विकसित भारत के लिए एआई समाधानों पर मंथन, मोहाली में आयोजित हुआ गवर्नेंस समिट 2026

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस ने 23 मई 2026 को मोहाली स्थित आईएसबी परिसर में “गवर्नेंस समिट 2026 : विकसित भारत के लिए समावेशी कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई)” सम्मेलन का आयोजन किया। एक दिवसीय इस सम्मेलन में डिजिटल वाणिज्य, सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवा और शासन के लिए एआई आधारित समाधानों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया। यह सम्मेलन आईएसबी के भारती इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक पॉलिसी द्वारा आयोजित किया गया। सम्मेलन का उद्देश्य भारत के ‘विकसित भारत दृष्टिकोण’ के तहत समावेशी और प्रभावी एआई प्रणाली विकसित करने पर विभिन्न हितधारकों को एक मंच पर लाना था।

एआई को बताया परिवर्तनकारी अवसर

सम्मेलन के चौथे संस्करण का उद्घाटन भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि सरकार ऐसी एआई प्रणालियों के विकास के लिए प्रतिबद्ध है, जो डिजिटल अर्थव्यवस्था के हाशिये पर रहने वाले लोगों सहित हर नागरिक की सेवा कर सकें। उन्होंने कहा, “कृत्रिम बुद्धिमत्ता भारत को उत्पादकता बढ़ाने, शासन में सुधार करने और स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, विनिर्माण तथा वित्तीय समावेशन जैसे क्षेत्रों में पहुंच का विस्तार करने का परिवर्तनकारी अवसर प्रदान करती है।”

रोजगार और समावेश पर भी चर्चा

एस. कृष्णन ने कहा कि कौशल आधारित नौकरियों पर एआई के प्रभाव को लेकर चिंताएं स्वाभाविक हैं, लेकिन भारत समावेशी विकास के लिए इस तकनीक का लाभ उठाने की विशिष्ट क्षमता रखता है। दिनभर चले कार्यक्रम में चार विषयगत पैनल चर्चाएं आयोजित की गईं। इनमें डिजिटल वाणिज्य में एआई की भूमिका, महिलाओं और बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और वहनीयता, रोजगार सृजन तथा डिजिटल उद्यमिता जैसे विषय शामिल रहे।

अंतिम छोर तक सेवा पहुंचाने पर जोर

सम्मेलन के दौरान एक गोलमेज बैठक भी आयोजित की गई, जिसमें राज्य सरकारों से लेकर ग्राम पंचायत स्तर तक सार्वजनिक सेवाओं के वितरण में एआई की संचालन क्षमता पर चर्चा हुई। अश्विनी छत्रे, जो भारती इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक पॉलिसी के एसोसिएट प्रोफेसर और कार्यकारी निदेशक हैं, ने अपने उद्घाटन भाषण में कहा कि एआई की महत्वाकांक्षाओं को व्यावहारिक शासन ढांचे में बदलने की जरूरत है। उन्होंने कहा, “एआई को अगली पीढ़ी के भविष्य को आकार देने वाले दीर्घकालिक राष्ट्रीय मिशन के रूप में देखा जाना चाहिए।” उन्होंने असमानता, तेजी से विकास के अवसर और रोजगार के भविष्य को उभरते एआई परिदृश्य के प्रमुख आयाम बताया।

उद्योग और सरकारी संस्थानों की भागीदारी

सम्मेलन में वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, शिक्षाविदों और विभिन्न संगठनों के विशेषज्ञों ने भाग लिया। इसमें रिलायंस रिटेल, मास्टरकार्ड, अपोलो हॉस्पिटल्स, आईआईटी मद्रास, यूनिसेफ इंडिया और पंजाब पुलिस सहित कई केंद्रीय और राज्य सरकारी मंत्रालयों ने हिस्सा लिया। सम्मेलन में इस बात पर मंथन किया गया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग किस प्रकार समावेशी विकास, बेहतर शासन और भारत के विकास एजेंडे को गति देने के लिए किया जा सकता है। (इनपुट: पीआईबी)