80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लालकिले की प्राचीर से देश के सामने ‘शक्ति की सप्त धारा’ का आह्वान करते हुए कहा कि आने वाले 5-7 वर्षों में इन सात शक्तियों के सामर्थ्य से भारत को नई ऊंचाई और गति दी जाएगी। उन्होंने कहा कि देश की युवा शक्ति को भी राष्ट्र निर्माण से जोड़कर भारत को नए लक्ष्यों को हासिल करने के लिए सक्षम बनाया जाएगा।
मैन्युफैक्चरिंग बनेगी पहली शक्ति
प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि ‘सप्त धारा’ में पहली शक्ति मैन्युफैक्चरिंग पावर है। उन्होंने कहा कि भारत को उत्पादन बढ़ाने के साथ छोटे पुर्जों से लेकर बड़े उत्पादों तक पूरी वैल्यू चेन अपने पास रखनी होगी। डिजाइन से लेकर मैन्युफैक्चरिंग तक भारत को ग्लोबल सप्लाई चेन का केंद्र बनना होगा।
‘क्वालिटी, क्वालिटी और क्वालिटी’ बने मंत्र
पीएम मोदी ने कहा कि लागत, गुणवत्ता और पैमाने के मामले में भारत को वैश्विक मानदंडों पर खरा उतरना होगा। भारतीय फैक्ट्रियों को प्रतिस्पर्धी और उत्पादों को यूजर फ्रेंडली बनाने के साथ पैकेजिंग को भी वैश्विक स्तर का बनाना होगा। उन्होंने कहा कि ‘जीरो डिफेक्ट’ भारत की पहचान बननी चाहिए। हर मैन्युफैक्चरर, उद्यमी और एमएसएमई को वैश्विक बाजार में विश्वसनीयता और गुणवत्ता के आधार पर पहचान बनाने का लक्ष्य रखना चाहिए। गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होना चाहिए।
कृषि और खाद्य उत्पादन बनेगी दूसरी शक्ति
सप्त धारा की दूसरी शक्ति कृषि और खाद्य उत्पादन को बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया के बाजार भारतीय कृषि उत्पादों के लिए खुले हैं और भारत को खेत से लेकर एक्सपोर्ट मार्केट तक अपनी पहुंच बनानी होगी। उन्होंने मिलेट्स, मसालों, फल और फूलों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय कृषि उत्पादों को वैश्विक ब्रांड बनाया जाना चाहिए।
टेक्नोलॉजी और इनोवेशन पर जोर
प्रधानमंत्री ने प्रौद्योगिकी और नवाचार को सप्त धारा की तीसरी शक्ति बताया। उन्होंने कहा कि दुनिया एआई, क्वांटम, अंतरिक्ष, रोबोटिक्स और डाटा सेंटर जैसे नए क्षेत्रों में आगे बढ़ रही है। भारत को केवल दुनिया का बाजार नहीं बनना है, बल्कि इनोवेशन का हब बनना है। उन्होंने यूपीआई और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत ने इन क्षेत्रों में अपनी ताकत का परिचय दिया है और अब डिजिटल पब्लिक टेक्नोलॉजी को दुनिया के कोने-कोने तक पहुंचाना है।
‘गति शक्ति’ से मजबूत होगी कनेक्टिविटी
सप्त धारा की चौथी शक्ति ‘गति शक्ति’ को बताते हुए पीएम मोदी ने कहा कि देश में सीमलेस और तेज कनेक्टिविटी पर जोर देना होगा। शहरों को हाईस्पीड रेल से जोड़ने, आधुनिक हाईवे, इनलैंड वाटरवे, एयरपोर्ट और मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक नेटवर्क विकसित करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि पोर्ट को केवल सामान उतारने-चढ़ाने की जगह के रूप में नहीं, बल्कि पोर्ट-लेड डेवलपमेंट और ग्रोथ के केंद्र के रूप में विकसित करना होगा।
रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता जरूरी
पांचवीं शक्ति के रूप में रक्षा बल का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर होना भारत के लिए अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि भारत केवल दुनिया का बाजार बनकर नहीं रह सकता, बल्कि रक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने के साथ ग्लोबल सप्लायर बनने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ना होगा। उन्होंने काउंटर ड्रोन सिस्टम विकसित करने और हाइपरसोनिक डिफेंस टेक्नोलॉजी में नेतृत्व हासिल करने पर भी जोर दिया।
ग्रीन और ब्लू इकॉनमी में अवसर
छठी शक्ति ग्रीन और ब्लू इकॉनमी को बताते हुए पीएम मोदी ने कहा कि भारत को ग्रीन हाइड्रोजन, रिन्यूएबल एनर्जी, एनर्जी स्टोरेज, ग्रीन मोबिलिटी और ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग को वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ाना होगा। उन्होंने कहा कि भारत जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच समाधान देने की दिशा में काम कर रहा है। साथ ही ब्लू इकॉनमी में भी भारत के पास बड़ी संभावनाएं हैं।
भारत की सॉफ्ट पावर बनेगी सातवीं शक्ति
सप्त धारा की सातवीं शक्ति के रूप में प्रधानमंत्री ने भारत की ‘सॉफ्ट पावर’ का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि योग ने पूरी दुनिया को भारत से जोड़ा है और अब यह वैश्विक स्तर पर ऊर्जा का माध्यम बन रहा है। भारत के पास आस्था के केंद्रों के साथ आयुर्वेद और समग्र स्वास्थ्य देखभाल की समृद्ध परंपरा है। उन्होंने ‘हील इन इंडिया’ जैसे प्रयासों के माध्यम से भारत की क्षमताओं को दुनिया तक पहुंचाने पर जोर दिया। (इनपुट: आईएएनएस)


