गिरिराज सिंह ने आईआईटी दिल्ली में हैंडलूम टेक्नोलॉजी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का किया उद्घाटन

केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह ने सोमवार को आईआईटी दिल्ली में हैंडलूम टेक्नोलॉजी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE-HT) का उद्घाटन किया। यह केंद्र प्रौद्योगिकी, नवाचार और शोध के माध्यम से भारत के हथकरघा क्षेत्र के आधुनिकीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। इस अवसर पर भारत के हैंडलूम क्षेत्र में नवाचार, टिकाऊपन और डिजिटल परिवर्तन को गति देने वाली पांच प्रमुख पहलों की भी शुरुआत की गई।

तकनीक और विरासत के संगम पर जोर

गिरिराज सिंह ने कहा कि सेंटर ऑफ एक्सीलेंस सरकार की उस दृष्टि का प्रतिनिधित्व करता है, जिसमें भारत की समृद्ध बुनाई विरासत को अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी के साथ जोड़कर भविष्य के लिए तैयार हैंडलूम पारिस्थितिकी तंत्र विकसित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि नवाचार, डिजिटल तकनीक, टिकाऊपन और उद्यमशीलता बुनकरों की उत्पादकता बढ़ाने, बाजार तक पहुंच मजबूत करने और उनकी आजीविका सुरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

अकादमी, उद्योग और सरकार के बीच सहयोग जरूरी

वस्त्र मंत्रालय की सचिव नीलम शामी राव ने हैंडलूम क्षेत्र के लिए व्यावहारिक तकनीकी समाधान विकसित करने के लिए अकादमी, उद्योग और सरकारी संस्थानों के बीच मजबूत सहयोग की जरूरत पर जोर दिया।

शोध और कौशल विकास का केंद्र बनेगा सीओई

विकास आयुक्त (हैंडलूम) डॉ. एम. बीना ने कहा कि यह सेंटर शोध, ज्ञान साझा करने, कौशल विकास और नवाचार के लिए उत्प्रेरक के रूप में काम करेगा। इससे बुनकरों, डिजाइनरों, उद्यमियों और स्टार्टअप्स के लिए नए अवसर तैयार होंगे।

हैंडलूम 4.0 से डिजिटल निगरानी

कार्यक्रम में हैंडलूम 4.0 मोबाइल ऐप की शुरुआत की गई। इसके जरिए करघे की उत्पादकता, गुणवत्ता, रखरखाव और टिकाऊपन की डिजिटल निगरानी संभव होगी। इसका उद्देश्य उत्पादन प्रक्रियाओं में तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ाकर बुनकरों की दक्षता में सुधार करना है।

हैंडलूम e-विद्या से डिजिटल लर्निंग

हैंडलूम e-विद्या को हैंडलूम पारिस्थितिकी तंत्र में क्षमता निर्माण के लिए डिजिटल लर्निंग और नॉलेज प्लेटफॉर्म के रूप में शुरू किया गया। इसके माध्यम से क्षेत्र से जुड़े लोगों को प्रशिक्षण और ज्ञान संसाधन उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाएगा।

पारंपरिक हैंडलूम को टेक्नोलॉजी से जोड़ेगा HandloomX

HandloomX को एक्सेलेरेटर और इनक्यूबेशन प्लेटफॉर्म के तौर पर शुरू किया गया है। यह वस्त्र मंत्रालय की 5F वैल्यू चेन में काम करने वाले स्टार्टअप्स और नवोन्मेषकों को समर्थन देगा तथा हैंडलूम क्षेत्र में तकनीक आधारित नए समाधान विकसित करने में मदद करेगा।

GenZ उपभोक्ताओं को जोड़ेगा कलागृह स्टूडियो

कलागृह हैंडलूम स्टूडियो (GenZ डिजाइन स्टूडियो) डिजिटल तकनीकों के जरिए प्रामाणिक हैंडलूम उत्पादों को समकालीन उपभोक्ताओं से जोड़ने पर केंद्रित है। इसमें कस्टमाइजेशन और विजुअलाइजेशन के जरिए नई पीढ़ी के ग्राहकों के लिए हैंडलूम उत्पादों को अधिक आकर्षक बनाने का प्रयास किया जाएगा।

रक्षा वस्त्रों के पुनर्चक्रण से प्रीमियम फैब्रिक

‘थ्रेड्स ऑफ वलर’ स्थिरता आधारित पहल है, जिसके तहत वैज्ञानिक तरीके से रिसाइकिल किए गए रक्षा वस्त्रों को कुशल शिल्प तकनीकों के माध्यम से प्रीमियम हैंडलूम फैब्रिक्स में बदलने का प्रयास किया जाएगा। इससे पुनर्चक्रण और हस्तशिल्प के बीच तालमेल स्थापित करने पर जोर है।

एआई और टिकाऊ तकनीकों पर शोध

सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में करघा आधुनिकीकरण, श्रमिक एर्गोनॉमिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, टिकाऊपन, कार्यात्मक नवाचार और डिजिटल तकनीकों से जुड़े क्षेत्रों में शोध किया जाएगा। केंद्र हैंडलूम ज्ञान का राष्ट्रीय रिपॉजिटरी विकसित करने, एआई-सक्षम उपकरण तैयार करने और तकनीक हस्तांतरण में सहयोग करेगा।

पांच वर्षों में 1,000 से अधिक लोगों को प्रशिक्षण

केंद्र स्टार्टअप्स को भी समर्थन देगा। अगले पांच वर्षों में कम से कम 1,000 बुनकरों, संकाय सदस्यों और हैंडलूम पेशेवरों को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा गया है। इसका उद्देश्य आधुनिक तकनीक और कौशल को हैंडलूम क्षेत्र के व्यापक नेटवर्क तक पहुंचाना है।

भारतीय हैंडलूम को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने की पहल

सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना भारत की समृद्ध हैंडलूम विरासत को संरक्षित करने के साथ-साथ इस क्षेत्र को उन्नत तकनीक, शोध क्षमता और नवाचार आधारित समाधान उपलब्ध कराने की सरकार की प्रतिबद्धता को मजबूत करती है। अकादमी, उद्योग, स्टार्टअप्स और हैंडलूम संस्थानों को एक मंच पर लाकर यह केंद्र पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने और भारतीय हैंडलूम को वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने में योगदान देगा। (इनपुट: पीआईबी)