FSSAI ने पान मसाला की पैकेजिंग में कागज, पेपरबोर्ड और सेलुलोज को शामिल करने का प्रस्ताव रखा

भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण यानी FSSAI ने पान मसाला की पैकेजिंग से जुड़े नियमों में बदलाव का प्रस्ताव रखा है। यह प्रस्ताव स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत जारी एक मसौदा अधिसूचना के रूप में सामने आया है, जिसका उद्देश्य खाद्य पैकेजिंग को अधिक सुरक्षित, टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल बनाना है।

मसौदा संशोधन के अनुसार, पान मसाला की पैकेजिंग के लिए अब प्राकृतिक स्रोतों से प्राप्त सामग्री—जैसे कागज, पेपरबोर्ड और सेलुलोज—को भी शामिल करने का प्रस्ताव है। FSSAI का मानना है कि ये सामग्री न केवल खाद्य पैकेजिंग के लिए सुरक्षित हैं, बल्कि उद्योग की बदलती जरूरतों के अनुरूप भी हैं। इसके साथ ही, प्रस्ताव में यह स्पष्ट किया गया है कि इस्तेमाल की जाने वाली सभी पैकेजिंग सामग्री नियामक मानकों के अनुरूप होनी चाहिए, ताकि उत्पाद की गुणवत्ता, सुरक्षा और अखंडता सुनिश्चित की जा सके। वहीं, टिन और कांच जैसे पारंपरिक पैकेजिंग विकल्पों के उपयोग को भी जारी रखने की अनुमति दी गई है, जिससे उद्योग को आवश्यक लचीलापन मिल सके।

मसौदे का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसमें प्लास्टिक मुक्त पैकेजिंग पर जोर दिया गया है। प्रस्ताव के तहत पॉलीएथिलीन, पॉलीप्रोपाइलीन, पॉलिएस्टर, पीवीसी सहित किसी भी प्रकार के सिंथेटिक पॉलिमर, कोपॉलिमर या लैमिनेट के उपयोग पर रोक की बात कही गई है। साथ ही एल्युमिनियम फॉयल और मेटलाइज्ड लेयर को भी प्रतिबंधित करने का प्रस्ताव है। यह कदम प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 के अनुरूप है।

FSSAI का कहना है कि यह पहल खाद्य क्षेत्र में सतत और पर्यावरण अनुकूल प्रथाओं को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। साथ ही, इसमें तकनीकी व्यवहार्यता और उद्योग की आवश्यकताओं को भी ध्यान में रखा गया है।

इस मसौदे पर सभी हितधारकों—विशेषकर उद्योग प्रतिनिधियों—से सुझाव और टिप्पणियां मांगी गई हैं। अधिसूचना के प्रकाशन के 30 दिनों के भीतर अपने विचार साझा किए जा सकते हैं, जिन पर अंतिम निर्णय से पहले विचार किया जाएगा।

FSSAI ने दोहराया है कि वह सभी पक्षों के साथ मिलकर ऐसे नियम बनाने के लिए प्रतिबद्ध है, जो वैज्ञानिक आधार पर टिके हों और एक स्थिर तथा प्रगतिशील कारोबारी वातावरण को बढ़ावा दें।