केंद्र सरकार बुधवार को लोकसभा में संयुक्त समिति द्वारा यथा प्रतिवेदित वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 पेश करेगी। इस संबंध में केंद्रीय संसदीय कार्य और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने मंगलवार को कहा कि कल प्रश्नकाल के बाद विधेयक को विचार और पारित करने के लिए पेश किया जाएगा और उसके बाद 8 घंटे की चर्चा होगी, जिसे बढ़ाया भी जा सकता है।
बताना चाहेंगे इससे पहले कल पार्टी मुख्यालय में किरेन रिजिजू ने भाजपा प्रवक्ताओं को वक्फ संशोधन विधेयक के बारे में जानकारी दी थी। बैठक के दौरान रिजिजू ने विधेयक का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया, जिसमें मुस्लिम समुदाय के लिए इसके लाभों पर प्रकाश डाला गया।
यह विधेयक धार्मिक संस्थानों की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप नहीं करता
किरेन रिजिजू ने जोर देकर कहा कि यह विधेयक धार्मिक संस्थानों की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप नहीं करता है और इसे उन लोगों को अधिकार देने के लिए बनाया गया है, जिन्हें पहले ये अधिकार नहीं थे। इस विधेयक का उद्देश्य वक्फ प्रबंधन में सुधार, पारदर्शिता और डिजिटलीकरण को बढ़ाना है।
संशोधन विधेयक की विपक्ष ने की कड़ी आलोचना
वहीं, दूसरी ओर संशोधन विधेयक की विपक्ष ने कड़ी आलोचना की है, जिसने बार-बार इसे “असंवैधानिक” कहा और भाजपा पर मुसलमानों के अधिकारों को “छीनने” का प्रयास करने का आरोप लगाया। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि यह विधेयक असंवैधानिक है और भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 25, 26 और 29 का “गंभीर उल्लंघन” है। ओवैसी ने कहा कि यह वक्फ विधेयक नहीं है, बल्कि यह “वक्फ बरबाद विधेयक” है।
एआईएमआईएम प्रमुख ने एनडीए के सहयोगी नीतीश कुमार, चंद्रबाबू नायडू, चिराग पासवान और जयंत चौधरी से वक्फ संशोधन विधेयक के समर्थन के पीछे के कारणों पर सवाल उठाया। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने वक्फ (संशोधन) विधेयक पर अपना कड़ा विरोध व्यक्त किया और भारतीय जनता पार्टी पर नियंत्रण हासिल करने के लिए हर चीज में “हस्तक्षेप” करने का आरोप लगाया। अखिलेश यादव ने कहा, “हम वक्फ बोर्ड विधेयक के खिलाफ हैं क्योंकि भाजपा हर चीज में हस्तक्षेप करना चाहती है। वे हर जगह नियंत्रण चाहते हैं।”
इससे पहले पिछले साल लोकसभा में पेश किया गया था यह विधेयक
विधेयक को इससे पहले पिछले साल अगस्त में लोकसभा में पेश किया गया था, जिसके बाद आगे के विचार के लिए जगदंबिका पाल के नेतृत्व में एक संयुक्त संसदीय समिति का गठन किया गया था। विधेयक का उद्देश्य वक्फ अधिनियम, 1995 में संशोधन करना है, ताकि वक्फ संपत्तियों के विनियमन और प्रबंधन में मुद्दों और चुनौतियों का निवारण किया जा सके। संशोधन विधेयक भारत में वक्फ संपत्तियों के प्रशासन और प्रबंधन में सुधार करना चाहता है।
इसका उद्देश्य पिछले अधिनियम की कमियों को दूर करना
इसका उद्देश्य पिछले अधिनियम की कमियों को दूर करना और अधिनियम का नाम बदलने, वक्फ की परिभाषाओं को अपडेट करने, पंजीकरण प्रक्रिया में सुधार और वक्फ रिकॉर्ड के प्रबंधन में प्रौद्योगिकी की भूमिका बढ़ाने जैसे बदलाव लाकर वक्फ बोर्डों की दक्षता को बढ़ाना है। वक्फ संपत्तियों को विनियमित करने के लिए अधिनियमित 1995 का वक्फ अधिनियम लंबे समय से कुप्रबंधन, भ्रष्टाचार और अतिक्रमण जैसे मुद्दों के लिए आलोचना का शिकार रहा है। (इनपुट-एएनआई)