कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), एडवांस्ड मटेरियल्स, डिजिटल ट्विन्स और रोबोटिक्स जैसी उभरती हुई तकनीकों (Frontier Technologies) का उपयोग भारत के विनिर्माण क्षेत्र (Manufacturing Sector) को 2035 तक देश की जीडीपी में 25 प्रतिशत से अधिक योगदान देने और 10 करोड़ से ज्यादा रोजगार सृजित करने में सक्षम बना सकता है। यह बात नीति आयोग की एक नई रिपोर्ट में कही गई है।
यह रिपोर्ट ‘Reimagining Manufacturing: India’s Roadmap to Global Leadership in Advanced Manufacturing’ शीर्षक से नीति आयोग के फ्रंटियर टेक हब द्वारा जारी की गई। इसमें AI, मशीन लर्निंग, एडवांस्ड मटेरियल्स, डिजिटल ट्विन्स और रोबोटिक्स को प्रमुख टेक्नोलॉजी सक्षमकर्ता (High-Impact Enablers) के रूप में पहचाना गया है और 13 प्राथमिक विनिर्माण क्षेत्रों में उनके प्रभाव का विस्तृत विश्लेषण किया गया है।
इस रोडमैप का अनावरण महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री अजित पवार, और नीति आयोग के सीईओ बी.वी.आर. सुब्रमण्यम ने किया। रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत 2047 तक “विकसित भारत” के लक्ष्य की दिशा में उन्नत विनिर्माण (Advanced Manufacturing) का वैश्विक केंद्र बन सकता है।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि महाराष्ट्र नीति आयोग का आभारी है, जिसने फ्रंटियर टेक्नोलॉजी से संचालित भारत के विनिर्माण विकास के लिए यह दूरदर्शी रोडमैप तैयार किया है। उन्होंने कहा, “महाराष्ट्र पहला राज्य होगा जो राष्ट्रीय विनिर्माण मिशन के साथ पूरी तरह तालमेल स्थापित करेगा और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग का वैश्विक केंद्र बनेगा।”
नीति आयोग के सीईओ सुब्रमण्यम ने कहा कि भारत की आर्थिक प्रगति उसकी विनिर्माण क्षमता पर निर्भर करती है, लेकिन केवल क्रमिक बदलाव पर्याप्त नहीं है। “यह रोडमैप हमें 2035 तक एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग पॉवरहाउस बनने की समयबद्ध दिशा देता है। फ्रंटियर टेक्नोलॉजी को अपनाकर हम सटीकता, स्थिरता और नवाचार को ‘मेक इन इंडिया’ की पहचान बना सकते हैं,” उन्होंने कहा।
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यदि भारत ने इन उभरती तकनीकों को अपनाने में देरी की, तो देश को 2035 तक 270 अरब डॉलर और 2047 तक 1 ट्रिलियन डॉलर तक की विनिर्माण जीडीपी वृद्धि का नुकसान हो सकता है।
नीति आयोग की डिस्टिंग्विश्ड फेलो देबजानी घोष ने कहा, “अब कार्रवाई का समय बहुत सीमित है। हमें अपने औद्योगिक तंत्र में तकनीक को गहराई से शामिल करना होगा। ऐसा करने से हम न केवल जीडीपी में विनिर्माण का हिस्सा 25 प्रतिशत तक बढ़ा सकते हैं, बल्कि लाखों गुणवत्तापूर्ण नौकरियाँ भी सृजित कर सकते हैं और भारत के कारखानों को नवाचार और राष्ट्रीय शक्ति का प्रतीक बना सकते हैं।”
-(इनपुटःएजेंसी)


