स्कूलों में एआई आधारित शिक्षा को बढ़ावा दे रही सरकार, शिक्षकों के प्रशिक्षण पर विशेष जोर

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के अनुरूप केंद्र सरकार स्कूल शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और डिजिटल प्रौद्योगिकी के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए कई पहलें लागू कर रही है। शिक्षकों, स्कूल प्रमुखों और शिक्षक प्रशिक्षकों को एआई-सहायता प्राप्त शिक्षण के लिए सक्षम बनाने के साथ-साथ डिजिटल अवसंरचना को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। यह जानकारी केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में दी।

एनईपी 2020 में एआई को दिया गया प्रमुख स्थान

केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के पैरा 4.24 में कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे आधुनिक विषयों को शिक्षा प्रणाली का हिस्सा बनाने पर जोर दिया गया है। इसका उद्देश्य विभिन्न स्तरों पर छात्रों में भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल विकसित करना और शिक्षा को तकनीक आधारित बनाना है।

समग्र शिक्षा योजना के तहत शिक्षकों को मिल रहा प्रशिक्षण

उन्होंने बताया कि केंद्र प्रायोजित समग्र शिक्षा योजना के तहत शिक्षक शिक्षा और सतत पेशेवर विकास को समर्थन दिया जा रहा है। इसके तहत राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी), जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डीआईईटी), प्रखंड संसाधन केंद्र (बीआरसी) और क्लस्टर रिसोर्स सेंटर (सीआरसी) जैसे संस्थानों को मजबूत किया जा रहा है। योजना के अंतर्गत शिक्षकों, स्कूल प्रमुखों, शिक्षक प्रशिक्षकों, संसाधन व्यक्तियों, मास्टर ट्रेनर्स और नव नियुक्त शिक्षकों के सेवाकाल प्रशिक्षण का भी प्रावधान किया गया है। साथ ही सरकारी स्कूलों में डिजिटल बोर्ड, वर्चुअल कक्षाएं, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) और अन्य उभरती तकनीकों के माध्यम से डिजिटल शिक्षा को सशक्त बनाया जा रहा है।

निष्ठा कार्यक्रम से बढ़ रही शिक्षकों की क्षमता

मंत्री ने बताया कि समग्र शिक्षा के तहत संचालित निष्ठा (राष्ट्रीय स्कूल प्रमुख और शिक्षक समग्र उन्नति पहल) कार्यक्रम में एआई, डिजिटल शिक्षाशास्त्र और शैक्षिक तकनीक से जुड़े विशेष मॉड्यूल शामिल किए गए हैं। विषय-विशिष्ट मॉड्यूल में गणित, विज्ञान, भाषा और सामाजिक विज्ञान के लिए डिजिटल टूल्स का उपयोग भी सिखाया जाता है। यह कार्यक्रम दीक्षा प्लेटफॉर्म के माध्यम से उपलब्ध है, जहां शिक्षक अपनी सुविधा के अनुसार ऑनलाइन प्रशिक्षण और अध्ययन सामग्री प्राप्त कर सकते हैं।

दीक्षा प्लेटफॉर्म पर 350 से अधिक ऑनलाइन पाठ्यक्रम

जयंत चौधरी ने बताया कि दीक्षा (डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर फॉर नॉलेज शेयरिंग) अब एक मजबूत लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम के रूप में विकसित हो चुका है। यह प्लेटफॉर्म डिजिटल पाठ्यक्रम, क्यूआर-कोड आधारित पुस्तकें, शिक्षक प्रशिक्षण सामग्री, मूल्यांकन, प्रगति निगरानी और प्रमाणन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में दीक्षा पर 350 से अधिक लाइव पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं, जिनमें लगभग 59 पाठ्यक्रम कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल शिक्षण से संबंधित हैं। प्लेटफॉर्म में एआई-सक्षम व्यक्तिगत शिक्षण सहायता की सुविधा भी उपलब्ध है।

96 हजार से अधिक शिक्षकों को मिला एआई प्रशिक्षण

शिक्षा मंत्रालय और एनसीईआरटी नियमित रूप से क्षमता निर्माण कार्यक्रम, कार्यशालाएं और वेबिनार आयोजित कर रहे हैं, जिनमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल शिक्षण, आईसीटी और खुले शैक्षणिक संसाधनों के उपयोग पर प्रशिक्षण दिया जाता है। एनसीईआरटी अब तक एआई से जुड़े प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से 96,000 से अधिक प्रतिभागियों को लाभ पहुंचा चुका है। इसके अलावा, सीबीएसई, एनसीईआरटी, केंद्रीय विद्यालय संगठन (केवीएस) और नवोदय विद्यालय समिति (एनवीएस) भी शिक्षकों के लिए एआई आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित कर रहे हैं।

मेंटरिंग मिशन और इंडियाएआई मिशन से मिलेगा सहयोग

केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री ने बताया कि राष्ट्रीय मार्गदर्शन (मेंटरिंग) मिशन के तहत डिजिटल साक्षरता श्रेणी में एआई को अलग उप-श्रेणी के रूप में शामिल किया गया है, ताकि शिक्षकों को कक्षाओं में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रभावी और नैतिक उपयोग के संबंध में मार्गदर्शन मिल सके। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय कृत्रिम बुद्धिमत्ता कार्यक्रम (एनपीएआई) और इंडियाएआई मिशन के माध्यम से एआई अनुसंधान, डिजिटल अवसंरचना, उच्च क्षमता वाले कंप्यूटिंग संसाधनों, नवाचार, कुशल मानव संसाधन और जिम्मेदार एआई विकास को बढ़ावा दिया जा रहा है। इन पहलों का उद्देश्य शिक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में एआई के प्रभावी उपयोग को सुनिश्चित करना है। (इनपुट: पीआईबी)