डीपफेक पर सरकार सख्त, AI जनित फर्जी कंटेंट हटाने के लिए कड़े नियम लागू

केंद्र सरकार ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से तैयार किए जाने वाले डीपफेक और अन्य फर्जी डिजिटल कंटेंट से निपटने के लिए कानूनी और नियामकीय ढांचे को और मजबूत किया है। सरकार ने कहा कि नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जवाबदेही बढ़ाने और अवैध AI-जनित सामग्री पर त्वरित कार्रवाई के लिए कई अहम कदम उठाए गए हैं।

सरकार के अनुसार, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000, भारतीय न्याय संहिता, 2023 और सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश एवं डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 के तहत डीपफेक, पहचान की चोरी, प्रतिरूपण, निजता के उल्लंघन और अन्य अवैध AI-जनित सामग्री के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान है।

सरकार ने बताया कि 10 फरवरी 2026 को आईटी नियमों में संशोधन कर AI से तैयार सामग्री के लिए स्पष्ट लेबलिंग और ट्रेसेबल मेटाडाटा अनिवार्य किया गया है। साथ ही, अदालत या सरकार के आदेश के बाद अवैध कंटेंट हटाने की समयसीमा 36 घंटे से घटाकर 3 घंटे कर दी गई है। संवेदनशील मामलों में शिकायतों के निस्तारण की समयसीमा भी कम की गई है।

नए नियमों के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और अन्य मध्यस्थों को ऐसे तकनीकी उपाय अपनाने होंगे, जिनसे कानून का उल्लंघन करने वाली AI-जनित सामग्री की पहचान कर उसे रोका जा सके। नियमों का पालन नहीं करने पर प्लेटफॉर्म आईटी अधिनियम की धारा 79 के तहत मिलने वाली कानूनी सुरक्षा खो सकते हैं।

सरकार ने बताया कि इंडियाAI मिशन के तहत डीपफेक पहचान से जुड़ी 13 जिम्मेदार AI परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इनमें आईआईटी जोधपुर और आईआईटी मद्रास का ‘साक्ष्य’ फ्रेमवर्क, AI विश्लेषक तथा आईआईटी खड़गपुर की रियल-टाइम वॉयस डीपफेक डिटेक्शन सिस्टम जैसी परियोजनाएं शामिल हैं।

साइबर सुरक्षा जागरूकता बढ़ाने के लिए सरकार ने अब तक 6,650 कार्यशालाएं आयोजित की हैं, जिनसे 11.37 लाख से अधिक लोग लाभान्वित हुए हैं। इसके अलावा हैंडबुक, वीडियो, पोस्टर और अन्य जागरूकता सामग्री भी विभिन्न माध्यमों से प्रसारित की जा रही है।

-(इनपुटःपीआईबी)