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गति शक्ति कार्गो टर्मिनल: भारत की लॉजिस्टिक्स क्रांति की नई रफ्तार

भारत के लॉजिस्टिक्स सेक्टर ने हाल के वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति की है। आज भारत की लॉजिस्टिक्स लागत घटकर GDP के 7.97% तक आ गई है। यह उपलब्धि निरंतर किए गए सुधारों और एकीकृत योजना का परिणाम है। इससे यह स्पष्ट होता है कि इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट और डिजिटल इंटीग्रेशन ने लॉजिस्टिक्स सेक्टर को अधिक कुशल, प्रतिस्पर्धी और भविष्य के लिए तैयार बनाया है।

इस बदलाव के केंद्र में PM Gati Shakti National Master Plan है, जिसने रेलवे, हाईवे, पोर्ट और एयरपोर्ट को एक साझा ढांचे में जोड़ा है। यह योजना मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी को मजबूत करने, Ease of Doing Business और Make in India जैसी पहलों को समर्थन देने और संतुलित क्षेत्रीय विकास सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई है।

Gati Shakti Cargo Terminals (GCTs) इसी विज़न का मुख्य स्तंभ हैं, जो भारत को वैश्विक व्यापार केंद्र के रूप में मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

गति शक्ति कार्गो टर्मिनल क्या हैं

रेलवे कार्गो टर्मिनल वह स्थान होता है जहां माल को ट्रेन में लोड-अनलोड किया जाता है और अन्य परिवहन माध्यमों से जोड़ा जाता है। पहले भारत में मल्टी-मॉडल हब की कमी के कारण सड़क, रेल और पोर्ट के बीच समन्वय नहीं था, जिससे देरी, अधिक लागत और भीड़भाड़ जैसी समस्याएं आती थीं।

इसी कमी को दूर करने के लिए Gati Shakti Multi-Modal Cargo Terminals (GCTs) विकसित किए जा रहे हैं, जिन्हें रेल मंत्रालय की GCT Policy, 2021 के तहत स्थापित किया जा रहा है। ये आधुनिक कार्गो टर्मिनल रेल को सड़क, पोर्ट और अन्य परिवहन माध्यमों से जोड़ते हैं।

GCTs में Engine-On-Load (EOL) प्रणाली लागू की गई है, जिसमें इंजन लोडिंग और अनलोडिंग के दौरान वहीं खड़ा रहता है। निर्धारित मुफ्त समय के भीतर रेलवे के खर्च पर इंजन इंतजार करता है ताकि काम पूरा होते ही ट्रेन तुरंत रवाना हो सके। इससे समय की बचत होती है और रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर का बेहतर उपयोग होता है।

इन टर्मिनलों में आधुनिक मशीनों, मेकेनाइज्ड लोडिंग सिस्टम और साइलो जैसी सुविधाएं हैं, जिससे माल हैंडलिंग का समय काफी कम हो जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य रेलवे की कुल माल ढुलाई में हिस्सेदारी बढ़ाना है, क्योंकि रेल परिवहन सड़क की तुलना में अधिक ऊर्जा-कुशल, कम खर्चीला और पर्यावरण के लिए बेहतर है। रेल से कार्गो ट्रांसपोर्ट करने पर कार्बन उत्सर्जन लगभग 90% कम होता है, जिससे भारत की लॉजिस्टिक्स लागत कम होती है और पर्यावरणीय लक्ष्यों को पूरा करने में मदद मिलती है।

कार्गो टर्मिनल भारत के लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम को मजबूत करने वाले रणनीतिक केंद्र हैं। इनका डिज़ाइन आसान कनेक्टिविटी, निजी भागीदारी और सरल प्रक्रियाओं पर आधारित है, ताकि संतुलित क्षेत्रीय विकास हो सके।

GCTs के प्रमुख उद्देश्य

  • रेलवे को सड़क, पोर्ट और एयरपोर्ट से जोड़कर मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी को बढ़ावा देना।
  • निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित कर क्षमता और नवाचार को बढ़ाना।
  • परियोजनाओं की मंजूरी प्रक्रिया को सरल बनाना और समयबद्ध क्लियरेंस सुनिश्चित करना।
  • Ease of Doing Business, Make in India और Atmanirbhar Bharat जैसी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को समर्थन देना।
  • विभिन्न राज्यों में GCT स्थान तय कर संतुलित क्षेत्रीय विकास और समावेशी वृद्धि सुनिश्चित करना।

गति शक्ति कार्गो टर्मिनल नीति, 2021

रेल मंत्रालय द्वारा 15 दिसंबर 2021 को लागू की गई इस नीति का उद्देश्य आधुनिक कार्गो टर्मिनलों का तेज़ी से विकास करना, मौजूदा सुविधाओं को अपग्रेड करना और भारत के फ्रेट इकोसिस्टम को मजबूत बनाना है।

इसके प्रमुख प्रावधान हैं:

  • विभागीय शुल्क, भूमि लाइसेंस शुल्क और कमर्शियल स्टाफ लागत में छूट।
  • रेलवे द्वारा सर्विंग स्टेशनों पर कॉमन-यूज़र ट्रैफिक सुविधाओं का निर्माण और रखरखाव।
  • 1 मिलियन टन या उससे अधिक माल ढुलाई करने वाले टर्मिनलों को 10% फ्रेट रिबेट।
  • रेलवे द्वारा ट्रैक, सिग्नलिंग और OHE (ओवरहेड इक्विपमेंट) का रखरखाव।
  • रेलवे भूमि का व्यावसायिक उपयोग।

लॉजिस्टिक्स में रुकावटें कम करना, टर्नअराउंड टाइम सुधारना और भारत को वैश्विक लॉजिस्टिक्स हब बनाना।

अब तक की प्रगति

  • GCTs ने विज़न से निकलकर वास्तविक परिणाम दिखाने शुरू कर दिए हैं।
  • 306 GCTs को मंजूरी, जिनमें 118 चालू।
  • 118 चालू टर्मिनलों की संयुक्त क्षमता 192 मिलियन टन प्रति वर्ष।
  • GCT नीति के तहत अब तक लगभग ₹8,600 करोड़ का निजी निवेश।
  • रेलवे बोर्ड द्वारा जारी मास्टर सर्कुलर 2022 के जरिए विस्तृत दिशा-निर्देश।
  • रेल सड़क से सस्ता और पर्यावरण-अनुकूल होने के कारण, 2014 से अब तक 2,672 मिलियन टन माल रेल पर शिफ्ट, जिससे 143.3 मिलियन टन CO₂ की बचत।
  • मंजूरी मिलने के 24 महीनों के भीतर निर्माण पूरा करना अनिवार्य।
  • 2022–23 से 2024–25 के बीच फ्रेट रेवेन्यू चार गुना बढ़ा।

लॉजिस्टिक्स विकास को गति देने वाले प्रमुख GCTs

मानेसर (हरियाणा)

Maruti Suzuki के मानेसर प्लांट पर स्थित देश का सबसे बड़ा ऑटोमोबाइल GCT। यह 46 एकड़ में फैला है, 8.2 किमी लंबे ट्रैक नेटवर्क से लैस है और सालाना 4.5 लाख वाहनों की हैंडलिंग क्षमता रखता है।

नॉर्थ-ईस्ट टर्मिनल (असम)

Moinarband और Cinnamara GCTs कोयला, खाद्यान्न, सीमेंट, पेट्रोलियम, उर्वरक और अन्य सामान्य माल की ढुलाई करते हैं। इससे नॉर्थ-ईस्ट की कनेक्टिविटी मजबूत हुई है और लागत कम हुई है।

न्यू संजाली (गुजरात)

Western Dedicated Freight Corridor पर स्थित यह पहला निजी भूमि पर बना GCT है, जो हाई-स्पीड और ग्रीन लॉजिस्टिक्स को बढ़ावा देता है।

आगे की दिशा

अधिक निजी निवेश को प्रोत्साहित करना।

उद्योग की मांग के आधार पर नए GCT स्थानों की पहचान।

Gati Shakti प्लेटफॉर्म के जरिए डिजिटल ट्रैकिंग और रियल-टाइम मॉनिटरिंग।

भारत को वैश्विक लॉजिस्टिक्स हब बनाना।

Gati Shakti Cargo Terminals भारत की लॉजिस्टिक्स व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम हैं। यह पहल न केवल लागत कम कर रही है, बल्कि भारत को तेज, सस्ता और पर्यावरण-अनुकूल लॉजिस्टिक्स सिस्टम की ओर ले जा रही है। आने वाले समय में GCTs भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धा को और मजबूत करेंगे।

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