केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने बुधवार को कहा कि जियोस्पेशियल तकनीकें भारत की विकास यात्रा का एक मजबूत आधार हैं और सरकार इन्हें विकसित भारत के लक्ष्य के लिए एक राष्ट्रीय संपत्ति के रूप में इस्तेमाल कर रही है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने “जियोस्पेशियल इकोसिस्टम को मजबूत करना – जियोस्पेशियल मिशन: विकसित भारत का सक्षमकर्ता” विषय पर आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला को वीडियो संदेश के जरिए संबोधित करते हुए कहा कि पिछले एक दशक में भारत के जियोस्पेशियल क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। उन्होंने कहा कि इस दौरान नीति का रुख नियंत्रण से सशक्तिकरण की ओर गया है।

मंत्री ने कहा कि जियोस्पेशियल जानकारी अब बुनियादी ढांचा, कृषि, रक्षा, शहरी विकास, जलवायु कार्रवाई और आपदा प्रबंधन जैसे कई क्षेत्रों में योजना बनाने, काम को लागू करने और सेवाएं पहुंचाने में अहम भूमिका निभा रही है।

उन्होंने 2021 के जियोस्पेशियल उदारीकरण सुधारों और इसके बाद लागू की गई राष्ट्रीय जियोस्पेशियल नीति 2022 का जिक्र करते हुए कहा कि इन कदमों से उच्च गुणवत्ता वाले जियोस्पेशियल डेटा तक पहुंच आसान हुई है। इससे नवाचार को बढ़ावा मिला है, उद्योग की भागीदारी मजबूत हुई है और विभिन्न क्षेत्रों में जियोस्पेशियल तकनीक का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है।

इस दिशा में आगे बढ़ते हुए सरकार ने राष्ट्रीय जियोस्पेशियल मिशन की शुरुआत की है, जो पूरे सरकारी तंत्र से जुड़ी एक परिवर्तनकारी पहल है। इसका उद्देश्य विकसित भारत 2047 के विजन के अनुरूप एक आधुनिक, सटीक और आसानी से उपलब्ध राष्ट्रीय जियोस्पेशियल ढांचा तैयार करना है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि स्मार्ट सिटी, सड़क और रेल बुनियादी ढांचा, प्रिसीजन एग्रीकल्चर, लॉजिस्टिक्स का अनुकूलन, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, आपदा जोखिम में कमी, जलवायु कार्रवाई और अगली पीढ़ी की रक्षा तैयारियां—ये सभी भविष्य में भरोसेमंद और मजबूत जियोस्पेशियल डेटा पर अधिक निर्भर होंगी।

कार्यक्रम में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव प्रो. अभय करंदीकर ने कहा कि जियोस्पेशियल गाइडलाइंस 2021 और राष्ट्रीय जियोस्पेशियल नीति 2022 ने नवाचार आधारित इकोसिस्टम तैयार किया है।

उन्होंने बताया कि आने वाला राष्ट्रीय जियोस्पेशियल मिशन जियोडेटिक आधुनिकीकरण, विभिन्न प्रणालियों के बीच तालमेल, जियो-आईसीटी इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग जैसी उभरती तकनीकों के एकीकरण, अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देने और कुशल जियोस्पेशियल कार्यबल तैयार करने पर केंद्रित होगा।

-(इनपुटःएजेंसी)

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