अंतरिक्ष से एआई और क्वांटम तकनीक तक, भारत-लक्जमबर्ग ने सहयोग बढ़ाने पर की चर्चा

लक्जमबर्ग के अर्थव्यवस्था, एसएमई, ऊर्जा एवं पर्यटन मंत्री लेक्स डेल्स ने सोमवार को केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह से मुलाकात की। इस दौरान दोनों पक्षों ने अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करने के साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम प्रौद्योगिकी, उन्नत पदार्थ और जीवन विज्ञान जैसे उभरते क्षेत्रों में सहयोग के ठोस अवसर तलाशने पर चर्चा की। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत-लक्जमबर्ग संबंध नए क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए मजबूत आधार प्रदान करते हैं।

जनवरी 2027 की प्रस्तावित राजकीय यात्रा से पहले तैयारी

दोनों पक्षों ने जनवरी 2027 में प्रस्तावित लक्जमबर्ग की भारत की राजकीय यात्रा को द्विपक्षीय सहयोग को नई गति देने का अवसर बताया। इस यात्रा से पहले दोनों देशों के संस्थानों और उद्योगों के बीच सहयोग के विशिष्ट प्रस्ताव तैयार करने पर जोर दिया गया।

अंतरिक्ष साझेदारी को और व्यापक बनाने पर चर्चा

बैठक में भारत-लक्जमबर्ग अंतरिक्ष सहयोग की मौजूदा स्थिति, भविष्य के विकास, संस्थागत एवं वाणिज्यिक सहयोग की संभावनाओं और प्रस्तावित राजकीय यात्रा की तैयारियों पर चर्चा हुई। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि अंतरिक्ष दोनों देशों की द्विपक्षीय साझेदारी का महत्वपूर्ण स्तंभ बना हुआ है।

2022 में हुआ था अंतरिक्ष सहयोग समझौता

दोनों देशों ने फरवरी 2022 में बाह्य अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए अन्वेषण और उपयोग में सहयोग को लेकर समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे। इसके बाद साझेदारी में वाणिज्यिक आयाम भी जुड़ा है। इसमें संचार उपग्रह ट्रांसपोंडर को लीज पर देना और पीएसएलवी के जरिए लक्जमबर्ग के दो उपग्रहों का वाणिज्यिक प्रक्षेपण शामिल है।

निजी अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग की संभावनाएं

डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी के बढ़ते दायरे का उल्लेख किया। दोनों पक्षों ने लक्जमबर्ग के अंतरिक्ष उद्योग और भारत के तेजी से विस्तार कर रहे निजी अंतरिक्ष इकोसिस्टम के बीच सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की। संभावित क्षेत्रों में पृथ्वी अवलोकन इमेजरी, संचार ट्रांसपोंडर, वाणिज्यिक उपग्रह और उप-प्रणालियों का निर्माण, प्रक्षेपण यान सेवाएं, ग्राउंड स्टेशन और मिशन सहायता शामिल हैं।

भारत के अंतरिक्ष रोडमैप की जानकारी दी

केंद्रीय मंत्री ने भारत के व्यापक अंतरिक्ष रोडमैप की जानकारी साझा की। इसमें नेविगेशन और संचार उपग्रहों को मजबूत करने के साथ 2035 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने और 2040 तक चंद्रमा पर मानव की लैंडिंग कराने की दीर्घकालिक महत्वाकांक्षा शामिल है। उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी से अंतरराष्ट्रीय और वाणिज्यिक साझेदारियों के नए अवसर सामने आ रहे हैं।

आईएन-स्पेस और लक्जमबर्ग अंतरिक्ष एजेंसी में संपर्क

भारत में आईएन-स्पेस और लक्जमबर्ग अंतरिक्ष एजेंसी दोनों देशों के अंतरिक्ष इकोसिस्टम के बीच समन्वय बढ़ाने के लिए संपर्क में हैं। लक्जमबर्ग स्थित कंपनियां भी भारतीय संस्थानों और आईएन-स्पेस के साथ उपग्रह क्षमता, उपयोगकर्ता टर्मिनल तथा उपग्रह और ग्राउंड सब-सिस्टम से जुड़े अवसरों पर काम कर रही हैं।

एआई और हाई परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग में सहयोग

बैठक में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग को सहयोग के संभावित महत्वपूर्ण क्षेत्रों के रूप में रेखांकित किया गया। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कंप्यूटिंग क्षमता बढ़ाने, अतिरिक्त जीपीयू की खरीद और भारत की भाषाई विविधता के अनुरूप स्वदेशी बड़े भाषा मॉडल विकसित करने के प्रयासों की जानकारी दी।

लक्जमबर्ग में नई कंप्यूटिंग सुविधा की योजना

लक्जमबर्ग पक्ष ने एआई पर केंद्रित नई उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग सुविधा स्थापित करने की योजनाओं की जानकारी दी। दोनों पक्षों ने भारत और लक्जमबर्ग की कंपनियों तथा संस्थानों को जोड़कर इस क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा की।

क्वांटम तकनीक में भी सहयोग की संभावना

क्वांटम प्रौद्योगिकी को भी दोनों देशों के बीच सहयोग के महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में सामने रखा गया। डॉ. जितेंद्र सिंह ने राष्ट्रीय क्वांटम मिशन और क्वांटम संचार, कंप्यूटिंग तथा सेंसिंग के क्षेत्रों में भारत की प्रगति की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष क्षेत्र के साथ ऑप्टिकल संचार को जोड़ना भारत और लक्जमबर्ग के बीच विशेष रूप से संभावनाशील क्षेत्र हो सकता है।

जीवन विज्ञान और बायोटेक्नोलॉजी पर भी जोर

जीवन विज्ञान और जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारत की बायोई3 नीति और जैव प्रौद्योगिकी आधारित आर्थिक एवं वैज्ञानिक विकास पर सरकार के फोकस की जानकारी दी। उन्होंने लक्जमबर्ग इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ और लक्जमबर्ग सेंटर फॉर सिस्टम्स बायोमेडिसिन जैसे संस्थानों के साथ सहयोग की संभावनाओं का उल्लेख किया। न्यूरोडीजेनेरेटिव और अल्जाइमर रोग जैसे क्षेत्र भी साझा हित में शामिल हैं।

स्वास्थ्य और चिकित्सा अनुसंधान में सहयोग की गुंजाइश

डॉ. जितेंद्र सिंह ने टीका विकास और चिकित्सा अनुसंधान के लिए भारत में बढ़ते सार्वजनिक-निजी सहयोग तथा परमाणु चिकित्सा अनुसंधान को निजी क्षेत्र के लिए खोले जाने का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इससे अंतरराष्ट्रीय संस्थानों और उद्योगों के लिए सार्वभौमिक स्वास्थ्य से जुड़े क्षेत्रों में भागीदारी के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।

लक्जमबर्ग की कंपनियों की भारत में रुचि

लेक्स डेल्स ने अंतरिक्ष, उपग्रह संचार, एआई, साइबर सुरक्षा और उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग में भारत के साथ लक्जमबर्ग की बढ़ती सहभागिता की जानकारी दी। उन्होंने लक्जमबर्ग की कंपनियों के लिए भारत में अपनी गतिविधियों को और विस्तार देने की संभावनाओं पर भी चर्चा की।

संस्थानों और उद्योगों के बीच संरचित सहभागिता पर जोर

डॉ. जितेंद्र सिंह ने दोनों देशों के संस्थानों, अनुसंधान इकोसिस्टम और उद्योगों के बीच संरचित सहभागिता का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में दोनों देशों की क्षमताओं को एक साथ लाकर पारस्परिक लाभ वाले नए क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाया जा सकता है।

2020 की पीएम मोदी की वर्चुअल बैठक का उल्लेख

जितेंद्र सिंह ने भारत और लक्जमबर्ग के बीच मैत्रीपूर्ण संबंधों का उल्लेख करते हुए वर्ष 2020 में पीएम मोदी और लक्जमबर्ग के प्रधानमंत्री के बीच हुई वर्चुअल बैठक को भी याद किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच मौजूदा मजबूत संबंध नए और अधिक गहन क्षेत्रों में सहयोग के लिए अनुकूल आधार प्रदान करते हैं।

दोनों पक्षों के वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद

लक्जमबर्ग के प्रतिनिधिमंडल में मंत्री की कैबिनेट, आर्थिक नीति, उद्योग, नई तकनीक और अनुसंधान से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी तथा लक्जमबर्ग अंतरिक्ष एजेंसी के प्रतिनिधि शामिल थे। भारतीय पक्ष से विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, अंतरिक्ष विभाग और विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने बैठक में हिस्सा लिया। (इनपुट: पीआईबी)