डिजिटल अवसंरचना से साइबर सुरक्षा तक, सुरक्षित डिजिटल भारत के लिए सरकार ने उठाए कई कदम: जितिन प्रसाद

इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने कहा कि सरकार ने देश में डिजिटल अवसंरचना, साइबर सुरक्षा और डेटा संरक्षण को मजबूत करने के साथ इंटरनेट कनेक्टिविटी बढ़ाने और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए कई कार्यक्रम और नीतिगत उपाय लागू किए हैं। उन्होंने कहा कि डिजिटल इंडिया कार्यक्रम का उद्देश्य प्रौद्योगिकी को सभी के लिए सुलभ बनाना, नागरिकों को सशक्त करना और सुरक्षित, समावेशी तथा भरोसेमंद डिजिटल वातावरण तैयार करना है। उन्होंने यह जानकारी 5 अगस्त 2026 को लोकसभा में दी।

डिजिटल इंडिया के तीन प्रमुख लक्ष्य

सरकार ने जुलाई 2015 में डिजिटल इंडिया कार्यक्रम शुरू किया था। इसके तीन प्रमुख लक्ष्य डिजिटल अवसंरचना को मजबूत करना, सरकारी सेवाओं की डिजिटल डिलीवरी सुनिश्चित करना तथा डिजिटल साक्षरता और रोजगार के जरिए नागरिकों को सशक्त बनाना हैं।

इंटरनेट कनेक्टिविटी में बड़ा विस्तार

सरकार के अनुसार देश में कुल टेलीफोन कनेक्शन मार्च 2014 में 93.3 करोड़ से बढ़कर मार्च 2026 में 133 करोड़ से अधिक हो गए। इसी अवधि में इंटरनेट ग्राहकों की संख्या 25.15 करोड़ से बढ़कर 109.27 करोड़ हो गई। भारतनेट जैसी पहलों के जरिए ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

2.21 लाख ग्राम पंचायतें भारतनेट से सेवा के लिए तैयार

जून 2026 तक भारतनेट परियोजना के तहत देशभर में 2.21 लाख ग्राम पंचायतों को सेवा के लिए तैयार किया जा चुका है। इनमें 80,472 ग्राम पंचायतों में भारतनेट के पॉइंट ऑफ प्रेजेंस चालू हैं। वहीं, 30 जून 2026 तक डिजिटल भारत निधि से वित्त पोषित मोबाइल योजना के तहत देशभर में 24,784 टावर चालू किए जा चुके हैं।

डेटा की कीमत में भारी कमी

सरकार के अनुसार डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और सस्ती इंटरनेट सेवाओं ने डिजिटल सेवाओं की पहुंच बढ़ाई है। डेटा की कीमत 2014 में 269 रुपये प्रति जीबी से घटकर 2025-26 में करीब 8 से 10 रुपये प्रति जीबी रह गई है। इससे भारत दुनिया के सबसे किफायती डेटा बाजारों में शामिल हो गया है।

आधार और डीबीटी से डिजिटल सेवा वितरण

आधार ने सुरक्षित और तत्काल डिजिटल प्रमाणीकरण के लिए बायोमेट्रिक पहचान का मजबूत प्लेटफॉर्म तैयार किया है। देश में 1.44 अरब से अधिक आधार नंबर जारी किए जा चुके हैं। आधार से जुड़े प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के जरिए 56 मंत्रालयों की 318 योजनाओं के नकद लाभ सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजे जाते हैं। देशभर में डीबीटी के जरिए 52 लाख करोड़ रुपये से अधिक का अंतरण किया जा चुका है।

यूपीआई से डिजिटल भुगतान को बढ़ावा

यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) 55.49 करोड़ से अधिक लोगों और 6.5 करोड़ व्यापारियों को सेवाएं दे रहा है तथा 731 बैंकों को एक प्लेटफॉर्म पर जोड़ता है। सरकार के अनुसार, यूपीआई भारत के करीब 85 प्रतिशत डिजिटल पेमेंट और दुनिया के लगभग 50 प्रतिशत रियल-टाइम डिजिटल पेमेंट को सपोर्ट करता है।

डिजिलॉकर और उमंग से डिजिटल सेवाएं

डिजिलॉकर के 71.66 करोड़ से अधिक पंजीकृत यूजर्स हैं। इसके 2,822 ऑनबोर्डेड जारीकर्ताओं के जरिए 936.03 करोड़ से अधिक दस्तावेज जारी किए जा चुके हैं। वहीं, उमंग प्लेटफॉर्म के जरिए नागरिकों को 2,575 सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

ई-संजीवनी से 48 करोड़ से अधिक मरीजों को सेवा

ई-संजीवनी के जरिए नागरिक स्मार्टफोन से डॉक्टरों और मेडिकल विशेषज्ञों तक पहुंच सकते हैं। इस प्लेटफॉर्म ने देशभर में 48 करोड़ से अधिक मरीजों को सेवा प्रदान की है।

5.01 लाख सीएससी के जरिए डिजिटल सेवाएं

सामान्य सेवा केंद्र (सीएससी) ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में डिजिटल माध्यम से सरकारी और व्यावसायिक सेवाएं उपलब्ध करा रहे हैं। मई 2026 तक देशभर में 5.01 लाख सीएससी संचालित थे, जिनमें 3.91 लाख ग्राम पंचायत स्तर पर काम कर रहे थे। सीएससी के माध्यम से 800 से अधिक सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

डिजिटल साक्षरता पर भी जोर

प्रधानमंत्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान (पीएमजीडीआईएसएचए) के तहत छह करोड़ लोगों को प्रशिक्षण देने के लक्ष्य के मुकाबले 6.39 करोड़ से अधिक लोगों को प्रशिक्षित किया जा चुका है। FutureSkills Prime के तहत 34 लाख से अधिक उम्मीदवारों ने पंजीकरण कराया है, जबकि 23 लाख से अधिक उम्मीदवार विभिन्न पाठ्यक्रमों में नामांकन या प्रशिक्षण ले चुके हैं।

एनआईईएलआईटी के जरिए डिजिटल कौशल प्रशिक्षण

राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईईएलआईटी) कंप्यूटर कॉन्सेप्ट्स और डिजिटल साक्षरता से जुड़े विभिन्न पाठ्यक्रम संचालित करता है। वर्तमान में इसके 56 केंद्र हैं और आईईसीटी क्षेत्र में कौशल विकास गतिविधियों के लिए 9,000 से अधिक साझेदार संस्थानों का देशव्यापी नेटवर्क है।

आईटी-आईटीईएस क्षेत्र में 283 अरब डॉलर का राजस्व

सरकार के अनुसार, नैसकॉम के आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2025 में भारत के आईटी और आईटीईएस उद्योग ने 283 अरब अमेरिकी डॉलर का राजस्व अर्जित किया। देश के 2,100 से अधिक ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटरों में इंजीनियरिंग, एनालिटिक्स, साइबर सुरक्षा और एआई आधारित भूमिकाओं में करीब 26 लाख पेशेवर काम कर रहे हैं।

टियर-2 और टियर-3 शहरों में स्टार्टअप को बढ़ावा

इलेक्ट्रॉनिकी एवं आईसीटी क्षेत्र में उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने देश में 73 सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क ऑफ इंडिया (एसटीपीआई) केंद्र स्थापित किए हैं। इनमें 65 केंद्र टियर-2 और टियर-3 शहरों में हैं। ‘जेन-नेक्स्ट सपोर्ट फॉर इनोवेटिव स्टार्टअप्स’ (GENESIS) योजना के तहत करीब 1,600 टेक्नोलॉजी स्टार्टअप्स को आगे बढ़ाने का लक्ष्य है। इसके लिए 65 इनक्यूबेशन केंद्र कार्यान्वयन एजेंसियों के रूप में काम कर रहे हैं।

साइबर सुरक्षा के लिए बहुस्तरीय व्यवस्था

सरकार ने साइबर सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए कानूनी, तकनीकी और प्रशासनिक उपाय किए हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय के तहत राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा समन्वयक विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय सुनिश्चित करते हैं। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 70बी के तहत सीईआरटी-इन को साइबर सुरक्षा घटनाओं से निपटने वाली राष्ट्रीय एजेंसी के रूप में नामित किया गया है।

एनसीसीसी और साइबर स्वच्छता केंद्र सक्रिय

सीईआरटी-इन द्वारा कार्यान्वित राष्ट्रीय साइबर समन्वय केंद्र (एनसीसीसी) साइबरस्पेस को स्कैन करने और साइबर सुरक्षा खतरों का पता लगाने में मदद करता है। वहीं, साइबर स्वच्छता केंद्र नागरिकों को बॉटनेट और मैलवेयर से बचाव के लिए निशुल्क उपकरण तथा साइबर सुरक्षा संबंधी सुझाव उपलब्ध कराता है।

साइबर अपराध से निपटने के लिए आई4सी

गृह मंत्रालय ने साइबर अपराधों से प्रभावी तरीके से निपटने और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय मजबूत करने के लिए इंडियन साइबरक्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (आई4सी) की स्थापना की है। इसके अलावा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 70ए के तहत महत्वपूर्ण सूचना अवसंरचना की सुरक्षा के लिए नेशनल क्रिटिकल इन्फॉर्मेशन इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोटेक्शन सेंटर (एनसीआईआईपीसी) स्थापित किया गया है।

डीपफेक और साइबर हाइजीन पर जागरूकता

इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय साइबर हाइजीन, साइबर सुरक्षा और डीपफेक समेत विभिन्न मुद्दों पर जागरूकता कार्यक्रम चला रहा है। इसके तहत हैंडबुक, छोटे वीडियो, पोस्टर, ब्रोशर, बच्चों के लिए कार्टून कहानियां और एडवाइजरी जैसी सामग्री के जरिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है।

डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट से मजबूत हुआ ढांचा

सरकार ने डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट, 2023 के जरिए डिजिटल व्यक्तिगत डेटा के प्रसंस्करण के लिए व्यापक कानूनी ढांचा तैयार किया है। इसके तहत व्यक्तिगत डेटा की प्रोसेसिंग कानूनी उद्देश्य के लिए और डेटा प्रिंसिपल की सहमति या निर्धारित वैध उपयोगों के आधार पर की जा सकती है। सहमति स्वतंत्र, विशिष्ट, सूचित, बिना शर्त और स्पष्ट होनी चाहिए।

डेटा प्रोटेक्शन नियमों का चरणबद्ध क्रियान्वयन

13 नवंबर 2025 को अधिसूचित डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन रूल्स, 2025 के तहत अधिनियम के प्रावधानों को 18 महीने की संक्रमण अवधि में चरणबद्ध तरीके से लागू करने की व्यवस्था की गई है। इसमें डेटा प्रोटेक्शन बोर्ड की स्थापना भी शामिल है। सरकार के अनुसार, इससे डिजिटल व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा और डिजिटल इकोसिस्टम में डेटा के जिम्मेदार उपयोग के लिए नागरिक-केंद्रित ढांचा मजबूत होगा।

IndiaAI मिशन के लिए 10,371.92 करोड़ रुपये

सरकार ने 7 मार्च 2024 को IndiaAI मिशन को मंजूरी दी थी। इसके लिए पांच वर्षों में 10,371.92 करोड़ रुपये के खर्च का प्रावधान किया गया है। मिशन का उद्देश्य एआई तकनीक को लोकतांत्रिक बनाना, युवाओं के लिए आर्थिक अवसर और रोजगार पैदा करना तथा एआई से जुड़े जोखिमों से निपटना है।

सात स्तंभों के जरिए लागू हो रहा IndiaAI मिशन

IndiaAI मिशन के सात प्रमुख स्तंभों में IndiaAI कंप्यूट, फाउंडेशन मॉडल, IndiaAI एप्लीकेशन डेवलपमेंट पहल, IndiaAI FutureSkills, AIKosh डेटासेट प्लेटफॉर्म, सुरक्षित एवं विश्वसनीय एआई और IndiaAI स्टार्टअप फाइनेंसिंग शामिल हैं। इनके जरिए एआई कंप्यूटिंग क्षमता, स्वदेशी लार्ज लैंग्वेज मॉडल, सामाजिक-आर्थिक उपयोग वाले एआई समाधान, एआई प्रतिभा, उच्च गुणवत्ता वाले डेटासेट, जिम्मेदार एआई और स्टार्टअप फंडिंग को बढ़ावा देने की योजना है।

टियर-2 और टियर-3 शहरों में एआई प्रतिभा विकसित करने पर जोर

IndiaAI FutureSkills के तहत टियर-2 और टियर-3 शहरों में डेटा और एआई लैब स्थापित करने, विद्यार्थियों को फेलोशिप देने तथा उद्योग की जरूरतों के अनुरूप पाठ्यक्रम तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है। वहीं, AIKosh के जरिए उच्च गुणवत्ता वाले डेटासेट, मॉडल और टूल एक मंच पर उपलब्ध कराने का लक्ष्य है।

सुरक्षित और जिम्मेदार एआई विकास पर फोकस

IndiaAI मिशन के ‘सुरक्षित और विश्वसनीय एआई’ स्तंभ के तहत भारत के सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संदर्भों को ध्यान में रखते हुए घरेलू गवर्नेंस फ्रेमवर्क और मूल्यांकन उपकरण विकसित करने का लक्ष्य है। वहीं, IndiaAI स्टार्टअप फाइनेंसिंग के जरिए प्रोटोटाइपिंग से लेकर व्यावसायीकरण तक स्टार्टअप्स को जोखिम पूंजी और सहायता उपलब्ध कराने की योजना है। (इनपुट: पीआईबी)