उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूरी का निधन, 91 वर्ष की आयु में ली अंतिम सांस

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता मेजर जनरल (रिटायर्ड) भुवन चंद्र खंडूरी का मंगलवार को निधन हो गया। उन्होंने देहरादून के मैक्स अस्पताल में अंतिम सांस ली। वे 91 वर्ष के थे और लंबे समय से बीमारी से जूझ रहे थे।भुवन चंद्र खंडूरी भारतीय सेना से राजनीति में आए और अपनी सादगी, अनुशासन, ईमानदारी तथा स्पष्टवादिता के लिए पूरे देश में जाने जाते थे। उन्होंने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के रूप में दो बार कार्यभार संभाला — पहला कार्यकाल 2007 से 2009 तक और दूसरा कार्यकाल 2011 से 2012 तक। अपने कार्यकाल में उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाया और पारदर्शी व अनुशासित प्रशासन की मजबूत नींव रखी।

मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने जताया गहरा शोक

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। फेसबुक पोस्ट में सीएम धामी ने लिखा:“उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी (सेवानिवृत्त) के निधन का दुःखद समाचार प्राप्त हुआ। खंडूरी जी ने भारतीय सेना में रहते हुए राष्ट्र सेवा, अनुशासन और समर्पण का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया। सैन्य जीवन से लेकर सार्वजनिक जीवन तक उनका व्यक्तित्व राष्ट्रहित और जनसेवा के प्रति समर्पित रहा।”

सीएम धामी ने आगे कहा कि राजनीतिक जीवन में खंडूरी जी ने उत्तराखंड के विकास, सुशासन, पारदर्शिता और ईमानदार कार्यशैली की मजबूत पहचान बनाई। उनका निधन उत्तराखंड के साथ ही राष्ट्रीय राजनीति के लिए अपूरणीय क्षति है।

धामी सरकार में कैबिनेट मंत्री रेखा गुप्ता ने भी शोक व्यक्त किया

धामी सरकार में कैबिनेट मंत्री रेखा गुप्ता ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा कि यह अत्यंत दुःखद और अपूरणीय क्षति है। उन्होंने खंडूरी जी को प्रखर राष्ट्रभक्त और आदर्श जनसेवक बताते हुए कहा कि सेना अधिकारी से लेकर मुख्यमंत्री पद तक उनकी यात्रा राष्ट्रसेवा, अनुशासन, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा का अनुपम उदाहरण रही।

रेखा गुप्ता ने उनके पर्वतीय क्षेत्रों के विकास, सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में किए गए कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि उनकी सादगी और दृढ़ प्रशासनिक क्षमता उन्हें जनता के बीच अत्यंत सम्माननीय बनाती थी। राजनीतिक और सामाजिक जगत में उनके निधन से शोक की लहर दौड़ गई है। खंडूरी जी का पूरा जीवन राष्ट्रसेवा, त्याग और ईमानदारी की मिसाल के रूप में याद किया जाएगा। (इनपुट-एजेंसी)