किसान भिंडी की खेती से अर्जित कर सकते है लाखों का मुनाफा

 

भिंडी एक लोकप्रिय सब्जी है जो कि भारतीय भोजन शैली का विशेष हिस्सा है भिंडी को अंग्रेजी लेडी फिंगर या ओक्रा भी कहते है। भिंडी का प्रमुखतः सब्जी के रूप में प्रयोग किया जाता है जिसमे कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, खनिज लवण जैसे कैल्शियम, फास्फोरस के अतिरिक्त विटामिन ए, बी, ‘सी’, थाईमीन एवं रिबोफ्लेविन पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है। भरपूर मात्रा में फाइबर तथा म्यूसिलेज होने के कारण यह कब्ज रोगियों के लिए भी अत्यधिक लाभकारी होती है। इसके जड़ और तने का प्रयोग गुड़ तथा चीनी को साफ करने के लिए किया जाता है। इसके अतिरिक्त तने के रेशेदार छिलके का इस्तेमाल पेपर मिल में भी करते हैं।

खाद्य और कृषि संगठन (FAO) के आंकड़ों अनुसार भारत विश्व स्तर पर भिंडी का सबसे बड़ा उत्पादक है। भारत की विविध जलवायु का ही वरदान है की भिंडी की खेती लगभग साल भर कई राज्यों में व्यावसायिक रूप से की जाती है। भिंडी की मांग सालभर बनी रहती है और खास तौर पर ग्रीष्म ऋतु में मांग बढ़ने के कारण बाजार भाव मे भी प्रायः बढ़ोतरी देखी जाती है। वर्तमान समय में कृषि वैज्ञानिकों की मदद से किसान कई तरह की नई तकनीकों के प्रयोग से भिंडी की लाभप्रद खेती कर रहे हैं। इसमें सबसे बड़ा योगदान आनुवंशिकी और पादप प्रजनन अनुसंधान से विकसित भिंडी की उन्नत किस्मों का है, जिनमे रोग एवं कीट प्रतिरोधक क्षमता है। इसी वजह से कम लागत में किसान ज्यादा उपज ले पा रहे हैं।

 

आइए जानें ऐसी ही कुछ प्रमुख भिंडी की उन्नत किस्मों के बारे में जिनकी आधुनिक खेती कर आप भी अर्जित कर सकते है लाखों का मुनाफा:

1) काशी लालिमा: यह लाल भिंडी की किस्म भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान द्वारा विकसित की गयी है। यह एंटीऑक्सीडेंट, आयरन और कैल्शियम सहित अन्य पोषक तत्वों से भरपूर है। हरी भिंडी के मुकाबले लाल भिंडी में कम सोडियम पाया जाता है जिसके कारण यह हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है। इसके फल बैंगनी – लाल रंग के, 11-14 सेमी लंबा और 1.5-1.6 सेमी व्यास में होता है। इसके पौधे 150-160 सेमी ऊंचे होते है औसत उपज 140-150 क्विंटल प्रति हैकर रहती है। यह किस्म वायरस जीवाणु के प्रति भी शहनशील है।

2) काशी चमन: यह हरी भिंडी की किस्म भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान द्वारा विकसित की गयी है। इस प्रजाति में फूल बुवाई के 39-41 दिन बाद आना शुरू हो जाते है और फल 45-100 दिन तक लगते हैं। इसके फल गहरे हरे रंग और 11-14 सेमी लंबाई के होते है। इस प्रजाति का पौधा 120-125 सेमी मध्यम ऊंचाई का होता है और औसत उपज 150-160 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक रहती है। यह प्रजाति ग्रीष्म एवं वर्षा ऋतु के लिए उपयुक्त है और YVMV एवं OELCV वायरस के प्रति प्रतिरोधक क्षमता से लैस है।

3) वर्षा उपहार: यह किस्म चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार द्वारा विकसित
की गई है। यह प्रजाति येलोवेन मोजेक विषाणु रोग रोधी है। पौधे मध्यम ऊंचाई 90-120 सेमी तथा इंटरनोड पास पास होते हैं। पौधे में 2-3 शाखाएं प्रत्येक नोड से निकलती हैं। वर्षा ऋतु में 40 दिनों में फूल निकलना शुरू हो जाते हैं व फल 7 दिनों बाद तोड़े जा सकते हैं। फल चौथी पांचवी गांठ से पैदा होते हैं। औसत पैदावार 90-100 क्विंटल प्रति हेक्टेयर होती हैं। इसकी खेती ग्रीष्म ऋतु में भी कर सकते हैं।

4) अर्का अनामिका: यह किस्म भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान, बैंगलोर द्वारा विकसित की गई
है। इस किस्म मे येलो वेन मोजेक विषाणु रोग हेतु प्रतिरोधी क्षमता है। इसके पौधे 120-150 सेमी ऊंचे, सीधे व अच्छी शाखा युक्त होते हैं। फल रोमरहित, मुलायम गहरे हरे रंग तथा 5-6 धारियों वाले होते हैं। फलों का डंठल लम्बा होने के कारण तोड़ने में सुविधा होती है। यह प्रजाति ग्रीष्म एवं वर्षा ऋतुओं में उगाई जा सकती हैं। इसकी औसत पैदावार 120-150 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की रहती है।

समय से उचित मूल्य पर बीज की उपलब्धता हमेशा से किसानों के लिए एक बड़ी समस्या रही है। ऐसे में ऑनलाइन खरीद के माध्यम से अब राष्ट्रीय बीज निगम, भारत सरकार का उपक्रम, आपके घर तक भिंडी की उन्नत प्रजातियों के बीज उपलब्ध करवा रही है। भारत के किसी भी क्षेत्र से भिंडी बीज ऑनलाइन ऑर्डर करने के लिए आप राष्ट्रीय बीज निगम की वैबसाइट www.indiaseeds.com पर उपलब्ध ऑनलाइन शॉपिंग के लिंक का प्रयोग कर सकते है। इसके अतिरिक्त आप क्यूआर कोड के माध्यम से भी बीज ऑर्डर कर सकते है।

 

 

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