भारत और वियतनाम के संबंध केवल कूटनीतिक औपचारिकताओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे सांस्कृतिक विरासत, आध्यात्मिक जुड़ाव, व्यापारिक साझेदारी और एशियाई सहयोग की गहरी भावना से भी जुड़े हुए हैं। हाल ही में वियतनाम के राष्ट्रपति To Lam की भारत यात्रा के दौरान यह भावनात्मक और सांस्कृतिक जुड़ाव विशेष रूप से उस समय देखने को मिला, जब भारत की ओर से उन्हें और उनके प्रतिनिधिमंडल को ऐसे उपहार भेंट किए गए, जो भारत की आध्यात्मिक परंपरा, शिल्प कौशल, कृषि विविधता और क्षेत्रीय सांस्कृतिक समृद्धि के प्रतीक थे। इन उपहारों में बिहार की मिठास, महाराष्ट्र की कृषि विरासत और उत्तर भारत की हस्तकला की झलक स्पष्ट दिखाई दी।
इस राजकीय यात्रा के दौरान भारत ने वियतनामी राष्ट्रपति को NBRI लखनऊ द्वारा विकसित ‘नमोह 108 लोटस’ भेंट किया। यह विशेष कमल केवल एक पुष्प नहीं, बल्कि भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं, पवित्रता और शांति का प्रतीक माना जाता है। कमल भारतीय संस्कृति में देवी-देवताओं से जुड़ा पवित्र फूल है और बौद्ध परंपराओं में भी इसका विशेष महत्व है। वियतनाम, जहां बौद्ध धर्म की गहरी जड़ें हैं, वहां इस उपहार का सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है।
इसके साथ ही मुरादाबाद की प्रसिद्ध धातु कला से निर्मित पीतल का हस्तनिर्मित बुद्ध प्रतिमा भी भेंट की गई, जिसमें बोधि वृक्ष का स्वरूप शामिल था। यह प्रतिमा शांति, करुणा, ज्ञान और शाश्वत मानवीय मूल्यों का प्रतिनिधित्व करती है। भारत और वियतनाम दोनों देशों के सांस्कृतिक इतिहास में भगवान बुद्ध की शिक्षाओं का गहरा प्रभाव रहा है। ऐसे में यह उपहार दोनों देशों के साझा बौद्ध विरासत और आध्यात्मिक संबंधों का प्रतीक बनकर उभरा।
वाराणसी का प्रसिद्ध रेशमी वस्त्र भी इस अवसर पर विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। बनारसी साड़ी और रेशमी कपड़े भारत की समृद्ध वस्त्र परंपरा के प्रतीक माने जाते हैं। वियतनाम में भी पारंपरिक वस्त्रों और हस्तशिल्प को अत्यधिक महत्व दिया जाता है। इसलिए यह उपहार केवल वस्त्र नहीं, बल्कि दोनों देशों की कलात्मक संवेदनाओं और सांस्कृतिक सौंदर्य का उत्सव था।
इस यात्रा की सबसे खास बात बिहार के पारंपरिक उत्पादों और व्यंजनों को मिली प्रमुखता रही। बिहार की प्रसिद्ध मिठाई सिलाओ खाजा को विशेष तौर पर भेंट स्वरूप शामिल किया गया। यहां का खाजा अपनी कुरकुरी परतों और मिठास के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है। बिहार में इसे किसी भी शुभ अवसर और विदाई का अहम प्रतीक माना जाता है।
इसी प्रकार गया का प्रसिद्ध अनरसा भी उपहारों में शामिल था। गयाजी का अनरसा पारंपरिक विधि से तैयार की जाने वाली मिठाई है, जो चावल, गुड़ और तिल के विशेष मिश्रण से बनती है। यह बिहार की समृद्ध खान-पान परंपरा और स्थानीय कारीगरों की कुशलता को दर्शाती है।
मिथिला क्षेत्र का मखाना भी इस अवसर पर चर्चा का केंद्र रहा। Makhana को ‘फॉक्स नट्स’ या ‘कमल के बीज’ के नाम से भी जाना जाता है। यह प्रोटीन, खनिज और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर सुपरफूड माना जाता है। दुनिया भर में हेल्दी फूड की बढ़ती मांग के बीच बिहार का मखाना अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी से अपनी पहचान बना रहा है।
इसके अलावा हाजीपुर का प्रसिद्ध मालभोग केला भी राष्ट्रपति को भेंट किया गया। अपनी प्राकृतिक मिठास, सुगंध और मलाईदार बनावट के कारण यह केला विशेष पहचान रखता है। यह बिहार की कृषि उत्कृष्टता और बागवानी क्षेत्र में उसकी संभावनाओं को दर्शाता है।
महाराष्ट्र की ओर से रत्नागिरी के प्रसिद्ध अल्फोंसो या हापुस आम भी उपहारों में शामिल रहे। Alphonso mango को दुनिया के सर्वश्रेष्ठ आमों में गिना जाता है। इसके साथ ही हेल्दी मिलेट बार भी भेंट किए गए, जो भारत के ‘श्री अन्न’ अभियान और मोटे अनाज को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है। बाजरा और अन्य मिलेट्स पोषण से भरपूर होते हैं और आज वैश्विक स्तर पर सुपर फूड के रूप में लोकप्रिय हो रहे हैं।
इन सांस्कृतिक और पारंपरिक उपहारों के पीछे केवल भावनात्मक संदेश ही नहीं, बल्कि आर्थिक और व्यापारिक संभावनाओं का संकेत भी छिपा हुआ है। भारत और वियतनाम के बीच द्विपक्षीय व्यापार पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ा है। दोनों देशों के बीच व्यापार 15 अरब डॉलर से अधिक के स्तर तक पहुंच चुका है और आने वाले वर्षों में इसे 20 अरब डॉलर से आगे ले जाने का लक्ष्य रखा जा रहा है।
भारत वियतनाम को दवाइयां, कृषि उत्पाद, मशीनरी, कपड़ा, ऑटोमोबाइल पार्ट्स और आईटी सेवाएं निर्यात करता है, जबकि वियतनाम से इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल उपकरण, रबर, रसायन और समुद्री उत्पाद भारत आते हैं। दोनों देश इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक साझेदार भी हैं और रक्षा, समुद्री सुरक्षा तथा ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग लगातार बढ़ रहा है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि कृषि प्रसंस्करण, फूड एक्सपोर्ट, पर्यटन, बौद्ध सर्किट, डिजिटल टेक्नोलॉजी, फार्मास्यूटिकल्स और ग्रीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग की अपार संभावनाएं हैं। बिहार के मखाना, आम, पारंपरिक मिठाइयों और मिलेट उत्पादों जैसे कृषि आधारित उत्पाद वियतनाम सहित दक्षिण-पूर्व एशियाई बाजारों में भारतीय निर्यात को नई पहचान दिला सकते हैं।
राष्ट्रपति तो लाम की यह यात्रा केवल राजनयिक कार्यक्रम नहीं रही, बल्कि इसने यह संदेश भी दिया कि भारत अपनी सांस्कृतिक विरासत, स्थानीय उत्पादों और क्षेत्रीय विविधता को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इन उपहारों में भारत की आध्यात्मिकता, स्वाद, कला, कृषि और आत्मीयता की झलक दिखाई दी, जिसने भारत-वियतनाम संबंधों को और अधिक गहराई प्रदान की।
भारत सरकार पिछले कुछ वर्षों में वियतनाम के साथ संबंधों को मजबूत करने के लिए लगातार सक्रिय प्रयास कर रही है। ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ के तहत Vietnam को भारत का एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार माना गया है। दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग बढ़ाने के लिए नौसैनिक अभ्यास, सैन्य प्रशिक्षण और रक्षा उपकरणों की आपूर्ति पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके अलावा भारत ने वियतनाम में बुनियादी ढांचा, डिजिटल कनेक्टिविटी, शिक्षा और क्षमता निर्माण परियोजनाओं में भी सहयोग बढ़ाया है।
बौद्ध पर्यटन सर्किट को विकसित करने, सीधी उड़ानों को बढ़ाने और सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों के बीच संपर्क मजबूत किया जा रहा है। भारत सरकार दक्षिण-पूर्व एशिया में शांति, स्थिरता और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए वियतनाम के साथ दीर्घकालिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के प्रयास कर रही है।


