सरकार ने सोमवार को कहा कि वह देश में तिलहनों (Oilseeds) का उत्पादन बढ़ाकर 2030-31 तक 69.7 मिलियन टन तक पहुंचाने का लक्ष्य रखती है, ताकि खाद्य तेलों में आत्मनिर्भरता (Atmanirbharta) हासिल की जा सके।
नीति आयोग की अगस्त 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत चावल भूसी तेल, अरंडी, कुसुम, तिल और नाइजर जैसे कई तिलहन उत्पादों के उत्पादन में दुनिया में पहले स्थान पर है। इसके बावजूद, भारत अपनी घरेलू खाद्य तेल जरूरतों का सिर्फ 44 प्रतिशत ही देश के अंदर पूरा कर पाता है और बाकी के लिए आयात पर निर्भर रहना पड़ता है।
हालांकि 2015-16 में 63.2 प्रतिशत रही आयात निर्भरता 2023-24 में घटकर 56.25 प्रतिशत हो गई है, लेकिन कुल उपभोग बढ़ने से चुनौतियाँ अभी भी बनी हुई हैं।
इस निर्भरता को कम करने और कृषि आत्मनिर्भरता को मजबूत करने के लिए सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन (NMEO) शुरू किया है।
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NMEO-Oil Palm (2021) का उद्देश्य तेल पाम की खेती बढ़ाना और घरेलू क्रूड पाम ऑयल उत्पादन बढ़ाना है।
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NMEO-Oilseeds (2024) का फोकस पारंपरिक तिलहन फसलों में उत्पादकता, बेहतर बीज गुणवत्ता, प्रसंस्करण और बाजार लिंकिंग को मजबूत करना है।
सरकार के अनुसार:
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NMEO-Oilseeds का लक्ष्य 39 मिलियन टन से बढ़ाकर 69.7 मिलियन टन उत्पादन करना है।
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NMEO-Oil Palm के तहत 2025-26 तक 6.5 लाख हेक्टेयर में पाम की खेती और 2029-30 तक 28 लाख टन क्रूड पाम ऑयल उत्पादन का लक्ष्य है।
सरकार का कहना है कि यह मिशन भारत के खाद्य तेल क्षेत्र को आयात-निर्भरता से निकालकर एक मजबूत, प्रतिस्पर्धी और आत्मनिर्भर प्रणाली में बदल देगा। इससे किसानों को बेहतर आय, गुणवत्ता इनपुट और बाजार तक पहुँच मिलेगी, साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी।
-(इनपुटःएजेंसी)


