आतंकवाद पीड़ित परिवारों को सरकारी नौकरी न्याय और पुनर्वास की दिशा में नया अध्याय : एलजी सिन्हा

जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने बुधवार को कहा कि आतंकवादी हमलों में मारे गए नागरिकों के परिजनों को सरकारी नौकरी देना केंद्रशासित प्रदेश में न्याय, पुनर्वास और सम्मानजनक आजीविका सुनिश्चित करने की दिशा में एक नया अध्याय है। श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर (एसकेआईसीसी) में आयोजित कार्यक्रम में आतंकवादी हिंसा में मारे गए नागरिकों के परिजनों को नियुक्ति पत्र सौंपे गए।

प्रभावित परिवारों को न्याय और सम्मान दिलाना सरकार की प्राथमिकता

उपराज्यपाल ने कहा कि आतंकवादी हिंसा में मारे गए नागरिकों के परिजनों को सरकारी नौकरी देने का फैसला प्रभावित परिवारों को न्याय, पुनर्वास और सम्मानजनक आजीविका उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने दोहराया कि जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी हिंसा के शिकार हर पात्र परिवार को प्रशासन की ओर से उचित सहयोग दिया जाएगा।

पीड़ित परिवारों में उम्मीद और वित्तीय सुरक्षा बहाल करने की पहल

सिन्हा ने इस पहल को ऐतिहासिक मानवीय कदम बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य उन परिवारों में उम्मीद, सम्मान और वित्तीय सुरक्षा की भावना फिर से जगाना है, जिन्होंने आतंकवाद के कारण वर्षों तक पीड़ा और अनिश्चितता का सामना किया है। उन्होंने कहा कि किसी प्रियजन को खोने की भरपाई कोई नौकरी या वित्तीय सहायता नहीं कर सकती, लेकिन आतंकवादी हिंसा से तबाह हुए परिवारों के साथ मजबूती से खड़ा होना सरकार की संवैधानिक, नैतिक और मानवीय जिम्मेदारी है।

‘हर पात्र परिवार को न्याय और पुनर्वास का अवसर मिलेगा’

उपराज्यपाल ने कहा, “हमारी प्रतिबद्धता अटूट है। आतंकवाद से प्रभावित हर पात्र परिवार को न्याय, पुनर्वास और सम्मान के साथ अपना जीवन फिर से शुरू करने का अवसर मिलेगा। जिन लोगों को हमने खो दिया है, उनकी जगह कोई मुआवजा नहीं ले सकता, लेकिन प्रशासन यह सुनिश्चित करने के लिए हर संभव सहायता देना जारी रखेगा कि ये परिवार पीछे न छूटें।”

आतंकवाद के तंत्र को खत्म करने के लिए समन्वित प्रयास

आतंकवाद के खिलाफ प्रशासन के सख्त रुख को दोहराते हुए एलजी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर पुलिस, भारतीय सेना, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) और नागरिक प्रशासन के समन्वित प्रयासों से आतंकवाद के तंत्र को खत्म करने और केंद्रशासित प्रदेश में स्थायी शांति स्थापित करने का काम जारी है।

आतंकवाद को हराना सामूहिक जिम्मेदारी

उन्होंने कहा कि आतंकवाद को पूरी तरह खत्म करना केवल सुरक्षा एजेंसियों और सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि शांति, स्थिरता और विकास के लिए प्रतिबद्ध प्रत्येक नागरिक का सामूहिक कर्तव्य भी है।

5 अगस्त 2019 को बताया ऐतिहासिक मोड़

5 अगस्त 2019 के संवैधानिक बदलावों का उल्लेख करते हुए सिन्हा ने इसे ऐतिहासिक मोड़ बताया। उन्होंने कहा कि इन बदलावों ने दशकों के भेदभाव को खत्म किया और जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए समान संवैधानिक अधिकार सुनिश्चित किए।

890 से अधिक केंद्रीय कानूनों के लागू होने का जिक्र

उन्होंने कहा कि 890 से अधिक केंद्रीय कानूनों को लागू किए जाने से पूरे केंद्रशासित प्रदेश में शासन-व्यवस्था, पारदर्शिता, जवाबदेही और समान अवसरों को मजबूती मिली है। 5 अगस्त 2019 को संसद में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के भाषण का उल्लेख करते हुए सिन्हा ने कहा कि पिछले कुछ दशकों में आतंकवाद के कारण 41,000 से अधिक लोगों की जान गई है। उन्होंने कहा कि संवैधानिक सुधारों ने लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने के साथ नागरिकों के लिए कानूनी सुरक्षा भी बढ़ाई है।

दशकों के इंतजार के बाद पीड़ित परिवारों को राहत

सिन्हा ने कहा कि आतंकवाद से पीड़ित कई परिवारों को दशकों के इंतजार के बाद आखिरकार राहत मिली है। उन्होंने शोपियां के वली मोहम्मद वानी का उदाहरण देते हुए कहा कि उनके परिवार को उनकी हत्या के 33 साल बाद न्याय मिला। वहीं, कुपवाड़ा के अब्दुल हामिद भट और त्राल के फारूक अहमद मीर के परिवारों को दो दशक से अधिक समय के बाद सरकारी नौकरी मिली।

जमीन और संपत्ति लौटाने की कार्रवाई भी जारी

उपराज्यपाल ने कहा कि आतंकवाद से पीड़ित कई परिवारों की जमीन और संपत्ति भी वापस दिलाई गई है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सभी लंबित और सही मामलों की जांच सहानुभूति, निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ की जा रही है, ताकि हकदार लोगों को समय पर न्याय मिल सके।

पारदर्शी और मेरिट आधारित भर्ती व्यवस्था

एलजी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में शासन-व्यवस्था में बड़ा बदलाव आया है। अब भर्ती प्रक्रिया और सरकारी सेवाएं पारदर्शी एवं मेरिट आधारित व्यवस्था के तहत संचालित की जा रही हैं, जिससे लोगों का भरोसा और संस्थाओं की विश्वसनीयता बढ़ी है।

युवाओं को सहानुभूति नहीं, अवसर चाहिए

सिन्हा ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के युवा सहानुभूति नहीं, बल्कि अवसर चाहते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा, उद्यमिता, नवाचार, खेल और अन्य क्षेत्रों में देश के बाकी युवाओं के साथ आगे बढ़ने का उनके पास हुनर और जज्बा है।

समय पर पूरे हो रहे शैक्षणिक सत्र

कुपवाड़ा के एक छात्र के साथ हुई बातचीत का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पहले जो अकादमिक सत्र लंबे समय तक रुकावटों के कारण सात साल तक खिंच जाते थे, वे अब निर्धारित समय पर पूरे हो रहे हैं। उन्होंने इसे बेहतर शासन, स्थिरता और अच्छे शैक्षिक माहौल का संकेत बताया।

सड़क, सुरंग और स्वास्थ्य ढांचे का विस्तार

उपराज्यपाल ने कहा कि हाल के वर्षों में जम्मू-कश्मीर में सड़क कनेक्टिविटी, सुरंग इंफ्रास्ट्रक्चर, हवाई अड्डों, शिक्षण संस्थानों और स्वास्थ्य सुविधाओं का अभूतपूर्व विस्तार हुआ है। इससे निवेश, रोजगार और आर्थिक विकास के नए अवसर पैदा हुए हैं।

कानून के शासन पर आधारित समाज बनाने की प्रतिबद्धता

उन्होंने दोहराया कि प्रशासन कानून के शासन पर आधारित समाज बनाने के लिए प्रतिबद्ध है, जहां न्याय, शांति, लोकतांत्रिक मूल्य और समान अवसर दीर्घकालिक स्थिरता एवं समृद्धि की नींव बनें।

शहीद सुरक्षाकर्मियों को दी श्रद्धांजलि

आतंकवाद से लड़ते हुए जान गंवाने वाले जम्मू-कश्मीर पुलिस, भारतीय सेना और सीआरपीएफ के बहादुर जवानों को श्रद्धांजलि देते हुए एलजी ने कहा कि उनका साहस, समर्पण और सर्वोच्च बलिदान शांतिपूर्ण, सुरक्षित और समृद्ध जम्मू-कश्मीर बनाने के सामूहिक संकल्प को प्रेरित करता रहेगा।

‘आतंकवाद का काला अध्याय कभी वापस न आए’

सिन्हा ने कहा, “न्याय में लोगों का भरोसा मजबूत हुआ है। हमारी प्रतिबद्धता यह सुनिश्चित करना है कि आतंकवाद के काले अध्याय कभी वापस न आएं और हर नागरिक सम्मान, सुरक्षा और उम्मीद के साथ आगे बढ़े।” (इनपुट: आईएएनएस)