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पहली बार भारत में होगा विश्व सागौन सम्मेलन, कोच्चि बनेगा मेज़बान

केरल पहली बार विश्व सागौन सम्मेलन (World Teak Conference – WTC) की मेज़बानी करने जा रहा है। यह प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 17 से 20 सितम्बर तक कोच्चि में आयोजित होगा। भारत में पहली बार हो रहा यह आयोजन वैश्विक सागौन व्यापार और टिकाऊ वानिकी पर अहम चर्चा का मंच बनेगा।

सम्मेलन का विषय है – “वैश्विक सागौन क्षेत्र का सतत विकास – भविष्य के बाज़ार और पर्यावरण के अनुरूप”। इसमें सामाजिक-आर्थिक मुद्दों, जेनेटिक्स, साइल्वीकल्चर (वन प्रबंधन), तकनीक, पर्यावरण और अंतरराष्ट्रीय व्यापार जैसे पहलुओं पर चर्चा होगी।

इस आयोजन में 40 देशों से 350 से अधिक प्रतिनिधि शामिल होंगे। सम्मेलन का आयोजन केरल फ़ॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट (KFRI), पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEF&CC), TEAKNET और इंटरनेशनल ट्रॉपिकल टिम्बर ऑर्गनाइजेशन (ITTO), जापान मिलकर कर रहे हैं। तकनीकी सहयोग FAO, IUFRO और MAFF जापान द्वारा दिया जा रहा है।

नीलांबुर: सागौन की धरती

KFRI के निदेशक डॉ. सी.एस. कन्नन वारियर ने कहा, “केरल में विश्व सागौन सम्मेलन की मेज़बानी भारत के लिए गर्व का क्षण है।”
नीलांबुर को सागौन की नर्सरी और दुनिया के पहले सागौन संग्रहालय (Teak Museum) के लिए जाना जाता है। इस कारण केरल न केवल सागौन की विरासत का प्रतिनिधित्व करता है, बल्कि उसके भविष्य की दिशा भी तय करता है।

सम्मेलन की मुख्य झलकियाँ

चार दिवसीय इस सम्मेलन में वैज्ञानिक सत्र, बिजनेस-टू-बिजनेस मीटिंग, पैनल चर्चा और फील्ड विज़िट शामिल होंगे। इसमें नीति-निर्माता, शोधकर्ता, व्यापारी और किसान भाग लेंगे ताकि वैश्विक सागौन क्षेत्र के लिए टिकाऊ रास्ते तय किए जा सकें।

भारत की सागौन पहचान

केरल का नीलांबुर सागौन दुनिया भर में अपनी बेहतरीन गुणवत्ता, समान दानेदार बनावट और टिकाऊपन के लिए प्रसिद्ध है। इसका उपयोग जहाज़ निर्माण, प्रीमियम फ़र्नीचर और निर्माण कार्यों में किया जाता है।

भारत, विशेष रूप से केरल, टिकाऊ वानिकी को बढ़ावा देते हुए वैश्विक सागौन व्यापार में अहम योगदान देता है।

– आईएएनए