आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब पश्चिमी देशों के रणनीतिक गठबंधन का अहम हिस्सा बनता जा रहा है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और उसके सहयोगी देश नई विश्व व्यवस्था में बढ़त हासिल करने के लिए AI का इस्तेमाल करना चाहते हैं। हालांकि, सबसे बड़ी चुनौती यह है कि अत्याधुनिक AI तकनीक फिलहाल निजी कंपनियों के पास है, जिससे सरकारों की उन पर निर्भरता बढ़ रही है।
पोलिटिया रिसर्च फाउंडेशन (PRF) की रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले महीने फ्रांस में हुए G7 शिखर सम्मेलन में दुनिया की प्रमुख AI कंपनियों के प्रमुखों ने राष्ट्राध्यक्षों के साथ तकनीक, सुरक्षा और पश्चिमी देशों के भविष्य पर चर्चा की।
रिपोर्ट के मुताबिक, OpenAI के सीईओ सैम ऑल्टमैन ने कई G7 नेताओं और अन्य देशों के प्रमुखों से द्विपक्षीय बैठकें कीं। वहीं, Anthropic के डारियो अमोडेई और Google DeepMind के डेमिस हसाबिस भी लोकतांत्रिक देशों की तकनीकी नेतृत्व से जुड़ी चर्चाओं में प्रमुख भूमिका निभाते नजर आए।
रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकारों के पास राजनीतिक और सैन्य शक्ति तो है, लेकिन वे उन तकनीकों पर निर्भर होती जा रही हैं जिन्हें वे खुद विकसित या नियंत्रित नहीं करतीं। इससे सामूहिक सुरक्षा व्यवस्था में नई चुनौतियां पैदा हो रही हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका फिलहाल AI तकनीक में सबसे आगे है और उसने पहले भी इस तकनीक को साझा करने पर कई प्रतिबंध लगाए हैं। ऐसे में उसके सहयोगी देशों के सामने यह चिंता है कि भविष्य में उन्हें जरूरी AI तकनीक कितनी आसानी से उपलब्ध हो पाएगी।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि ‘फाइव आइज’ (Five Eyes) खुफिया गठबंधन के साइबर सुरक्षा प्रमुखों ने चेतावनी दी है कि AI के तेजी से विकास के कारण मौजूदा साइबर सुरक्षा आकलन कुछ महीनों में ही पुराने पड़ सकते हैं।
इसके अलावा, चीन भी AI को अपनी सैन्य क्षमताओं में तेजी से शामिल कर रहा है। इसमें लॉजिस्टिक्स, सैन्य निर्णय लेने की प्रक्रिया और स्वायत्त (Autonomous) सिस्टम जैसे क्षेत्र शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिमी देशों के सामने सबसे बड़ी चुनौती तकनीकी बढ़त बनाए रखने और उसे तेजी से रक्षा प्रणाली में लागू करने की है।
-IANS


