भारत सरकार ने जलवायु परिवर्तन के मद्देनजर नीली अर्थव्यवस्था के खतरे को भांपते हुए मछुआरों के आजीविका के लिए रणनीति बनाई

मत्स्य पालन विभाग, मत्स्य पालन पशुपालन और डेयरी मंत्रालय, भारत सरकार ने जलवायु परिवर्तन के मद्देनजर नीली अर्थव्यवस्था (ब्ल्यू इकोनॉमी) के लिए निकट भविष्य के खतरे पर ध्यान दिया है, जो मछुआरों और अन्य तटीय समुदायों की आजीविका को प्रभावित कर सकता है। इस संबंध में, मत्स्य पालन विभाग, भारत सरकार ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत तटीय राज्य सरकारों के परामर्श से तटरेखा के करीब स्थित 100 क्लाइमेट रेसिलिएंट कोस्टल फिशरमैन विलेज्‍स के रूप में पहचाना है। 

फिश मार्केट्स, आइस प्लांट्स, कोल्ड स्टोरेज और आपातकालीन बचाव सुविधाओं का होगा विकास 

 पीएमएमएसवाई के अंतर्गत पहचाने गए कोस्टल फिशरमैन विलेज्‍स में प्रोत्साहित की जाने वाली गतिविधियां आवश्यकता-आधारित सुविधाएं हैं, जिनमें फिश ड्राईंग यार्ड, मत्स्य प्रसंस्करण केंद्र, फिश मार्केट्स, फिशिंग जेट्टी, आइस प्लांट्स, कोल्ड स्टोरेज और आपातकालीन बचाव सुविधाओं जैसी सामान्य सुविधाओं का विकास शामिल है। सरकार मत्स्य पालन विभाग, भारत सरकार की योजनाओं के माध्यम से क्लाइमेट रेसिलिएंट आजीविका को भी बढ़ावा दे रही है जैसे कि जलीय कृषि, विशेष रूप से।

पारंपरिक मछुआरों के परिवारों को आजीविका और पोषण सहायता प्रदान किया जाएगा

समुद्री शैवाल, खाद्य और ऑर्नामेंटल फिश, बाई वाल्व आदि की जलीय कृषि, इसके अलावा, मत्स्यन प्रतिबंध/मंद अवधि के दौरान सामाजिक-आर्थिक रूप से पिछड़े सक्रिय पारंपरिक मछुआरों के परिवारों के लिए आजीविका और पोषण सहायता और मछुआरों को बीमा कवर भी पीएमएमएसवाई योजना के अंतर्गत प्रदान किया जाता है। इसके अतिरिक्त, आईसीएआर-मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान भारत सरकार के वित्त पोषण सहायता के साथ चल रहे अनुसंधान, प्रौद्योगिकी विकास और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों के माध्यम से अंतर्देशीय और समुद्री जलीय कृषि गतिविधियों को बढ़ावा देने में योगदान दे रहे हैं।

मत्स्य पालन विभाग, भारत सरकार वैश्विक और क्षेत्रीय प्रयासों में सक्रिय रूप से रहा है शामिल 

मत्स्य पालन विभाग भारत सरकार को इस संबंध में खाद्य एवं कृषि संगठन / फूड  एंड एग्रीकल्चरल ओरगेनाईज़ेशन से कोई सहायता नहीं मिली है। हालांकि, समुद्री प्लास्टिक प्रदूषण, विशेष रूप से फिशिंग  और मरीन सेक्टर्स से होने वाले प्रदूषण को  साफ करने के लिए, मत्स्य पालन विभाग, भारत सरकार ग्लोलिट्टर पार्टनरशिप प्रोजेक्ट और रेग्लिटर प्रोजेक्ट जैसे वैश्विक और क्षेत्रीय प्रयासों में सक्रिय रूप से शामिल रहा है और इन दोनों को अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन द्वारा संयुक्त रूप से कार्यान्वित किया जाता है। 

फिशिंग गियर और जहाजों से निकलने वाले कचरे के निपटान पर दिया जोर 

ये परियोजनाएं समुद्र आधारित स्रोतों से मरीन प्लास्टिक लिट्टर को रोकने और कम करने पर ध्यान केंद्रित करती हैं, जिसमें परित्यक्त, खोए हुए या त्यागे गए फिशिंग गियर और जहाजों से निकलने वाले कचरे के निपटान पर जोर दिया जाता है। ग्लोबल एनवायरनमेंट फैसिलिटी और नोराड द्वारा सदस्य देशों से सह-वित्तपोषण के साथ बे ऑफ बंगाल लार्ज मरीन इकोसिस्टम परियोजना को एफएओ द्वारा क्षेत्रीय संगठनों जैसे बे ऑफ बंगाल इंटर-गवरनमेन्टल ऑर्गनाइज़ेशन के साथ साझेदारी में भारत सहित सदस्य देशों में कार्यान्वित किया जा रहा है। 

इंटरनेशनल फिशरीज़ गवर्नेंस में जलवायु परिवर्तन को मुख्यधारा में लाने पर दिया बल 

बीओबीएलएमई परियोजना इकोसिस्टम एप्रोच टू फिशरीज़ मैनेजमेंट की अवधारणा को बढ़ावा दे रही है, जिसका उद्देश्य पारिस्थितिक स्वास्थ्य, सामाजिक समानता और आर्थिक सत्‍ता को एकीकृत करना है, तथा यह सुनिश्चित करना कि मात्स्यिकी प्रबंधन व्यापक पारिस्थितिकी तंत्र और सामुदायिक आवश्यकताओं पर ध्यान करता है। मत्स्यपालन विभाग, भारत सरकार ने 16-19 अक्टूबर, 2023 के दौरान बीओबीपी-आईजीओ और एनएफडीबी द्वारा आयोजित इंटरनेशनल फिशरीज़ गवर्नेंस में जलवायु परिवर्तन को मुख्यधारा में लाने और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में मात्स्यिकी प्रबंधन उपायों को मजबूत करने पर एफएओ कार्यशाला की मेजबानी की। 

15 से अधिक क्षेत्रीय मात्स्यिकी निकायों ने कार्यक्रम में लिया भाग 

इस क्षेत्र के 15 से अधिक क्षेत्रीय मात्स्यिकी निकायों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया और मात्स्यिकी प्रबंधन में जलवायु परिवर्तन को मुख्यधारा में लाने के लिए सहयोग के संभावित क्षेत्रों और क्षमता विकास आवश्यकताओं की पहचान की। यह जानकारी मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी राज्य मंत्री, श्री जॉर्ज कुरियन ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।

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