि की तैयारी, बुआई, सिंचाई, फसल संरक्षण, कटाई और फसलोपरांत प्रबंधन जैसे सभी कृषि कार्यों में मशीनों के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे श्रम पर निर्भरता कम हुई है, कृषि कार्य समय पर पूरे हो रहे हैं, लागत में कमी आई है और किसानों की आय तथा उत्पादकता में वृद्धि हो रही है।
कस्टम हायरिंग सेंटर और मशीनरी बैंक से मिल रही सुविधा
एसएमएएम के तहत किसानों के लिए 27,554 कस्टम हायरिंग सेंटर, 646 हाई-टेक हब और 25,608 फार्म मशीनरी बैंक स्थापित करने में सहायता दी गई है। इन केंद्रों के माध्यम से किसान महंगी कृषि मशीनें किराये पर लेकर कम लागत में आधुनिक तकनीक का लाभ उठा रहे हैं।
सब्सिडी और वित्तीय सहायता का प्रावधान
योजना के तहत सामान्य श्रेणी के किसानों को कृषि मशीनों की खरीद पर 40 प्रतिशत तथा अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, छोटे एवं सीमांत किसानों तथा पूर्वोत्तर राज्यों के लाभार्थियों को 50 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जाती है। वहीं फार्म मशीनरी बैंक की स्थापना के लिए 80 प्रतिशत तथा पूर्वोत्तर राज्यों में कुछ मामलों में 95 प्रतिशत तक वित्तीय सहायता का प्रावधान है।
ड्रोन आधारित खेती को मिल रहा बढ़ावा
एसएमएएम के तहत कृषि में ड्रोन के उपयोग को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। वर्ष 2023-24 से 2025-26 के दौरान भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने कृषि विज्ञान केंद्रों और राज्य कृषि विश्वविद्यालयों के सहयोग से 40,928 ड्रोन प्रदर्शन आयोजित किए। पात्र संस्थानों को ड्रोन खरीदने के लिए प्रति ड्रोन 10 लाख रुपए तक की 100 प्रतिशत सहायता दी जाती है, जबकि किसान उत्पादक संगठनों को 75 प्रतिशत तक अनुदान उपलब्ध कराया जाता है।
महिला किसानों के लिए विशेष प्रावधान
योजना के तहत कुल आवंटित निधि का 30 प्रतिशत महिला किसानों के लिए निर्धारित किया गया है। इसका उद्देश्य कृषि मशीनों तक उनकी पहुंच बढ़ाना और मशीनीकृत खेती में उनकी भागीदारी को प्रोत्साहित करना है।
समावेशी और आधुनिक कृषि की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
केंद्र सरकार का कहना है कि एसएमएएम ने कृषि मशीनीकरण की क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने, आधुनिक तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देने, श्रम लागत घटाने और खेती को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। योजना से विशेष रूप से छोटे किसानों, महिला किसानों और कम मशीनीकरण वाले क्षेत्रों को लाभ मिल रहा है। (इनपुट: पीआईबी)


