अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने मुंबई विश्वविद्यालय में पाली, प्राकृत और अवेस्ता पहलवी और गुजरात विश्वविद्यालय में प्राकृत भाषाओं के अध्ययन के लिए उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किए हैं । इन केंद्रों का उद्देश्य उन्नत अनुसंधान, अनुवाद, पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण और पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक शिक्षाशास्त्र के साथ एकीकृत करना है।
वहीं, अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय, प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम (पीएमजेवीके) के अंतर्गत विरासत और शास्त्रीय भाषाओं के संवर्धन और संरक्षण हेतु उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने के लिए देश भर के विश्वविद्यालयों को सहायता प्रदान कर रहा है।
इसी पहल के एक भाग के रूप में अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने सोमवार को इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (डीएवीवी) में पीएमजेवीके के तहत 27.16 करोड़ रुपए की लागत से जैन अध्ययन केंद्र की शुरूआत की। इस अवसर पर “जैन धर्म और भारतीय ज्ञान प्रणाली” पर एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का भी आयोजन किया गया।
इस कार्यक्रम में मध्य प्रदेश सरकार के उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार और अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के सचिव डॉ. चंद्रशेखर कुमार तथा अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव राम सिंह भी उपस्थित थे।
इस दौरान, डॉ. चंद्रशेखर कुमार ने विश्वविद्यालय परिसर का दौरा किया और संकाय सदस्यों से बातचीत की। उन्होंने विश्वविद्यालय से जैन अध्ययन केंद्र को वैश्विक उत्कृष्टता केंद्र के रूप में विकसित करने और अनुसंधान, दस्तावेज़ीकरण और प्रसार के लिए आधुनिक तकनीक और डिजिटल उपकरणों को एकीकृत करने का आग्रह किया।
उन्होंने प्रौद्योगिकी की भूमिका पर ज़ोर देते हुए व्यापक शैक्षणिक और सांस्कृतिक जुड़ाव के लिए विरासती भाषाओं के संरक्षण, डिजिटलीकरण और संवर्धन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की क्षमता पर प्रकाश डाला। (इनपुट-पीआईबी)


