भारत में ड्रोन तकनीक अब केवल प्रयोगात्मक स्तर तक सीमित नहीं रही है, बल्कि यह शासन, विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा का एक सशक्त उपकरण बन चुकी है। फरवरी 2026 तक देश में 38,500 से अधिक पंजीकृत ड्रोन (यूआईएन), 39,890 डीजीसीए-प्रमाणित रिमोट पायलट और 244 अनुमोदित प्रशिक्षण संगठन सक्रिय हैं। यह आंकड़े भारत के विनियमित और संगठित ड्रोन पारिस्थितिकी तंत्र की परिपक्वता को दर्शाते हैं।
सार्वजनिक सेवा में ड्रोन की भूमिका
ड्रोन तकनीक ने सार्वजनिक सेवा वितरण को अधिक कुशल, पारदर्शी और सटीक बनाया है। भूमि सर्वेक्षण, फसल मूल्यांकन, बुनियादी ढांचे की निगरानी, आपदा प्रबंधन, रेलवे और राजमार्ग निरीक्षण तथा रक्षा क्षेत्रों में ड्रोन का व्यापक उपयोग हो रहा है।
सरकारी योजनाओं में भी इसका प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है। स्वामित्व योजना के अंतर्गत ड्रोन के माध्यम से 3.28 लाख गांवों का सर्वेक्षण पूरा किया जा चुका है। 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 1.82 लाख गांवों के लिए 2.76 करोड़ संपत्ति कार्ड तैयार किए गए हैं। लगभग 3.44 लाख गांवों को कवर करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें दिसंबर 2025 तक करीब 95 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है।
कृषि क्षेत्र में परिवर्तन: नमो ड्रोन दीदी योजना
नवंबर 2023 में शुरू की गई नमो ड्रोन दीदी योजना महिला स्वयं सहायता समूहों को आधुनिक कृषि तकनीक से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। योजना का उद्देश्य कृषि दक्षता बढ़ाना, लागत कम करना और महिलाओं के लिए स्थायी आजीविका के अवसर तैयार करना है।
अब तक महिला एसएचजी को 1,094 ड्रोन वितरित किए जा चुके हैं, जिनमें 500 से अधिक ड्रोन नमो ड्रोन दीदी पहल के अंतर्गत प्रदान किए गए। इससे सटीक कृषि को बढ़ावा मिला है और ग्रामीण महिलाओं का सशक्तिकरण हुआ है।
बुनियादी ढांचे और सुरक्षा में उपयोग
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण सभी राजमार्ग परियोजनाओं के लिए मासिक ड्रोन-वीडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य करता है। इससे परियोजनाओं की प्रगति की पारदर्शी निगरानी संभव हुई है।
रेल मंत्रालय ने रेलवे ट्रैक, पुल और अन्य संरचनाओं की निगरानी के लिए ड्रोन उपयोग को प्रोत्साहित किया है। रेलवे सुरक्षा बल भी स्टेशन परिसर और रेल यार्ड की सुरक्षा निगरानी में ड्रोन का उपयोग कर रहा है।
आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में ड्रोन बाढ़ और भूस्खलन जैसी परिस्थितियों में त्वरित निगरानी और राहत कार्यों को अधिक प्रभावी बना रहे हैं।
रक्षा क्षेत्र में ड्रोन की भूमिका
ड्रोन सीमाओं की निगरानी, खुफिया जानकारी संग्रह और सटीक हमलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। ऑपरेशन सिन्दूर के दौरान भारतीय ड्रोन ने दुश्मन के ठिकानों को सुरक्षित और सटीक तरीके से नष्ट किया।
नीति सुधार और प्रोत्साहन
ड्रोन नियम 2021 तथा 2022 और 2023 के संशोधनों के माध्यम से प्रक्रियाओं को सरल बनाया गया है। फॉर्मों की संख्या 25 से घटाकर 5 और अनुमोदन आवश्यकताएं 72 से घटाकर 4 कर दी गईं।
भारतीय हवाई क्षेत्र के लगभग 90 प्रतिशत हिस्से को ड्रोन संचालन के लिए हरित क्षेत्र घोषित किया गया है। 500 किलोग्राम तक वजन वाले ड्रोन संचालन की अनुमति दी गई है।
ड्रोन और ड्रोन घटकों के लिए ₹120 करोड़ की उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना लागू है। सितंबर 2025 में ड्रोन पर जीएसटी घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया, जिससे व्यावसायिक और व्यक्तिगत उपयोग को बढ़ावा मिला।
डिजिटल स्काई की उपलब्धियां
9 फरवरी 2026 तक 38,575 ड्रोन सफलतापूर्वक पंजीकृत किए गए हैं। फरवरी 2026 तक 39,890 रिमोट पायलट प्रमाणपत्र जारी किए गए हैं। डीजीसीए द्वारा 244 रिमोट पायलट प्रशिक्षण संगठनों को मंजूरी दी जा चुकी है।
इस तरह भारत का ड्रोन पारिस्थितिकी तंत्र अब एक नवाचार-संचालित और मुख्यधारा का क्षेत्र बन चुका है। प्रगतिशील नीतियों, वित्तीय प्रोत्साहनों और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों के माध्यम से यह क्षेत्र तेज गति से आगे बढ़ रहा है।
कृषि, भूमि सर्वेक्षण, बुनियादी ढांचे की निगरानी, आपदा प्रबंधन और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में ड्रोन का उपयोग शासन की दक्षता, पारदर्शिता और सटीकता को मजबूत कर रहा है। आने वाले समय में स्वदेशी विनिर्माण और कौशल विकास के विस्तार के साथ भारत मानव रहित हवाई प्रणालियों में वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ रहा है।


