मोबाइल से सौर और एयरोस्पेस तक, वैश्विक विनिर्माण में बढ़ रही भारत की हिस्सेदारी

भारत के उभरते औद्योगिक क्षेत्र रणनीतिक और प्रौद्योगिकी आधारित क्षेत्रों में तेजी से विस्तार कर रहे हैं। मोबाइल कंपोनेंट, सौर विनिर्माण और एयरोस्पेस जैसे क्षेत्रों में घरेलू उत्पादन और स्थानीयकरण बढ़ने से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में भारत की भूमिका और मजबूत होने की उम्मीद है।

मोबाइल कंपोनेंट में घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा

इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS) के तहत अगले छह से सात वर्षों में मोबाइल कंपोनेंट की कुल वैल्यू या बिल ऑफ मैटेरियल्स (BoM) में घरेलू हिस्सेदारी करीब 50% तक पहुंचने की उम्मीद है। फिलहाल यह हिस्सेदारी 20% से कम है।

PCB विनिर्माण में बड़ी संभावनाएं

प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (PCB), खासकर हाई-डेंसिटी इंटरकनेक्ट (HDI) और मल्टी-लेयर PCB, घरेलू विनिर्माण के लिए प्रमुख क्षेत्र के रूप में उभर रहे हैं। इस क्षेत्र का अनुमानित संभावित बाजार करीब 5 अरब डॉलर का है, जबकि इसकी 85-90% मांग फिलहाल आयात से पूरी होती है। ऐसे में देश में PCB विनिर्माण बढ़ाने की बड़ी संभावनाएं मौजूद हैं।

सौर विनिर्माण में बढ़ रही घरेलू क्षमता

रिपोर्ट के अनुसार, भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सौर पीवी विनिर्माता बन गया है। देश में करीब 35GW की सौर सेल विनिर्माण क्षमता पहले से परिचालन में है, जबकि लगभग 100GW क्षमता निर्माणाधीन है।

पूरी सौर वैल्यू चेन के स्थानीयकरण पर जोर

सरकार की अप्रूव्ड लिस्ट ऑफ मॉडल्स एंड मैन्युफैक्चरर्स (ALMM), घरेलू सामग्री संबंधी आवश्यकताओं और प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजनाओं से सौर विनिर्माण क्षेत्र में एकीकृत उत्पादन को बढ़ावा मिल रहा है। इन उपायों से सेल, वेफर और इंगट के क्षेत्र में बैकवर्ड इंटीग्रेशन को भी प्रोत्साहन मिल रहा है। भारत में 2030 तक सौर विनिर्माण की करीब 90% वैल्यू चेन को घरेलू स्तर पर विकसित करने की उम्मीद है।

एयरोस्पेस में वैश्विक अवसर

एयरोस्पेस क्षेत्र में वैश्विक मांग और आपूर्ति के बीच मौजूद अंतर भारत के लिए बड़े विनिर्माण अवसर पैदा कर रहा है। देश की लागत-प्रतिस्पर्धी विनिर्माण क्षमता और इंजीनियरिंग प्रतिभा भारत को वैश्विक एयरोस्पेस विनिर्माण हब के रूप में स्थापित करने में मदद कर रही है।

वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बढ़ रही भागीदारी

रिपोर्ट के मुताबिक, बोइंग और एयरबस भारत से हर साल करीब 1.4-1.6 अरब डॉलर मूल्य के उत्पादों की खरीद करते हैं। यह वैश्विक एयरोस्पेस आपूर्ति श्रृंखला में भारत की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। Aequs, Azad, DYTC, BHFC, RW, MOTHERSO और SANSERA जैसी भारतीय कंपनियां वैश्विक मूल उपकरण विनिर्माताओं (OEM) और टियर-1 आपूर्तिकर्ताओं के रूप में अपनी मौजूदगी बढ़ा रही हैं।

रणनीतिक क्षेत्रों में निवेश के नए अवसर

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत का औद्योगिक बदलाव अब तेजी से प्रौद्योगिकी आधारित और रणनीतिक क्षेत्रों तक विस्तार कर रहा है। बड़ा घरेलू बाजार, सरकारी नीतियों का समर्थन, निजी निवेश और स्थानीयकरण की बढ़ती प्रक्रिया अंतरिक्ष, सेमीकंडक्टर विनिर्माण, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, इलेक्ट्रॉनिक्स, नवीकरणीय ऊर्जा और एयरोस्पेस समेत पूरी वैल्यू चेन में नए अवसर पैदा कर रही है।

वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में मजबूत हो रही स्थिति

इन क्षेत्रों में हो रहा विस्तार भारत के औद्योगिक विकास के अगले चरण में उभरते उद्योगों की भूमिका को मजबूत कर रहा है। साथ ही, इससे घरेलू विनिर्माण क्षमता, नवाचार और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के साथ भारत का एकीकरण बढ़ने की उम्मीद है।

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