सरकार ने घोषित किया ‘राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार 2025’, नवाचार और शोध को मिला प्रोत्साहन

भारत के वैज्ञानिक समुदाय को बड़ा सम्मान मिला जब सरकार ने राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार (Rashtriya Vigyan Puraskar – RVP) 2025 की सूची जारी की। इसमें 24 प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों और एक शोध टीम को विज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया है।

यह पुरस्कार सरकार के ‘विकसित भारत’ (Viksit Bharat) के विज़न को दर्शाता है — एक ऐसा भारत जो विज्ञान, नवाचार और वैज्ञानिक सोच की शक्ति से आगे बढ़े।

सबसे बड़ा सम्मान ‘विज्ञान रत्न’ (Vigyan Ratna) है, जो देश का सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार है विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में। इसे 2023 में शुरू किया गया था और पहली बार 2024 में डॉ. गोविंदराजन पद्मनाभन को दिया गया था, जो एक प्रसिद्ध बायोकेमिस्ट हैं। उन्होंने मलेरिया परजीवी (Plasmodium falciparum) पर अपने शोध से दवा-प्रतिरोध (drug resistance) की समझ को आगे बढ़ाया और वैश्विक स्तर पर एंटी-मलेरियल रणनीतियों को प्रेरित किया।

यह पुरस्कार हर साल राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस (National Space Day) पर, यानी 23 अगस्त को दिया जाता है। इसे भारत रत्न के समान प्रतिष्ठा वाला माना जाता है, लेकिन यह केवल आजीवन वैज्ञानिक उत्कृष्टता के लिए समर्पित है।

इसके अलावा तीन और श्रेणियाँ हैं:

  • विज्ञान श्री (Vigyan Shri): आठ वरिष्ठ वैज्ञानिकों को यह सम्मान दिया गया, जिन्होंने क्वांटम मटीरियल से लेकर सतत कृषि (sustainable agriculture) तक के क्षेत्रों में प्रभावशाली कार्य किया।

  • विज्ञान युवा–शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार (Vigyan Yuva–SS Bhatnagar Award): 14 युवा और मिड-कैरियर वैज्ञानिकों (45 वर्ष से कम आयु) को दिया गया। यह प्रसिद्ध भटनागर पुरस्कार का नया रूप है, जो भारत के अगले वैज्ञानिक नेताओं को प्रोत्साहित करने के लिए बनाया गया है।

  • विज्ञान टीम पुरस्कार (Vigyan Team Award): यह पुरस्कार सीएसआईआर अरोमा मिशन (CSIR Aroma Mission) को मिला। इस मिशन ने 60,000 हेक्टेयर भूमि पर सुगंधित फसलों (लैवेंडर, रोजमेरी, लेमनग्रास) की खेती को बढ़ावा दिया, जिससे 26 राज्यों के 50,000 से अधिक किसानों को लाभ हुआ और 2017 से अब तक ₹1,200 करोड़ की ग्रामीण आय उत्पन्न हुई।

विज्ञान श्री विजेताओं में एक जलवायु विशेषज्ञ शामिल हैं, जिन्होंने एआई-आधारित मानसून पूर्वानुमान से ओडिशा में 18% फसल हानि घटाई है। वहीं, एक मटीरियल वैज्ञानिक ने कृषि अपशिष्ट से बायोडिग्रेडेबल पॉलिमर तैयार किया है, जिसे अब मेडिकल इम्प्लांट के लिए उपयोग किया जा रहा है।

युवा पुरस्कार पाने वालों में एक 38 वर्षीय खगोल भौतिक विज्ञानी हैं, जो पुणे के जायंट मीटरवेव रेडियो टेलीस्कोप पर फास्ट रेडियो बर्स्ट्स का अध्ययन कर रहे हैं, और एक 41 वर्षीय बायोटेक्नोलॉजिस्ट, जिन्होंने नमक-सहिष्णु धान की किस्में विकसित की हैं जो अब तमिलनाडु के तटीय क्षेत्रों में परीक्षण के चरण में हैं।

यह पुरस्कार योजना 2023 में शुरू की गई थी, ताकि पहले से मौजूद 16 अलग-अलग विज्ञान पुरस्कारों को एक पारदर्शी प्रणाली में जोड़ा जा सके।

सभी नामांकन 300 सदस्यीय चयन समिति द्वारा जांचे जाते हैं, जिसकी अध्यक्षता भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार अजय कुमार सूद करते हैं।

ध्यान देने योग्य बात यह है कि इस पुरस्कार में कोई नकद राशि नहीं दी जाती, बल्कि एक सनद, प्रशस्ति पत्र और पंचधातु का मेडल दिया जाता है, जो पांच तत्वों की एकता का प्रतीक है।

पुरस्कारों का वितरण राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा राष्ट्रीय विज्ञान दिवस (28 फरवरी 2026) को राष्ट्रपति भवन में किया जाएगा।

भारत जब 2047 तक $1 ट्रिलियन शोध अर्थव्यवस्था का लक्ष्य रख रहा है, तब यह पुरस्कार न सिर्फ पिछली उपलब्धियों का सम्मान करते हैं बल्कि यह संकल्प भी जताते हैं कि विज्ञान को राष्ट्र के विकास का केंद्र बनाया जाएगा।

आईएएनएस