स्वच्छता अभियान 6.0 में ई-कचरे और कबाड़ पर फोकस, पांच साल में 5,102 करोड़ रुपए की कमाई

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय, परमाणु ऊर्जा विभाग, अंतरिक्ष विभाग तथा कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन विभाग में राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने शुक्रवार को ‘विशेष स्वच्छता अभियान 6.0’ के कार्यान्वयन चरण का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि स्वच्छता अब महज साफ-सफाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सुशासन, सार्वजनिक संसाधनों के बेहतर उपयोग, लंबित मामलों में कमी और कचरे के जिम्मेदार प्रबंधन की स्थायी संस्कृति बन चुकी है। अभियान के तहत पिछले पांच वर्षों में ई-कचरे और कबाड़ के निपटान से 5,102.91 करोड़ रुपए की कमाई हुई है, जबकि 1,049.54 लाख वर्ग फीट से अधिक कार्यालयी जगह खाली कराई गई है।

स्वच्छता अभियान से प्रशासनिक सुधार तक का सफर

डॉ. जितेंद्र सिंह ने 2014 में लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छता आह्वान का उल्लेख करते हुए कहा कि यह पहल धीरे-धीरे जन-आंदोलन और फिर सरकारी कार्यालयों में संस्थागत प्रक्रिया में बदल गई। उन्होंने कहा कि शौचालय और साफ-सफाई से शुरू हुआ अभियान अब पुरानी फाइलों, बेकार फर्नीचर, ई-फाइलों, ई-कचरे और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के जिम्मेदार निपटान तक पहुंच गया है।

श्रमदान और पौधारोपण के साथ अभियान की शुरुआत

जितेंद्र सिंह ने प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (डीएआरपीजी) द्वारा निर्धारित स्थल पर आयोजित कार्यक्रम में श्रमदान किया। उन्होंने ‘एक पेड़ मां के नाम’ पहल के तहत पौधे लगाए और पुराने रिकॉर्ड हटाने की प्रक्रिया की प्रतीकात्मक शुरुआत की। इस दौरान सफाई मित्रों को सुरक्षा किट और मिठाइयां देकर सम्मानित भी किया गया। डीएआरपीजी इस अभियान के लिए नोडल विभाग है।

सीएसआईआर मुख्यालय में भी चलाया गया अभियान

इसके बाद केंद्रीय मंत्री ने सीएसआईआर मुख्यालय पहुंचकर वैज्ञानिक एवं तकनीकी इकोसिस्टम में विशेष स्वच्छता अभियान 6.0 को आगे बढ़ाया। उन्होंने व्यापक सफाई अभियान का नेतृत्व किया और ‘स्वच्छता सिग्नेचर कैंपेन’ तथा पौधारोपण कार्यक्रम में भाग लिया। सफाई मित्रों को भी सम्मानित किया गया। सीएसआईआर में पुराने रिकॉर्ड और कबाड़ की समीक्षा, उनके निपटान, कार्यस्थल में सुधार तथा कार्यालयी स्थान के बेहतर प्रबंधन पर जोर दिया गया।

5,102 करोड़ रुपए से अधिक की हुई कमाई

डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि पिछले पांच वर्षों में ई-कचरे और कबाड़ के निपटान से 5,102.91 करोड़ रुपए की कमाई हुई है। इस दौरान सरकारी कार्यालयों में 1,049.54 लाख वर्ग फीट से अधिक जगह खाली कराकर उसका बेहतर उपयोग संभव बनाया गया। इसके अलावा 180.48 लाख से अधिक फाइलों को बंद या हटाया गया और देशभर में 24.20 लाख सफाई स्थलों की पहचान कर उनकी सफाई की गई।

खाली हुई जगह का हो सकता है बेहतर उपयोग

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कबाड़ और अनावश्यक रिकॉर्ड हटाकर खाली हुई जगह का उपयोग ग्रीन एरिया विकसित करने या लंबे समय से अवरुद्ध और कम उपयोग वाली जगहों को बेहतर बनाने में किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि विशेष स्वच्छता अभियान ने स्वच्छता को केवल वार्षिक गतिविधि के बजाय सरकारी संस्थानों की कार्य संस्कृति का हिस्सा बनाने में मदद की है।

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय में 705 वस्तुओं की पहचान

जितेंद्र सिंह ने पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय का भी दौरा किया। वहां ‘विशेष अभियान 6.0’ के तहत पृथ्वी भवन और मौसम भवन से ई-कचरे तथा अनुपयोगी उपकरणों को हटाने और निपटान की प्रक्रिया शुरू की गई। इस अभियान के तहत कुल 705 वस्तुओं की पहचान की गई है। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉ. श्रीनिवास कुमार तुम्माला ने केंद्रीय मंत्री को निपटान के लिए चुनी गई वस्तुओं की जानकारी दी।

100 से अधिक विज्ञान संस्थान अभियान में शामिल

डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की गतिविधियां वैज्ञानिक इकोसिस्टम में चलाए जा रहे व्यापक अभियान का हिस्सा हैं। पृथ्वी विज्ञान, सीएसआईआर और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत आने वाले 100 से अधिक विज्ञान संस्थानों ने 2 अक्टूबर से इस अभियान में भाग लेना शुरू किया है। इसका उद्देश्य वैज्ञानिक संस्थानों में स्वच्छता और अनुपयोगी सामान के व्यवस्थित निपटान की संस्कृति को मजबूत करना है।

‘कचरे से संपदा’ की दिशा में वैज्ञानिक पहल

केंद्रीय मंत्री ने विशेष स्वच्छता अभियान को वैज्ञानिक इकोसिस्टम की ‘कचरे से संपदा’ अवधारणा से जोड़ा। उन्होंने कहा कि लक्ष्य केवल कचरे का निपटान करना नहीं, बल्कि ऐसी तकनीक विकसित करना है, जिनके माध्यम से कचरे को उपयोगी उत्पादों, सामग्री, ऊर्जा और आर्थिक अवसरों में बदला जा सके।

कचरे से संसाधनों की पुनर्प्राप्ति पर जोर

सीएसआईआर के तकनीकी पोर्टफोलियो में नगरपालिका ठोस कचरा प्रबंधन, प्लास्टिक कचरे का पुनर्चक्रण, ई-कचरे से महत्वपूर्ण धातुओं और दुर्लभ खनिजों की पुनर्प्राप्ति, लिथियम-आयन बैटरी का पुनर्चक्रण, बायोमेथेनेशन, कृषि अपशिष्ट से जैव-अपघटित उत्पादों का निर्माण, अपशिष्ट जल से संसाधनों की पुनर्प्राप्ति और औद्योगिक कचरे से मूल्यवर्धित उत्पाद बनाने जैसी तकनीकें शामिल हैं। इन तकनीकों को उपयोग और आगे के विकास के लिए उद्योग जगत तथा अन्य संगठनों को उपलब्ध कराया गया है।

स्वच्छता से पुनर्चक्रण और संपदा सृजन तक

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि विशेष अभियानों के अनुभव बताते हैं कि स्वच्छता अभियान किस तरह प्रशासनिक सुधार, संसाधनों के बेहतर उपयोग और संस्थागत दक्षता बढ़ाने का माध्यम बन सकता है। वैज्ञानिक क्षेत्र में यह सोच कचरे की पहचान और निपटान से आगे बढ़कर संसाधनों की पुनर्प्राप्ति, पुनर्चक्रण, नवाचार और संपदा सृजन तक पहुंच रही है।

31 अक्टूबर तक चलेगा अभियान

विभिन्न मंत्रालयों और विभागों द्वारा सितंबर में की गई तैयारियों के बाद विशेष स्वच्छता अभियान 6.0 का कार्यान्वयन चरण 2 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2026 तक चलेगा। अभियान में स्वच्छता, लंबित मामलों में कमी, रिकॉर्ड की समीक्षा और छंटाई, कार्यालयी स्थान का बेहतर उपयोग, ई-कचरे एवं अनुपयोगी सामान का वैज्ञानिक निपटान तथा बेहतर रिकॉर्ड प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसे विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के संस्थागत लक्ष्यों के साथ समग्र सरकारी प्रयास के रूप में लागू किया जा रहा है। (इनपुट: पीआईबी)

RELATED ARTICLES

3 hours ago | Animal Protection

विश्व पशु दिवस : पशु संरक्षण से प्रकृति के संतुलन तक सह-अस्तित्व का संदेश

पृथ्वी केवल मनुष्य का ही घर नहीं है। यहां जीवन की असंख्य प्रजातियां एक-दूसरे से जुड़ी हैं और इनक...

3 hours ago | Gaya Pind Daan

गया में पिंडदान के मायने : पितृ स्मरण से आध्यात्मिक चेतना तक भारतीय सांस्कृतिक निरंतरता की अनूठी परंपरा

गया में पिंडदान भारतीय सनातन परंपरा का ऐसा विशिष्ट संस्कार है, जिसमें आध्यात्मिक आस्था, धार्मि...