केंद्र सरकार 1 फरवरी को केंद्रीय बजट 2026-27 पेश करने की तैयारी में जुटी है। बजट से पहले वित्त मंत्रालय ने मंगलवार को पिछले बजट में की गई प्रमुख घोषणाओं और उन पर अब तक हुई प्रगति का ब्यौरा साझा किया। मंत्रालय ने टैक्स सुधारों से लेकर निवेश से जुड़े बड़े फैसलों तक की जानकारी दी।
न्यू टैक्स रिजीम में बड़े बदलाव
वित्त मंत्रालय ने बताया कि फाइनेंस एक्ट 2025 के तहत नए टैक्स सिस्टम यानी न्यू टैक्स रिजीम (एनटीआर) में व्यक्तिगत आयकर ढांचे में अहम बदलाव किए गए हैं। इन सुधारों का उद्देश्य टैक्स देने के बाद आम लोगों के हाथ में ज्यादा पैसा बचाना है।
वित्त वर्ष 2025-26 से लागू हुए बदलाव
मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी दी कि ये सभी बदलाव वित्त वर्ष 2025-26 से लागू हो चुके हैं। इसका असर आकलन वर्ष 2026-27 से करदाताओं को दिखेगा।
इनकम टैक्स बिल 2025 से पुराने कानून में बदलाव की तैयारी
वित्त मंत्रालय ने इनकम टैक्स बिल 2025 को भी एक अहम कदम बताया। इस बिल के जरिए भारत के करीब छह दशक पुराने प्रत्यक्ष कर कानून को बदलने की तैयारी है। सरकार का लक्ष्य है कि नया कानून निवेशकों का भरोसा बनाए रखे, टैक्सपेयर्स को राहत दे और टैक्स व्यवस्था को सरल बनाए।
कॉरपोरेट टैक्स में भी सुधार
टैक्स नीति में किए गए सुधारों में कॉरपोरेट टैक्स भी शामिल है। जो कंपनियां तय छूट और कटौतियों का लाभ नहीं लेती हैं, उनके लिए कॉरपोरेट टैक्स दर 22% रखी गई है। वहीं, नई मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के लिए सीमित अवधि तक टैक्स दर 15% तय की गई है।
12 लाख रुपए तक की आय पर टैक्स नहीं
व्यक्तिगत आयकर के मोर्चे पर, नए टैक्स सिस्टम में आसान स्लैब और कम टैक्स दरें लागू की गई हैं। इसके तहत 12 लाख रुपए तक की सालाना आय वाले लोगों को टैक्स नहीं देना होगा। सैलरी पाने वाले कर्मचारियों के लिए यह सीमा 12.75 लाख रुपए तक हो जाती है, क्योंकि उन्हें 75,000 रुपए की स्टैंडर्ड डिडक्शन का लाभ मिलता है।
सॉवरेन वेल्थ फंड को 2030 तक टैक्स छूट
फाइनेंस एक्ट 2025 के तहत धारा 10 (23एफई) के लाभ भी बढ़ाए गए हैं। इसके अनुसार, योग्य सॉवरेन वेल्थ फंड (एसडब्ल्यूएफ) और पेंशन फंड अब 31 मार्च 2030 तक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में निवेश कर सकेंगे। इन निवेशों पर डिविडेंड, ब्याज और लंबी अवधि के पूंजीगत लाभ (एलटीसीजी) पर टैक्स छूट जारी रहेगी।
आईएफएससी से जुड़े नियम पूरी तरह लागू
वित्त मंत्रालय ने बताया कि इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर (आईएफएससी) से जुड़े अतिरिक्त कामकाज और समय-सीमा बढ़ाने से संबंधित नियमों को फाइनेंस एक्ट 2025 के तहत पूरी तरह लागू कर दिया गया है। ये बदलाव 1 अप्रैल 2025 से प्रभावी हो चुके हैं।
एआईएफ के लिए टैक्स में स्पष्टता
मंत्रालय के अनुसार, सरकार ने अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स (एआईएफ) के लिए ‘कराधान की निश्चितता’ का अपना वादा पूरा किया है। अब प्रतिभूतियों से होने वाली आय पर टैक्स से जुड़े नियम स्पष्ट कर दिए गए हैं, जिससे निवेशकों का भरोसा मजबूत होगा।
निवेश को बढ़ावा देने पर जोर
वित्त मंत्रालय ने कहा कि आईएफएससी से जुड़े अतिरिक्त नियमों और समय-सीमा में बढ़ोतरी को भी फाइनेंस एक्ट 2025 के तहत पूरी तरह लागू कर दिया गया है। इन सभी सुधारों का मकसद निवेश को बढ़ावा देना और टैक्स सिस्टम को पारदर्शी बनाना है। (इनपुट: आईएएनएस)


