केंद्र सरकार ने प्राइमरी हेल्थकेयर टीमों के लिए एक महत्वपूर्ण इंटीग्रेटेड ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू किया है। इसका उद्देश्य बिखरी हुई अलग-अलग ट्रेनिंग को एक एकीकृत क्षमता-आधारित फ्रेमवर्क में लाना है, ताकि फ्रंटलाइन स्वास्थ्यकर्मी लोगों को घर के पास बेहतर, समग्र और समय पर देखभाल उपलब्ध करा सकें।
iGOT कर्मयोगी जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए सीखने की सुविधा भी कराएगा उपलब्ध
इस प्रोग्राम का शुभारंभ केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे.पी. नड्डा ने किया। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, नई ट्रेनिंग प्रणाली फ्रंटलाइन स्वास्थ्यकर्मियों को रोकथाम, शुरुआती पहचान, इलाज और फॉलो-अप तक की पूरी श्रृंखला में सक्षम बनाएगी। यह प्रोग्राम iGOT कर्मयोगी जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए लगातार सीखने की सुविधा भी उपलब्ध कराएगा।
महिलाओं को विशेष फोकस
यह पहल खासतौर पर उन महिलाओं को सशक्त बनाने पर केंद्रित है जो प्राइमरी हेल्थकेयर वर्कफोर्स का 70 प्रतिशत से अधिक हिस्सा हैं। इनमें आशा (ASHA), एएनएम (ANM) और सीएचओ (Community Health Officer) शामिल हैं। मंत्रालय ने कहा, “यह ट्रेनिंग समुदाय-आधारित वर्कफोर्स को सहानुभूतिपूर्ण, जवाबदेह और उच्च गुणवत्ता वाली देखभाल देने में सक्षम बनाएगी तथा समुदाय और स्वास्थ्य प्रणाली के बीच विश्वास को और मजबूत करेगी।”
रणनीतिक बदलाव
मंत्रालय ने इस पहल को “बिखरी हुई ट्रेनिंग से हटकर एक व्यवस्थित और क्षमता-आधारित फ्रेमवर्क” की ओर निर्णायक बदलाव बताया है। इसके तहत प्राइमरी हेल्थकेयर टीमों को समग्र और लोगों-केंद्रित देखभाल देने वाले आत्मविश्वासी सेवा प्रदाताओं में तब्दील किया जाएगा। मंत्रालय ने इसे भारत में सार्वजनिक स्वास्थ्य के भविष्य में रणनीतिक निवेश करार दिया है।
आयुष्मान भारत से जुड़ी व्यापक पहल
यह ट्रेनिंग आयुष्मान भारत कार्यक्रम के तहत स्थापित आयुष्मान आरोग्य मंदिरों को और प्रभावी बनाने की दिशा में एक अहम कदम है। मंत्रालय ने जन आरोग्य समितियों, महिला आरोग्य समितियों और AAM शिविरों जैसे सामुदायिक मंचों के माध्यम से गहरे जुड़ाव पर भी जोर दिया है। जे.पी. नड्डा ने कहा कि सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को अंतिम छोर तक पहुंचाने और उन्हें समान, सुलभ व गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। (इनपुट-एजेंसी)


